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हरियाणा-उत्तर प्रदेश बॉर्डर : जमीनी विवाद निपटाने को सीमा पर लगने हैं 262 पिलर, टेंडर आवंटन का इंतजार

Sun, 01 Dec 2024 02:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sun, 01 Dec 2024 02:41 AM IST
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Haryana-Uttar Pradesh Border: 262 pillars to be installed on the border to settle land dispute, waiting for tender allotment
फोटो 06- सोनीपत के राई क्षेत्र ​स्थित गांव गढ़मिरकपुर के पास बहती यमुना। संवाद
सोनीपत। हरियाणा-उत्तर प्रदेश सीमा पर करीब पांच दशक से चले आ रहे सीमा विवाद को निपटाने के लिए 262 पिलर लगाकर निपटाने की तैयारी पर अभी ब्रेक लगा हुआ है। लोक निर्माण विभाग यमुना के साथ पिलर लगाने को लेकर कागजी कार्यवाही में जुटा है। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद आवंटन के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा जाएगा। आवंटन के लिए भी अभी माहभर का इंतजार करना पड़ सकता है। सोनीपत के गन्नौर व राई क्षेत्र में यमुना सीमा पर करीब 5.13 करोड़ रुपये की लागत से पिलर लगाकर सीमांकन किया जाना है।सरकार के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने पिलर लगवाकर दोनों प्रदेशों की सीमाओं के विवाद को खत्म करने का बीड़ा उठाया है। अधिकारियों की टीम ने यमुना क्षेत्र का दौरा कर पिलर लगवाने को लेकर निरीक्षण किया था। अब आवंटन से पहले केंद्र की ओर से सर्वे करवाकर जमीन की पैमाइश का कार्य कराया जाना है। पिलर न लगने के कारण हरियाणा-उत्तरप्रदेश के बीच कई बार सीमा विवाद हो चुका है। इसे रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने यमुनानगर से पलवल तक पिलर लगवाने के निर्देश दिए हैं। सर्वे ऑफ इंडिया से सर्वे के आधार पर राजस्व विभाग के निर्देशन में लोक निर्माण विभाग की ओर से पिलर लगवाए जाएंगे। वहीं उत्तर प्रदेश प्रशासन भी अपनी सीमा पर पिलर लगवाएगा।
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फसल बुआई व कटाई पर कई बार हुआ संघर्ष

फसल बुआई व कटाई के समय किसानों के बीच ज्यादा संघर्ष होता है। वर्ष 1997 में सांकरौद के पास भैरा बांकीपुर के ओमपाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बवाल हुआ था और अधिकारियों को बंधक भी बनाया था। वर्ष 1997 में दोनों तरफ के किसानों के बीच फायरिंग में बागपत के कुर्डी गांव के विशंभर की मौत हो गई थी। वर्ष 1997-98 में खुर्मपुर व नंगला बहलोपुर के किसानों में बवाल हुआ था। जाजल व निवाड़ा के किसानों के बीच बवाल हुआ तो खुर्मपुर व नंगला बहलोलपुर के किसानों में झगड़ा हुआ। अप्रैल 2021 में नगला बहलोलपुर के अनिल की हत्या हो गई।
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सीमा विवाद का दंश झेल रहे यह गांव

हरियाणा में सोनीपत के बेगा, चंदौली, पबनेरा, ग्यासपुर, मीमारपुर, जैनपुर, टिकौला, नांदनौर, असदपुर, गढ़ मिर्कपुर, मनौली, दहीसरा, भैरा बांकीपुर, जाजल आदि गांव के किसान सीमा विवाद की आग में झुलसते रहे हैं। वहीं उत्तरप्रदेश के जिला बागपत के बागपत, निवाड़ा, सिसाना, गौरीपुर जवाहर नगर, नैथला, निनाना, लुहारी, कौताना, खेड़ी प्रधान, खेड़ा इस्लामपुर, छपरौली, टांडा, काकौर, बदरखा, जागौस, काठा, पाली, नंगला बहलोलपुर, मवीकलां, सुभानपुर, सांकरौद आदि गांव सीमा विवाद का दंश झेल रहे हैं।
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विवाद निपटाने के लिए दिसंबर 2019 में कराया गया था सीमांकन
दोनों प्रदेशों के किसान पांच दशक से सीमा विवाद की आग में पिस रहे हैं। करीब 47 गांव के किसानों के बीच यमुना खादर की करीब 4500 हेक्टेयर जमीन को लेकर विवाद रहा है। अब तक करीब दो दर्जन से अधिक बार खूनी संघर्ष होने से कई की जान जा चुकी हैं। अचानक बवाल होने पर शासन-प्रशासन के लोग सक्रिय जरूर रहे, लेकिन बाद में बिना विवाद निपटाए मामले को अधर में छोड़ दिया जाता था। दिसंबर 2019 में विवाद निपटाने के लिए कदम बढ़ाते हुए सीमांकन कराया गया, लेकिन अभी तक पूरे क्षेत्र में पिलर नहीं लगाए जा सके थे।
दोनों प्रदेशों की बैठक के बाद भी नहीं मिली थी सफलता
यमुना क्षेत्र के विवाद को निपटाने के लिए केंद्र सरकार ने 1974 में तत्कालीन कृषि मंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया। दीक्षित अवाॅर्ड के तहत दोनों प्रदेश की जमीन पर पिलर लगवाए गए थे। उस दौरान कब्जा दिलवाने की कार्रवाई प्रशासन को करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और यह विवाद लगातार बढ़ता गया। विवाद को लेकर कई बार खूनी संघर्ष भी हुआ। इसके बावजूद प्रशासन इस विवाद को सुलझा नहीं पाया था। हालांकि कई बार दोनों प्रदेशों के अधिकारियों की बैठक भी हुई, लेकिन किसी ने ठोस रुचि नहीं दिखाई थी।


सोनीपत के गन्नौर व राई क्षेत्र में यमुना सीमा पर पिलर लगवाने के लिए कागजी कार्यवाही की जा रही है। कागजी कार्यवाही के बाद अलॉटमेंट के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा जाएगा। इसके बाद ही पिलर लगाने का काम शुरू होगा।
पंकज गौड़, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, सोनीपत
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