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किसान आंदोलन के सहारे गुरनाम चढूनी ने अपना संगठन राष्ट्रीय स्तर का बनाया, अध्यक्ष भी खुद ही बने
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सोनीपत। किसान आंदोलन के बीच संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य गुरनाम सिंह चढूनी अपना रुतबा बढ़ाने में लगे हुए हैं। जहां तीन दिन पहले ही देश के 38 संगठनों को जोड़कर भारतीय किसान मजदूर फेडरेशन बनाई गई थी, वहीं अब गुरनाम सिंह चढूनी ने अपने संगठन भाकियू चढूनी गुट को हरियाणा से बाहर निकालते हुए राष्ट्रीय स्तर का बना दिया है। इसकी घोषणा रविवार को कुंडली बॉर्डर धरनास्थल पर कर दी गई और वहां राष्ट्रीय अध्यक्ष भी गुरनाम सिंह चढूनी को चुना गया।
कुंडली बॉर्डर धरनास्थल पर रविवार को भाकियू चढूनी गुट की प्रदेश स्तरीय बैठक हुई। इसमें प्रदेशाध्यक्ष रहे गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि अब स्थिति को देखते हुए संगठन को हरियाणा से बाहर निकालकर राष्ट्रीय स्तर का बनाया जा रहा है और इसके लिए पंजाब का एक संगठन विलय भी कर गया है। इसके अलावा अन्य प्रदेशों में पदाधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं, जिससे हरियाणा व अन्य प्रदेशों में ज्यादा से ज्यादा सदस्यों को संगठन से जोड़ा जा सके। वहां संगठन को राष्ट्रीय स्तर का बनाने की घोषणा के बाद गुरनाम सिंह चढूनी को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया। गुरनाम चढूनी ने बताया कि बैठक में जिलाध्यक्ष से लेकर ब्लॉक अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी नियुक्त किए हैं और 5 जून को भाजपा के सांसद, विधायक व अन्य नेताओं के कार्यालयों पर कृषि कानून की प्रतियां फूंकने के लिए ड्यूटी लगाई गई है। उनके अनुसार जिस तरह से पिछले दिनों करनाल से किसानों का जत्था बॉर्डर पर पहुंचा था, अब 6 जून को अंबाला व 10 जून को पानीपत से किसान बॉर्डर पर पहुंचेंगे। यमुनानगर से प्रदेश संगठन सचिव हरपाल सिंह ने कहा कि अब उनका संगठन राष्ट्रीय स्तर पर काम करेगा। आगे की रणनीति बनाने के लिए 20 जून को दोबारा बैठक होगी। महिला प्रदेशाध्यक्ष सुमन हुड्डा ने कहा कि जिस तरह से महिलाओं ने अभी तक घर का मोर्चा संभाला है, उस तरह ही आगे आकर बॉर्डर पर मोर्चा संभालें। प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने कहा कि कोरोना के नाम पर किसानों व आम लोगों को बर्बाद किया जा रहा है। उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। यहां निर्णय लिया गया है कि सरकार से लड़ेंगे, हम गांव-गांव जाएंगे और संगठन को मजबूत करेंगे।
गुरनाम चढूनी का अजीब तर्क, धरनास्थल को तीर्थ स्थान बताया, यहां कोरोना नहीं आता
जिस जगह पर भाकियू चढूनी गुट की बैठक की गई, वहां कोरोना से बचाव के लिए किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया। वहां किसी ने मास्क नहीं लगाया तो सामाजिक दूरी का ध्यान भी नहीं रखा गया। उसके बाद कोरोना के बारे में जब गुरनाम चढूनी से पूछा गया तो उन्होंने अजीब तर्क दिया। उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर धरने चल रहे हैं, वह तीर्थ स्थान है और तीर्थ स्थान पर कोरोना नहीं आता है। कोरोना शहर व घरों में आता है। इसलिए लोगों को यहां आकर बैठना चाहिए।
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कुंडली बॉर्डर धरनास्थल पर रविवार को भाकियू चढूनी गुट की प्रदेश स्तरीय बैठक हुई। इसमें प्रदेशाध्यक्ष रहे गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि अब स्थिति को देखते हुए संगठन को हरियाणा से बाहर निकालकर राष्ट्रीय स्तर का बनाया जा रहा है और इसके लिए पंजाब का एक संगठन विलय भी कर गया है। इसके अलावा अन्य प्रदेशों में पदाधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं, जिससे हरियाणा व अन्य प्रदेशों में ज्यादा से ज्यादा सदस्यों को संगठन से जोड़ा जा सके। वहां संगठन को राष्ट्रीय स्तर का बनाने की घोषणा के बाद गुरनाम सिंह चढूनी को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया। गुरनाम चढूनी ने बताया कि बैठक में जिलाध्यक्ष से लेकर ब्लॉक अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी नियुक्त किए हैं और 5 जून को भाजपा के सांसद, विधायक व अन्य नेताओं के कार्यालयों पर कृषि कानून की प्रतियां फूंकने के लिए ड्यूटी लगाई गई है। उनके अनुसार जिस तरह से पिछले दिनों करनाल से किसानों का जत्था बॉर्डर पर पहुंचा था, अब 6 जून को अंबाला व 10 जून को पानीपत से किसान बॉर्डर पर पहुंचेंगे। यमुनानगर से प्रदेश संगठन सचिव हरपाल सिंह ने कहा कि अब उनका संगठन राष्ट्रीय स्तर पर काम करेगा। आगे की रणनीति बनाने के लिए 20 जून को दोबारा बैठक होगी। महिला प्रदेशाध्यक्ष सुमन हुड्डा ने कहा कि जिस तरह से महिलाओं ने अभी तक घर का मोर्चा संभाला है, उस तरह ही आगे आकर बॉर्डर पर मोर्चा संभालें। प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने कहा कि कोरोना के नाम पर किसानों व आम लोगों को बर्बाद किया जा रहा है। उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। यहां निर्णय लिया गया है कि सरकार से लड़ेंगे, हम गांव-गांव जाएंगे और संगठन को मजबूत करेंगे।
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गुरनाम चढूनी का अजीब तर्क, धरनास्थल को तीर्थ स्थान बताया, यहां कोरोना नहीं आता
जिस जगह पर भाकियू चढूनी गुट की बैठक की गई, वहां कोरोना से बचाव के लिए किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया। वहां किसी ने मास्क नहीं लगाया तो सामाजिक दूरी का ध्यान भी नहीं रखा गया। उसके बाद कोरोना के बारे में जब गुरनाम चढूनी से पूछा गया तो उन्होंने अजीब तर्क दिया। उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर धरने चल रहे हैं, वह तीर्थ स्थान है और तीर्थ स्थान पर कोरोना नहीं आता है। कोरोना शहर व घरों में आता है। इसलिए लोगों को यहां आकर बैठना चाहिए।
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