आस्था: पौष पूर्णिमा के साथ माघ माह का प्रारंभ, मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग है माघ स्नान, दान का मिलेगा विशेष फल
25 जनवरी से माघ स्नान का आरंभ होगा जो 24 फरवरी को संपन्न होगा। माघ माह अपने आरंभ से ही पर्व व उत्सवों के आगमन की झलक देने लगता है। श्रद्धालु गंगा-यमुना सहित अन्य पवित्र नदियों में श्रद्धा की डुबकी लगाते हैं। माघ माह में स्नान व दान का अत्यंत महत्व है।
विस्तार
आस्था और विश्वास के पवित्र माघ माह की वीरवार से शुरुआत हो रही है। माघ माह में गंगा-यमुना सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान व दान का विशेष महत्व है। माघ स्नान को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी कहा गया है। यह माह अपने प्रारंभ से ही पर्व व उत्सवों के आगमन की झलक देने लगता है। यह वही समय होता है जब प्रकृति की छटा और खूबसूरती अपने नवरंग में मौजूद होती है।
राजेंद्र नगर स्थित शिव मंदिर समिति से ज्योतिषाचार्य मनमोहन मिश्रा का कहना है कि इस वर्ष माघ माह का आरंभ 25 जनवरी की रात 11:23 बजे से होगा। पौष पूर्णिमा के साथ ही इस दिवस का आरंभ होता है। माघ स्नान के आरंभ की पौष पूर्णिमा मुख्य तिथि होती है। माह की समाप्ति 24 फरवरी को होगी। पूरे माह में ही स्नान की विशेष महत्ता है।
माह के आखिरी दिन स्नान की समाप्ति होती है। इस दिन धर्म स्थलों पर मेले व धार्मिक कृत्यों का आयोजन किया जाता है। सर्दियों की कड़कड़ाती सुबह में श्रद्धालु गंगा-यमुना सहित अन्य पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाकर माघ स्नान करते हैं। उनकी यही आस्था और विश्वास उनके लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।
माघ माह के पर्व व स्नान-दान का महत्व
माघ माह के मध्य एकादशी, वसंत पंचमी, मौनी अमावस्या, तिल चतुर्थी और गुप्त नवरात्रि अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस आते हैं। इस माह आने वाली षटतिला एकादशी व जया एकादशी के दिन पूजन स्नान एवं दान करने से व्यक्ति को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। महाभारत में एक स्थान पर इसका विस्तारित रूप बताया गया है।
यह है मान्यता
ज्योतिषाचार्य मनमोहन मिश्रा ने कहा कि माघ माह का हर दिन अत्यंत प्रभावी होता है। मान्यता है कि इस माह में समस्त धरा का जल गंगा समान होता है। ऐसे में इस माह में प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान की विशेष महत्ता होती है। पुराणों में भी इसका विस्तार से उल्लेख है। कहा जाता है कि त्रिदेवों के साथ अन्य देवता भी माघ माह के आने पर प्रयाग के संगम स्थल पर आते हैं और निवास करते हैं। कहा जाता है कि माघ मास में तीन बार संगम स्थल पर जाकर स्नान करने से उसका फल व्यक्ति को हजारों अश्वमेध यज्ञ को करने के समान ही प्राप्त होता है।
तिल का दान देता है मोक्ष
माघ माह में तिल का दान अत्यंत फलदायी व पापों का नाश करने वाला होता है। षटतिला एकादशी इसके भेद को दर्शाती है। इस दिन योग्य ब्राह्मणों को तिल का दान किया जाता है। तिल से संबंधित भोजन को गरीबों में बांटना भी उत्तम माना गया है। तिल के दान से व्यक्ति नरक की यातना नहीं भोगता और उसे अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तिल वैज्ञानिक स्वरूप में भी अपनी उपयोगिता को दर्शाता है। सर्दी से बचने में तिल का सेवन उपयोगी होता है।
माघ माह के पर्व
- 25 जनवरी : पौष पूर्णिमा, माघ स्नान प्रारंभ
- 26 जनवरी : दशाश्वमेध घाट स्नान प्रारंभ
- 29 जनवरी : संकट चौथ व्रत
- 02 फरवरी : श्री रामानंदाचार्य जयंती, कालाष्टमी व्रत
- 06 फरवरी : षटतिला एकादशी व्रत
- 07 फरवरी : प्रदोष व्रत
- 08 फरवरी : मेरू त्रयोदशी
- 09 फरवरी : मौनी अमावस्या, स्नान मेला प्रयागराज
- 10 फरवरी : गुप्त नवरात्र विधान
- 13 फरवरी : वरद चतुर्थी, कुंभ संक्रांति
- 14 फरवरी : वसंत पंचमी
- 16 फरवरी : अचला सप्तमी
- 17 फरवरी : रोहिणी पर्व
- 20 फरवरी : जया एकादशी व्रत
- 21 फरवरी : भीष्म एकादशी
- 23 फरवरी : जितेंद्र रथ यात्रा जैन
- 24 फरवरी : माघी पूर्णिमा व संत रविदास जयंती
माघी पूर्णिमा को अनुष्ठानों का होता है समापन
माघ पूर्णिमा के दिन माघ स्नान की समाप्ति होती है। इस तिथि के साथ संपूर्ण माघ माह में किए गए कार्यों और पूजा-पाठ, अनुष्ठानों का उत्साह के साथ समापन होता है। फाल्गुन माह की तैयारियों का आरंभ होता है।