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बस पास बनवाने के लिए दो माह से चक्कर काट रहे हीमोफीलिया के मरीज
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हीमोफीलिया बीमारी से ग्रस्त लोगों को हरियाणा रोडवेज में निशुल्क बस यात्रा की सुविधा मिली हुई है। रोडवेज में निशुल्क सेवा के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए बस पास बनाए जा चुके हैं, लेकिन उससे कम आयु के मरीज बस पास के लिए नागरिक अस्पताल व बस अड्डे के चक्कर काट रहे हैं। वह अस्पताल में स्वास्थ्य अधिकारियों से मिल रहे तो बस अड्डे पर जाकर रोडवेज अधिकारियों से बस पास बनवाने की गुहार लगा रहे हैं। दो महीने बीत जाने के बाद भी उनका बस पास नहीं बन पाया है।
हीमोफीलिया से ग्रस्त लोगों को सरकार की तरफ से रोडवेज बस में मुफ्त सफर करने के लिए पास की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। जिले में 30 से अधिक मरीजों के बस पास बन चुके है, लेकिन 18 वर्ष से कम आयु के 20 से अधिक मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल सकी है। उनका बस पास 31 मार्च को खत्म हो गया था। उनका दूसरा बस पास अभी तक नहीं बना है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि रोडवेज अधिकारियों को हीमोफीलिया से ग्रस्त 18 वर्ष से कम उम्र के मरीजों के बस पास बनवाने के बारे में कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन उनका अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। जबकि प्रदेशभर में हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के साथ उनके केयर टेकर का पास भी बनाया जा रहा है। जिससे हीमोफीलिया से ग्रस्त 18 वर्ष से कम आयु के मरीज किराया देकर अस्पताल तक पहुंच रहे हैं।
यह है हीमोफीलिया बीमारी
हीमोफीलिया एक आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें खून का थक्का बनना बंद हो जाता है। सामान्य लोगों में जब शरीर का कोई हिस्सा कट जाता है तो खून का थक्का बनाने के लिए जरूरी घटक खून में मौजूद प्लेटलेट्स से मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। इससे खून बहना अपने आप रुक जाता है। जिन लोगों को हीमोफीलिया होता है, उनमें खून का थक्का बनाने वाले घटक बहुत कम होते हैं। इससे उनका खून ज्यादा समय तक बहता रहता है।
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हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के साथ उनके केयर टेकर का बस पास बनवाने के लिए रोडवेज अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे गए हैं। लेकिन रोडवेज अधिकारियों की तरफ से बस पास नहीं बनाए जा रहे हैं। बच्चों को इलाज के लिए किराया देकर अस्पताल आना पड़ रहा है।
डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन सोनीपत
हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के बस पास न बनाए जाने का मामला संज्ञान में आया है। सोमवार से बच्चों के बस पास बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए बस पास शाखा में कार्यरत कर्मचारियों को पास बनाने के निर्देश दिए गए है।
राहुल जैन, महाप्रबंधक रोडवेज सोनीपत
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हीमोफीलिया से ग्रस्त लोगों को सरकार की तरफ से रोडवेज बस में मुफ्त सफर करने के लिए पास की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। जिले में 30 से अधिक मरीजों के बस पास बन चुके है, लेकिन 18 वर्ष से कम आयु के 20 से अधिक मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल सकी है। उनका बस पास 31 मार्च को खत्म हो गया था। उनका दूसरा बस पास अभी तक नहीं बना है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि रोडवेज अधिकारियों को हीमोफीलिया से ग्रस्त 18 वर्ष से कम उम्र के मरीजों के बस पास बनवाने के बारे में कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन उनका अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। जबकि प्रदेशभर में हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के साथ उनके केयर टेकर का पास भी बनाया जा रहा है। जिससे हीमोफीलिया से ग्रस्त 18 वर्ष से कम आयु के मरीज किराया देकर अस्पताल तक पहुंच रहे हैं।
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यह है हीमोफीलिया बीमारी
हीमोफीलिया एक आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें खून का थक्का बनना बंद हो जाता है। सामान्य लोगों में जब शरीर का कोई हिस्सा कट जाता है तो खून का थक्का बनाने के लिए जरूरी घटक खून में मौजूद प्लेटलेट्स से मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। इससे खून बहना अपने आप रुक जाता है। जिन लोगों को हीमोफीलिया होता है, उनमें खून का थक्का बनाने वाले घटक बहुत कम होते हैं। इससे उनका खून ज्यादा समय तक बहता रहता है।
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हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के साथ उनके केयर टेकर का बस पास बनवाने के लिए रोडवेज अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे गए हैं। लेकिन रोडवेज अधिकारियों की तरफ से बस पास नहीं बनाए जा रहे हैं। बच्चों को इलाज के लिए किराया देकर अस्पताल आना पड़ रहा है।
डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन सोनीपत
हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के बस पास न बनाए जाने का मामला संज्ञान में आया है। सोमवार से बच्चों के बस पास बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए बस पास शाखा में कार्यरत कर्मचारियों को पास बनाने के निर्देश दिए गए है।
राहुल जैन, महाप्रबंधक रोडवेज सोनीपत