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आंदोलन में हर गांव की होने लगी भागीदारी, पंजाब के 7100 तो हरियाणा के 5150 गांवों से पहुंचे किसान
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कुंडली बॉर्डर पर धरनास्थल पर टेंट लगाकर बैठे सरोहा खाप के लोग
- फोटो : Sonipat
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अंकित चौहान
सोनीपत। ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में बवाल के बाद टूटने लगा किसान आंदोलन दोबारा से खड़ा हुआ तो इस बार इसमें हर गांव की भागीदारी होने लगी है। पंजाब से करीब 7100 तो हरियाणा के 5150 गांवों से किसान धरनास्थल पर पहुंचे हैं। वहीं हरियाणा की करीब 70 खाप पंचायतें किसान आंदोलन के समर्थन में उतरीं तो उसके बाद सबसे ज्यादा किसान गांवों से धरनास्थलों पर पहुंचे हैं। हरियाणा व पंजाब के किसान सबसे ज्यादा कुंडली बॉर्डर पर पहुंचे हैं तो टीकरी व गाजीपुर बॉर्डर भी यहां के किसान गए हैं। जबकि यूपी के करीब 153 गांवों का ब्योरा अभी तक संयुक्त किसान मोर्चा जुटा सका है। क्योंकि वहां के गांवों से ज्यादा किसान गाजीपुर बॉर्डर पर डटे हुए हैं। वहीं किसान नेताओं व खाप प्रतिनिधियों का दावा है कि प्रदेश के हर गांव से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लोग आंदोलन से जुड़े हैं।
कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों ने भले ही पिछले 70 दिनों से नेशनल हाईवे के कुंडली बॉर्डर पर डेरा डाला हुआ है। लेकिन जिस तरह से अब अधिकतर गांवों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंच रहे हैं, उससे किसान नेताओं का हर गांव से किसानों को बुलाने का अभियान सफल होता दिख रहा है। इस अभियान को ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में बवाल के बाद सफलता मिली है। क्योंकि जिस तरह का ब्योरा किसान संगठनों ने जुटाया है, उसके अनुसार पंजाब के करीब 7100 गांवों से किसान अभी तक दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचे हैं। जबकि हरियाणा के करीब 5150 गांवों के किसान दिल्ली की सीमाओं पर अभी तक पहुंच चुके हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि दिल्ली में बवाल से पहले तक कुछ खाप ही खुलकर किसान आंदोलन के समर्थन में उतरी थीं। लेकिन उस बवाल के बाद हरियाणा की करीब 58 खाप खुलकर आंदोलन के समर्थन खड़ी हो गई हैं और वह खुद गांवों में जाकर किसानों को जागरूक करके दिल्ली की सीमाओं पर लेकर पहुंच रही हैं। हरियाणा में खाप पंचायतों के खुलकर आगे आने पर आंदोलन पूरी तरह से बदल गया है और यह आंदोलन हर गांव तक पहुंच गया है।
किसान नेताओं व खाप प्रतिनिधियों का दावा, हरियाणा-पंजाब का हर गांव आंदोलन से जुड़ा
किसान नेता व खाप प्रतिनिधि दावा करते हैं कि दिल्ली की सीमाओं पर भले ही हरियाणा-पंजाब के सभी गांवों से किसान अभी तक नहीं पहुंच सके हो। लेकिन इस आंदोलन से दोनों प्रदेशों के सभी गांवों के किसान व आम लोग जुड़ गए हैं। आंदोलन से कोई प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है तो कोई अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। धरनास्थल पर पहुंचने वाले सीधे तौर पर आंदोलन से जुड़ गए हैं, जबकि गांवों में रहकर भी काफी लोग आंदोलन करने वाले किसानों की मदद कर रहे हैं। वे उनके लिए खाद्य सामग्री भेज रहे हैं।
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उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश व दिल्ली आदि राज्यों के गांवों तक से पहुंचे किसान
किसान आंदोलन में दिल्ली की सीमाओं पर पंजाब, हरियाणा, यूपी से अलग राज्यों से भी किसान पहुंच रहे हैं। हालांकि उन राज्यों के कितने गांवों तक आंदोलन की गूंज है, इसका अभी तक ब्योरा मोर्चा ने नहीं जुटाया है। लेकिन यह जरूर है कि उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों के गांवों से काफी किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचे हैं।
वर्जन :::::
किसान आंदोलन अब हरियाणा के एक-एक गांव तक पहुंच चुका है और उन गांवों से लगातार किसान धरनास्थलों पर पहुंच रहे हैं। यह जरूर है कि कुछ गांवों के किसान व आम लोग अप्रत्यक्ष रूप से आंदोलन से जुड़े हैं। आंदोलन लगातार मजबूत होता जा रहा है और हर कोई आंदोलन में भागीदारी कर रहा है।
-अभिमन्यु कोहाड़, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा।
वर्जन ::::
पंजाब के हर गांव में कृषि कानूनों का विरोध हो रहा है और वहां से जितने किसान यहां आ सकते हैं, वह आंदोलन में हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं। पहले से ज्यादा किसान अब आंदोलन में शामिल होने आ रहे हैं। सरकार को कृषि कानून रद्द करने होंगे, तभी किसान वापस जाएंगे।
-हरेंद्र सिंह लखोवाल, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा।
वर्जन ::::
जब सरकार ने आंदोलन को दबाने का प्रयास किया तो हरियाणा की ज्यादातर खाप खुलकर आंदोलन में समर्थन के लिए खड़ी हो गई हैं। खाप हर गांव में जाकर किसानों को जागरूक कर रही हैं, जिससे आंदोलन में ज्यादा से ज्यादा किसान शामिल हो सकें।
-अशोक सरोहा, प्रवक्ता सरोहा खाप।
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सोनीपत। ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में बवाल के बाद टूटने लगा किसान आंदोलन दोबारा से खड़ा हुआ तो इस बार इसमें हर गांव की भागीदारी होने लगी है। पंजाब से करीब 7100 तो हरियाणा के 5150 गांवों से किसान धरनास्थल पर पहुंचे हैं। वहीं हरियाणा की करीब 70 खाप पंचायतें किसान आंदोलन के समर्थन में उतरीं तो उसके बाद सबसे ज्यादा किसान गांवों से धरनास्थलों पर पहुंचे हैं। हरियाणा व पंजाब के किसान सबसे ज्यादा कुंडली बॉर्डर पर पहुंचे हैं तो टीकरी व गाजीपुर बॉर्डर भी यहां के किसान गए हैं। जबकि यूपी के करीब 153 गांवों का ब्योरा अभी तक संयुक्त किसान मोर्चा जुटा सका है। क्योंकि वहां के गांवों से ज्यादा किसान गाजीपुर बॉर्डर पर डटे हुए हैं। वहीं किसान नेताओं व खाप प्रतिनिधियों का दावा है कि प्रदेश के हर गांव से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लोग आंदोलन से जुड़े हैं।
कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों ने भले ही पिछले 70 दिनों से नेशनल हाईवे के कुंडली बॉर्डर पर डेरा डाला हुआ है। लेकिन जिस तरह से अब अधिकतर गांवों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंच रहे हैं, उससे किसान नेताओं का हर गांव से किसानों को बुलाने का अभियान सफल होता दिख रहा है। इस अभियान को ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में बवाल के बाद सफलता मिली है। क्योंकि जिस तरह का ब्योरा किसान संगठनों ने जुटाया है, उसके अनुसार पंजाब के करीब 7100 गांवों से किसान अभी तक दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचे हैं। जबकि हरियाणा के करीब 5150 गांवों के किसान दिल्ली की सीमाओं पर अभी तक पहुंच चुके हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि दिल्ली में बवाल से पहले तक कुछ खाप ही खुलकर किसान आंदोलन के समर्थन में उतरी थीं। लेकिन उस बवाल के बाद हरियाणा की करीब 58 खाप खुलकर आंदोलन के समर्थन खड़ी हो गई हैं और वह खुद गांवों में जाकर किसानों को जागरूक करके दिल्ली की सीमाओं पर लेकर पहुंच रही हैं। हरियाणा में खाप पंचायतों के खुलकर आगे आने पर आंदोलन पूरी तरह से बदल गया है और यह आंदोलन हर गांव तक पहुंच गया है।
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किसान नेताओं व खाप प्रतिनिधियों का दावा, हरियाणा-पंजाब का हर गांव आंदोलन से जुड़ा
किसान नेता व खाप प्रतिनिधि दावा करते हैं कि दिल्ली की सीमाओं पर भले ही हरियाणा-पंजाब के सभी गांवों से किसान अभी तक नहीं पहुंच सके हो। लेकिन इस आंदोलन से दोनों प्रदेशों के सभी गांवों के किसान व आम लोग जुड़ गए हैं। आंदोलन से कोई प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है तो कोई अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। धरनास्थल पर पहुंचने वाले सीधे तौर पर आंदोलन से जुड़ गए हैं, जबकि गांवों में रहकर भी काफी लोग आंदोलन करने वाले किसानों की मदद कर रहे हैं। वे उनके लिए खाद्य सामग्री भेज रहे हैं।
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उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश व दिल्ली आदि राज्यों के गांवों तक से पहुंचे किसान
किसान आंदोलन में दिल्ली की सीमाओं पर पंजाब, हरियाणा, यूपी से अलग राज्यों से भी किसान पहुंच रहे हैं। हालांकि उन राज्यों के कितने गांवों तक आंदोलन की गूंज है, इसका अभी तक ब्योरा मोर्चा ने नहीं जुटाया है। लेकिन यह जरूर है कि उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों के गांवों से काफी किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचे हैं।
वर्जन :::::
किसान आंदोलन अब हरियाणा के एक-एक गांव तक पहुंच चुका है और उन गांवों से लगातार किसान धरनास्थलों पर पहुंच रहे हैं। यह जरूर है कि कुछ गांवों के किसान व आम लोग अप्रत्यक्ष रूप से आंदोलन से जुड़े हैं। आंदोलन लगातार मजबूत होता जा रहा है और हर कोई आंदोलन में भागीदारी कर रहा है।
-अभिमन्यु कोहाड़, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा।
वर्जन ::::
पंजाब के हर गांव में कृषि कानूनों का विरोध हो रहा है और वहां से जितने किसान यहां आ सकते हैं, वह आंदोलन में हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं। पहले से ज्यादा किसान अब आंदोलन में शामिल होने आ रहे हैं। सरकार को कृषि कानून रद्द करने होंगे, तभी किसान वापस जाएंगे।
-हरेंद्र सिंह लखोवाल, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा।
वर्जन ::::
जब सरकार ने आंदोलन को दबाने का प्रयास किया तो हरियाणा की ज्यादातर खाप खुलकर आंदोलन में समर्थन के लिए खड़ी हो गई हैं। खाप हर गांव में जाकर किसानों को जागरूक कर रही हैं, जिससे आंदोलन में ज्यादा से ज्यादा किसान शामिल हो सकें।
-अशोक सरोहा, प्रवक्ता सरोहा खाप।