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देश की झोली में पदक डालने के लिए पैरालंपिक में उतरेंगे गुरु-शिष्य
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धर्मबीर नैन।
- फोटो : Sonipat
विष्णु कुमार
सोनीपत। टोक्यो पैरालंपिक में दूसरी बार देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे सोनीपत के भदाना निवासी धर्मबीर नैन कड़ी मेहनत कर रहे हैं। खास बात यह है कि देश की झोली में पदक डालने के लिए वह अपने गुरु अमित सरोहा के के साथ टोक्यो पैरालंपिक के मैदान में उतरेंगे। धर्मबीर नैन अपने गुरु अमित सरोहा के सामने कड़ी चुनौती पेश करेंगे। देश के लिए पदक लाने को आतुर धर्मबीर रोजाना सुबह-शाम 4 से 5 घंटे तक पसीना बहा रहे हैं। देशवासियों को भी धर्मबीर नैन से देश के लिए पदक लाने की पूरी उम्मीद है।
टोक्यो पैरालंपिक के लिए 26 अगस्त को रवाना होने वाले धर्मबीर नैन का सफर कठिनाइयों भरा रहा है। हादसे में आधा शरीर निष्क्रिय होने के बाद भी धर्मबीर ने हार नहीं मानी और मनोबल को बुलंद कर खुद को पैरालंपिक के लिए तैयार किया। उनके हौसले का ही परिणाम है कि वह आज पैरालंपिक में दूसरी बार देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। चलने-फिरने व खुद बैठने में निष्क्रिय धर्मबीर ऐसे युवाओं, खिलाड़ियों व दिव्यांगों के लिए एक मिसाल हैं, जो किसी न किसी हादसे के बाद खुद को दूसरों पर बोझ मानने लगते हैं। (संवाद)
हादसे ने बदलकर रख दी जिंदगी
धर्मबीर नैन ने बताया कि उन्हें बचपन से ही खेलने का शौक रहा है। तीन बहनों का इकलौता भाई होने के कारण परिवार ने घर से बाहर जाकर खेलने की अनुमति नहीं दी। जून 2012 में जब वह एमए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे, तब दोस्तों के साथ नहर में नहाने के लिए गए थे। नहाने के लिए नहर में छलांग लगाई, लेकिन जलस्तर कम होने से गर्दन सीधा जमीन से जा टकराई। इस हादसे में रीढ़ की हड्डी टूट गई और आधे से ज्यादा शरीर ने काम करना बंद कर दिया। दिल्ली में इलाज करने के बाद छह महीने गुरुग्राम में आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण लिया। जिस खेल से परिवार दूर रखना चाहते थे, उस खेल का मोह दुर्घटना के बाद भी नहीं छूटा और खुद को ऐसा तैयार किया कि हर कोई उनकी काबिलियत का लोहा मान रहा है।
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अमित सरोहा को देख बदली जिंदगी
पांच फुट साढ़े नौ इंच कद का धर्मबीर नैन हादसे के बाद व्हीलचेयर पर आ गया था। वर्ष 2013 में उसने पैरा एथलीट अमित सरोहा के बारे में पढ़ा और उनसे मुलाकात की। वहीं से धर्मबीर के जीवन में भी बदलाव आ गया। सैकड़ों लोगों के आदर्श अमित सरोहा को धर्मबीर ने भी अपना गुरु बनाया और प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। शुरुआती दौर में धर्मबीर क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो में खेलता रहा। वर्ष 2015 में धर्मबीर ने नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और बेहतर खेल दिखाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किए। उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
ये हैं उपलब्धियां
-वर्ष 2015 में नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया व कांस्य पदक जीता।
-वर्ष 2016 की नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया।
-वर्ष 2016 के रियो ओलंपिक में पदक जीतने से चूक गए।
-वर्ष 2017 व 2019 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा किया।
-वर्ष 2018 में जकार्ता में होने वाले खेलों के क्लब थ्रो में रजत पदक हासिल किया।
खेल नहीं होता तो बिस्तर पर ही होते
पैरा ओलंपियन धर्मबीर नैन ने बताया कि शरीर से हष्ट-पुष्ट व्यक्ति जब अचानक से व्हीलचेयर पर आ जाता है तो उसका मनोबल काफी गिर जाता है। ऐसी स्थिति में परिवार, दोस्तों व गुरु अमित सरोहा के मार्गदर्शन व प्रेरणा से खेलना शुरू किया तो जिंदगी पूरी तरह बदल गई। आज अगर खेल में नहीं होते तो शायद बिस्तर पर ही होते। धर्मबीर देश के लिए पदक जीतने के लिए कड़ा अभ्यास कर रहे हैं और 30 मीटर से ज्यादा का थ्रो करने में सफल हुए हैं। उनकी मेहनत ही उन्हें देश के लिए पदक दिलाने में कामयाबी दिलाएगी।
दिव्यांगता को हराकर लोगों के लिए बने मार्गदर्शक
धर्मबीर नैन अपने दोस्त अमित बाल्याण के साथ उसकी बाल्याण एकेडमी में जरूरतमंदों को नि:शुल्क सुविधाएं उपलब्ध करवाते हैं। दोनों बचपन के दोस्त हैं। अमित एक हादसे के बाद व्हीलचेयर पर आ गए थे, उसके बाद धर्मबीर को भी हादसे ने व्हीलचेयर पर बैठा दिया। 2018 में एशियन मेडलिस्ट अमित बाल्याण व धर्मबीर नैन के मनोबल काफी ऊंचे हैं और दोनों दिव्यांगता को हराकर लोगों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में खड़े हैं।
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सोनीपत। टोक्यो पैरालंपिक में दूसरी बार देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे सोनीपत के भदाना निवासी धर्मबीर नैन कड़ी मेहनत कर रहे हैं। खास बात यह है कि देश की झोली में पदक डालने के लिए वह अपने गुरु अमित सरोहा के के साथ टोक्यो पैरालंपिक के मैदान में उतरेंगे। धर्मबीर नैन अपने गुरु अमित सरोहा के सामने कड़ी चुनौती पेश करेंगे। देश के लिए पदक लाने को आतुर धर्मबीर रोजाना सुबह-शाम 4 से 5 घंटे तक पसीना बहा रहे हैं। देशवासियों को भी धर्मबीर नैन से देश के लिए पदक लाने की पूरी उम्मीद है।
टोक्यो पैरालंपिक के लिए 26 अगस्त को रवाना होने वाले धर्मबीर नैन का सफर कठिनाइयों भरा रहा है। हादसे में आधा शरीर निष्क्रिय होने के बाद भी धर्मबीर ने हार नहीं मानी और मनोबल को बुलंद कर खुद को पैरालंपिक के लिए तैयार किया। उनके हौसले का ही परिणाम है कि वह आज पैरालंपिक में दूसरी बार देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। चलने-फिरने व खुद बैठने में निष्क्रिय धर्मबीर ऐसे युवाओं, खिलाड़ियों व दिव्यांगों के लिए एक मिसाल हैं, जो किसी न किसी हादसे के बाद खुद को दूसरों पर बोझ मानने लगते हैं। (संवाद)
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हादसे ने बदलकर रख दी जिंदगी
धर्मबीर नैन ने बताया कि उन्हें बचपन से ही खेलने का शौक रहा है। तीन बहनों का इकलौता भाई होने के कारण परिवार ने घर से बाहर जाकर खेलने की अनुमति नहीं दी। जून 2012 में जब वह एमए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे, तब दोस्तों के साथ नहर में नहाने के लिए गए थे। नहाने के लिए नहर में छलांग लगाई, लेकिन जलस्तर कम होने से गर्दन सीधा जमीन से जा टकराई। इस हादसे में रीढ़ की हड्डी टूट गई और आधे से ज्यादा शरीर ने काम करना बंद कर दिया। दिल्ली में इलाज करने के बाद छह महीने गुरुग्राम में आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण लिया। जिस खेल से परिवार दूर रखना चाहते थे, उस खेल का मोह दुर्घटना के बाद भी नहीं छूटा और खुद को ऐसा तैयार किया कि हर कोई उनकी काबिलियत का लोहा मान रहा है।
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अमित सरोहा को देख बदली जिंदगी
पांच फुट साढ़े नौ इंच कद का धर्मबीर नैन हादसे के बाद व्हीलचेयर पर आ गया था। वर्ष 2013 में उसने पैरा एथलीट अमित सरोहा के बारे में पढ़ा और उनसे मुलाकात की। वहीं से धर्मबीर के जीवन में भी बदलाव आ गया। सैकड़ों लोगों के आदर्श अमित सरोहा को धर्मबीर ने भी अपना गुरु बनाया और प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। शुरुआती दौर में धर्मबीर क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो में खेलता रहा। वर्ष 2015 में धर्मबीर ने नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और बेहतर खेल दिखाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किए। उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
ये हैं उपलब्धियां
-वर्ष 2015 में नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया व कांस्य पदक जीता।
-वर्ष 2016 की नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया।
-वर्ष 2016 के रियो ओलंपिक में पदक जीतने से चूक गए।
-वर्ष 2017 व 2019 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा किया।
-वर्ष 2018 में जकार्ता में होने वाले खेलों के क्लब थ्रो में रजत पदक हासिल किया।
खेल नहीं होता तो बिस्तर पर ही होते
पैरा ओलंपियन धर्मबीर नैन ने बताया कि शरीर से हष्ट-पुष्ट व्यक्ति जब अचानक से व्हीलचेयर पर आ जाता है तो उसका मनोबल काफी गिर जाता है। ऐसी स्थिति में परिवार, दोस्तों व गुरु अमित सरोहा के मार्गदर्शन व प्रेरणा से खेलना शुरू किया तो जिंदगी पूरी तरह बदल गई। आज अगर खेल में नहीं होते तो शायद बिस्तर पर ही होते। धर्मबीर देश के लिए पदक जीतने के लिए कड़ा अभ्यास कर रहे हैं और 30 मीटर से ज्यादा का थ्रो करने में सफल हुए हैं। उनकी मेहनत ही उन्हें देश के लिए पदक दिलाने में कामयाबी दिलाएगी।
दिव्यांगता को हराकर लोगों के लिए बने मार्गदर्शक
धर्मबीर नैन अपने दोस्त अमित बाल्याण के साथ उसकी बाल्याण एकेडमी में जरूरतमंदों को नि:शुल्क सुविधाएं उपलब्ध करवाते हैं। दोनों बचपन के दोस्त हैं। अमित एक हादसे के बाद व्हीलचेयर पर आ गए थे, उसके बाद धर्मबीर को भी हादसे ने व्हीलचेयर पर बैठा दिया। 2018 में एशियन मेडलिस्ट अमित बाल्याण व धर्मबीर नैन के मनोबल काफी ऊंचे हैं और दोनों दिव्यांगता को हराकर लोगों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में खड़े हैं।