फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   fraud, potato production, sell, vegitable, sonipat

देसी आलू को पहाड़ी बनाने का खेल

Tue, 11 Oct 2016 01:00 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत Updated Tue, 11 Oct 2016 01:00 AM IST
विज्ञापन
fraud, potato production, sell, vegitable, sonipat
अालू के सैंपल - फोटो : sonipat
जिले में देसी आलू को पहाड़ी बनाने का खेल सरेआम चल रहा है। वहीं, अधिकारी नियमों को ढाल बनाकर कार्रवाई के नाम पर बच रहे हैं। 20 दिन पहले आलू के खेल की शिकायत होने के बावजूद मार्केट कमेटी ने कार्रवाई नहीं की। अधिकारियों का कहना है कि कमेटी का काम आलू बिकवाना है, यह जांच करना नहीं कि आलू मिलावटी है या नहीं। हालांकि, सोमवार को स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और मंडी में जाकर आलू के सैंपल लिए।
विज्ञापन


हाउसिंग बोर्ड कालोनी के एक युवक ने 19 सितंबर को मार्केट कमेटी के सचिव को शिकायत दी थी कि सब्जी मंडी में कुछ आढ़ती व मासाखोर देसी आलू को पहाड़ी बताकर बेच रहे हैं। इसके लिए केमिकल युक्त पाउडर का प्रयोग किया जा रहा है। पहाड़ी आलू देसी आलू से न केवल महंगा होता है, बल्कि इसका स्वाद भी बेहतर होता है। शिकायत के बाद मामले में जांच कर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन इसके बावजूद मार्केट कमेटी की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया।
विज्ञापन


स्वास्थ्य विभाग आया हरकत में, आलू के लिए सैंपल
नियमों के तहत, मार्केट कमेटी का मुख्य कार्य मंडी के अंदर सब्जियों की बिक्री करवाना है, लेकिन अगर कमेटी के पास इस तरह की शिकायत आई थी तो उसे कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास भेजा जा सकता था। मामले को उजागर हुए 20 दिन हो गए। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके शर्मा मंडी में पहुंचे और दो जगह से आलू के सैंपल लिए। 20 दिन में सैंपल की रिपोर्ट आएगी। खास बात यह है कि जहां से आलू के सैंपल लिए गए हैं, वहां के माल पर किसी तरह की बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई है। अब सवाल उठता है कि अगर आलू के सैंपल फेल पाए गए तो यह जवाब कौन देगा कि जो आलू खरीद कर लोग खा चुके हैं, उसकी जिम्मेदारी किसकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मार्केट कमेटी के सेक्रेटरी राकेश जैन से सीधी बातचीत
सवाल-20 दिन पहले शिकायत दी गई थी कमेटी ने क्या कदम उठाए?
जवाब-कुछ नहीं कहा।  
सवाल-क्या कारण है आपने कार्रवाई नहीं की?
जवाब-कार्रवाई करना स्वास्थ्य विभाग का काम है कमेटी का नहीं।
सवाल-कमेटी का क्या कार्य है?  
जवाब- मंडी में किसान की फसल बिकवाना है। 
सवाल-चाहे मंडी में मिलावटी माल बिकता रहे? 
जवाब- ऐसा कुछ नहीं है, कमेटी इसमें कुछ नहीं कर सकती।
सवाल-आप पर शिकायतकर्ता व व्यापारियों के बीच समझौता करवाने के आरोप हैं। 
जवाब-मेरे ऊपर लगाए गए आरोप गलत हैं।

ये बोले जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी 
सब्जी मंडी से केमिकल पाउडर लगाकर आलू बेचने की शिकायत मिली थी जिस पर कार्रवाई करते हुए दो जगह से आलू के सैंपल लिए गए हैं। अगर सैंपल फेल होते हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

डीके शर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी 

ऐसे समझें आलू की मुनाफाखोरी का खेल
नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक व्यापारी ने बताया कि देसी आलू की अपेक्षा पहाड़ी आलू महंगा होता है। आम लोग भी स्वाद के लिए पहाड़ी आलू ज्यादा खरीदते हैं। ऐसे में देसी आलू को पहले स्टोर में रखा जाता है, जहां आलू को स्वच्छ रखने के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। इसके बाद जब आलू को बाहर निकाला जाता है तो उसके ऊपर केमिकल होने के कारण धूल की परत आसानी से जम जाती है, जो पहाड़ी नजर आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed