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Sonipat News: बाढ़ से प्रभावित गांवों में बढ़े आई फ्लू मरीज
Sun, 23 Jul 2023 12:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 23 Jul 2023 12:51 AM IST
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फोटो 35. गांव मनौली टाेंकी में फॉगिंग करते हुए स्वास्थ्य कर्मचारी। संवाद
सोनीपत। बाढ़ से निजात तो मिल गई, लेकिन खतरा अभी भी टला नहीं है। यमुना में हथनीकुंड बैराज से फिर 2.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। वहीं बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाले लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे है। अब आई फ्लू के साथ चर्म रोगी ज्यादा मिल रहे हैं। लोगों की आंखों में जलन होने के साथ आंखें लाल हो रही हैं। यह संक्रमण एक दूसरे से तेजी से फैल रहा है। साथ ही लोगों को डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए फॉगिंग भी शुरू कर दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आठ शिविर लगाए। गढ़ मिर्कपुर, जाजल, टोंकी, मनोली टोंकी, जगदीशपुर, खुर्मपुर, झुंडपुर, टांडा में लगे शिविरों में 168 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इनमें सबसे ज्यादा बुखार, एलर्जी के भी मरीज मिले। इससे बचाव के लिए काम शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने आंखों के ड्रॉप की कमी न रहे, इसके लिए पहले से डिमांड कर रखी है।
वहीं बाढ़ प्रभावित गांवों में गड्ढों व निचले स्थानों पर भरे पानी की वजह से डेंगू और मलेरिया के वाहक मच्छर पैदा हो रहे हैं। मोबाइल टीमों को हर वक्त अलर्ट पर रखा गया है। लोगों को इससे बचाव को जागरूक करने के साथ फॉगिंग कराई जा रही है।
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यमुना का जलस्तर नियंत्रित होने के बाद बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन गांव में गड्ढों व निचले इलाकों में अभी भी पानी भरा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आकलन के अनुसार बाढ़ प्रभावित गांवों में इस समय डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जिले में जून तक डेंगू के 09 मरीज मिल चुके है, हालांकि 25 दिन से डेंगू का कोई मरीज नहीं मिला है। राहत की बात यह है कि मलेरिया का कोई मरीज नहीं मिला है। इन बीमारियों से बचाव के लिए बाढ़ग्रस्त इलाकों में फाॅगिंग शुरू कर दी गई है।
आई फ्लू या कंजक्टिवाइटिस
नागरिक अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. विकास चहल ने बताया कि आई फ्लू को मेडिकल भाषा में कंजक्टिवाइटिस कहते हैं। जो बारिश के मौसम में होने वाली आम समस्या होती है। आई फ्लू के दौरान आंखों के सफेद हिस्से में संक्रमण हो जाता है। बारिश के दौरान फंगल संक्रमण सहित हवा में प्रदूषण, वातावरण में नमी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। जिसके चलते कई बार लोगों को आंखों से संबंधित समस्या बढ़ जाती है। प्रभावित मरीज के संपर्क में आने के बाद ही ये बीमारी दूसरे व्यक्ति को अपनी गिरफ्त में ले लेती है और बहुत तेजी से लोगों के बीच अपना असर दिखाती है।
आई फ्लू से बचने के लिए स्कूलों से भेजे जा रहे संदेश
आई फ्लू से बचने के लिए स्कूल संचालकों की ओर से विद्यार्थियों के अभिभावकों के फोन पर मैसेज भी भेजे जाने लगे हैं। खादर क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में विद्यार्थी आई फ्लू से पीड़ित हो रहे हैं। जिन्हें पढ़ाई करने में परेशानी होने लगी है। स्कूल संचालकों की ओर से अभिभावकों को यही सलाह दी जा रही है कि यदि बच्चा आई फ्लू से पीड़ित है तो उसे घर पर ही रखें। साथ ही अपने बच्चे को तभी स्कूल भेजें, जब वह पूरी तरह से ठीक हो जाए।
बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाले लोग आई फ्लू व अन्य बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। विभाग की ओर से इन इलाकों में 13 जुलाई से शिविर लगाए गए हैं। साथ ही लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है। लोगों को डेंगू और मलेरिया से बचाने के लिए बाढ़ग्रस्त इलाकों को फॉगिंग शुरू करवाई गई है। -डॉ. अनविता कौशिक, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी।
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स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आठ शिविर लगाए। गढ़ मिर्कपुर, जाजल, टोंकी, मनोली टोंकी, जगदीशपुर, खुर्मपुर, झुंडपुर, टांडा में लगे शिविरों में 168 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इनमें सबसे ज्यादा बुखार, एलर्जी के भी मरीज मिले। इससे बचाव के लिए काम शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने आंखों के ड्रॉप की कमी न रहे, इसके लिए पहले से डिमांड कर रखी है।
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वहीं बाढ़ प्रभावित गांवों में गड्ढों व निचले स्थानों पर भरे पानी की वजह से डेंगू और मलेरिया के वाहक मच्छर पैदा हो रहे हैं। मोबाइल टीमों को हर वक्त अलर्ट पर रखा गया है। लोगों को इससे बचाव को जागरूक करने के साथ फॉगिंग कराई जा रही है।
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यमुना का जलस्तर नियंत्रित होने के बाद बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन गांव में गड्ढों व निचले इलाकों में अभी भी पानी भरा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आकलन के अनुसार बाढ़ प्रभावित गांवों में इस समय डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जिले में जून तक डेंगू के 09 मरीज मिल चुके है, हालांकि 25 दिन से डेंगू का कोई मरीज नहीं मिला है। राहत की बात यह है कि मलेरिया का कोई मरीज नहीं मिला है। इन बीमारियों से बचाव के लिए बाढ़ग्रस्त इलाकों में फाॅगिंग शुरू कर दी गई है।
आई फ्लू या कंजक्टिवाइटिस
नागरिक अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. विकास चहल ने बताया कि आई फ्लू को मेडिकल भाषा में कंजक्टिवाइटिस कहते हैं। जो बारिश के मौसम में होने वाली आम समस्या होती है। आई फ्लू के दौरान आंखों के सफेद हिस्से में संक्रमण हो जाता है। बारिश के दौरान फंगल संक्रमण सहित हवा में प्रदूषण, वातावरण में नमी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। जिसके चलते कई बार लोगों को आंखों से संबंधित समस्या बढ़ जाती है। प्रभावित मरीज के संपर्क में आने के बाद ही ये बीमारी दूसरे व्यक्ति को अपनी गिरफ्त में ले लेती है और बहुत तेजी से लोगों के बीच अपना असर दिखाती है।
आई फ्लू से बचने के लिए स्कूलों से भेजे जा रहे संदेश
आई फ्लू से बचने के लिए स्कूल संचालकों की ओर से विद्यार्थियों के अभिभावकों के फोन पर मैसेज भी भेजे जाने लगे हैं। खादर क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में विद्यार्थी आई फ्लू से पीड़ित हो रहे हैं। जिन्हें पढ़ाई करने में परेशानी होने लगी है। स्कूल संचालकों की ओर से अभिभावकों को यही सलाह दी जा रही है कि यदि बच्चा आई फ्लू से पीड़ित है तो उसे घर पर ही रखें। साथ ही अपने बच्चे को तभी स्कूल भेजें, जब वह पूरी तरह से ठीक हो जाए।
बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाले लोग आई फ्लू व अन्य बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। विभाग की ओर से इन इलाकों में 13 जुलाई से शिविर लगाए गए हैं। साथ ही लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है। लोगों को डेंगू और मलेरिया से बचाने के लिए बाढ़ग्रस्त इलाकों को फॉगिंग शुरू करवाई गई है। -डॉ. अनविता कौशिक, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी।

फोटो 35. गांव मनौली टाेंकी में फॉगिंग करते हुए स्वास्थ्य कर्मचारी। संवाद