किसान आंदोलन : सरकार के रुख से चढ़ रहा किसानों का पारा, कड़े फैसले लेने लगे आंदोलनकारी, बन सकते हैं टकराव के हालात
- किसान नेताओं ने फिर से कड़े फैसले लेने किए शुरू
- केएमपी जाम करने के अलावा संसद कूच का किया है एलान
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कृषि कानूनों पर सरकार के रुख को देखते हुए किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। इससे सरकार और किसानों के बीच टकराव के हालात बनने लगे हैं। नाराजगी का मुख्य कारण सरकार से लंबे समय से बातचीत नहीं होना है। इसे देखते हुए किसान नेताओं ने आंदोलन को तेज करने के लिए फिर से कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। इस कड़ी में केएमपी जाम करने के अलावा संसद कूच तक शामिल है।
किसानों के इन फैसलों को देखते हुए सरकार के साथ फिर से टकराव से इनकार नहीं किया जा सकता है। पहले भी गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में घुसने पर ही टकराव हुआ था। गौरतलब है कि कृषि कानून रद्द करने की मांग के लिए किसान चार महीने से ज्यादा समय से कुंडली बॉर्डर पर डटे हुए हैं।
इस बीच किसानों व सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है। वहीं गृहमंत्री अमित शाह भी किसानों से वार्ता कर चुके हैं। इसके बाद भी कोई हल अभी तक नहीं निकला है। किसान संगठनों और सरकार के बीच आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी। इसके बाद से बातचीत का रास्ता बंद है।
अब युवाओं पर नजर
कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए चल रहे आंदोलन को धार देने के लिए किसान नेताओं की अब युवा वर्ग पर नजर है। किसान आंदोलन में इस समय युवाओं की भागीदारी काफी कम है। युवाओं को आंदोलन से जोड़ने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके साथ ही लक्खा सिधाना समेत उन सभी की मदद लेनी शुरू कर दी गई है, जिनके सहारे आंदोलन से युवा जुड़ सकते हैं।
किसान पिछले चार माह से दिल्ली बॉर्डर पर डटे हैं। लगातार मौत होने के बाद भी सरकार किसानों की सुध लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में किसानों को कड़े फैसले लेने पड़ रहे हैं। हम नहीं चाहते कि किसी तरह का तनाव और बवाल हो। हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि संसद कूच भी शांतिपूर्ण तरीके से होगा। अन्य कार्यक्रम भी शांति के साथ किए जाएंगे। इसके लिए युवाओं से खासतौर पर अपील की गई है। - गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष, भाकियू हरियाणा