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निहंग सिखों की देखरेख में गुरु साहिब की पालकी आगे-आगे चली

Sun, 12 Dec 2021 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 12 Dec 2021 12:27 AM IST
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Guru Sahib's palaki went ahead under the supervision of Nihang Sikhs
घर वापसी के दौरान केएमपी के जीरो प्वाइंट पर किसानों का पुष्प वर्षा से स्वागत करते हुए। संवाद - फोटो : Sonipat
सोनीपत। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किसान शनिवार को कुंडली बॉर्डर से घर की ओर रवाना हो गए। बहुत से निहंग सिख भी किसानों के साथ ही रवाना हुए। इससे पहले उन्होंने कुंडली बॉर्डर पर घोड़ों के साथ जमकर करतब दिखाए। निहंग सिखों ने गुरु साहिब की सभी पालकियां अदब के साथ रवाना की और खुद उनके पीछे चले। इस दौरान निहंग सिखों ने गुरु साहिब के जयकारे के साथ फतेह के नारे लगाए और अरदास भी की। जत्थेदार बाबा राजा राज सिंह ने बताया कि वह किसानों के साथ आए थे और अब किसानों के साथ ही रवाना हो रहे हैं। गुरु साहिब की पालकियों को कीर्तन पाठ के साथ दरबार साहिब ले जाया जाएगा।
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एसकेएम की मांगों के लिए 9 दिसंबर को सरकार की ओर से आधिकारिक पत्र भेजा गया था। पत्र मिलने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन को स्थगित कर दिया था। सीडीएस बिपिन रावत के निधन के चलते शुक्रवार को उनकी अंत्येष्टि तक जश्न को टाल दिया गया था और तय किया था कि 11 दिसंबर को किसान जश्न मनाते हुए अपने घरों की ओर रवाना होंगे। किसानों की संख्या अधिक होने के कारण जाम से बचने के लिए उन्हें अलग-अलग जत्थों में रवाना करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार पहले दिन शनिवार को सुबह साढ़े 8 बजे किसान अपने सामान लदे वाहनों के साथ जीटी रोड पर केजीपी-केएमपी जीरो प्वाइंट के पास जमा हो गए। सबसे पहले अरदास की गई। उसके बाद जश्न का दौर शुरू हो गया।
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डीजे से लेकर ढोल की थाप पर थिरके किसान
डीजे से लेकर ढोल की थाप पर युवा, बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे जमकर थिरके। इस दौरान किसानों पर पुष्प वर्षा की गई। खास बात यह रही कि किसानों ने अपने हर वाहन पर ठीक उसी तरह से झंडे लगाए हुए थे, जैसे आंदोलन की शुरुआत में यहां आते हुए लगाए थे, मगर इस बार जीत की नारेबाजी के चलते माहौल बदला-बदला रहा। किसानों ने किसान एकता व किसानों की जीत के जमकर नारे लगाए। यही नहीं, किसानों ने उन लोगों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने आंदोलन में उनका सहयोग कर किया। पिछले दो दिनों के दौरान स्थानीय लोगों का आभार जताने के लिए किसान उनके घरों तक भी गए।
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सामान मजदूरों व जरूरतमंदों को सौंपा
धरना स्थल से कई किसानों ने अपनी झोपड़ी व टेंट हटाने के बाद कूलर, हीटर, बचा राशन व अन्य सामान आसपास के मजदूरों व जरूरतमंदों को सौंप दिया। किसानों ने बताया कि उनके पास बहुत सा सामान ऐसा था जो वह वापस नहीं ले जाना चाहते थे और उन लोगों को देना चाहते थे जो साल भर से आंदोलन में उनके मददगार रहे हैं। इन लोगों ने बॉर्डर पर किसानों के साथ लंगर में काम किया था। किसानों का कहना था कि अब उनका फर्ज बनता है कि उनकी कोई मदद की जाए। किसानों ने कुछ बर्तन व रोजमर्रा का सामान भी जरूरतमंदों को दिया।
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