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सरकार का रुख देखकर बढ़ी किसानों की नाराजगी, अब टकराव के बन रहे आसार

Mon, 11 Jan 2021 12:17 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jan 2021 12:17 AM IST
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अंकित चौहान
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सोनीपत। कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों व सरकार के बीच लगातार बातचीत के बाद जहां केवल आंदोलन तेज करने की रणनीति बनाई जा रही थी। वहीं अब कृषि कानूनों को रद्द करने से साफ इनकार करने पर सरकार के रुख को देखते हुए किसानों की नाराजगी काफी बढ़ गई है और उससे टकराव तक के आसार होते जा रहे है। जहां किसान लगातार नेताओं का विरोध करने को लेकर पुलिस के आमने-सामने आ रहे हैं। वहीं किसानों ने यहां तक साफ कर दिया है कि गणतंत्र दिवस की परेड के लिए वह बैरिकेड तोड़ते हुए आगे बढ़ेंगे। उनको जिस तरह से दिल्ली से रोकने के लिए सभी हथकंडे अपनाए गए थे और वह उन सभी को पार करते हुए दिल्ली तक पहुंच गए हैं। ऐसे ही गणतंत्र दिवस की परेड के लिए दिल्ली के अंदर घुसेंगे। किसानों के इस एलान से सरकार के लिए परेशानी बढ़ती जा रही है।
कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर किसान डेढ़ महीने से ज्यादा समय से कुंडली बॉर्डर पर डटे हुए हैं। इतने दिन बीतने के बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा है। सरकार से बातचीत के बाद किसानों की नाराजगी इतनी कभी नहीं बढ़ी, जितनी नाराजगी इस बार की बातचीत के बाद बढ़ी है। किसानों को जिस तरह से सरकार ने साफ कहा है कि कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जा सकता है, उससे किसान अब अपनी ताकत सरकार को दिखाना चाहते हैं। जिसके लिए सरकार के हर अभियान व कार्यक्रम को किसान रोकना चाहते है और इससे टकराव के हालात पैदा हो रहे हैं। इसके साथ ही जिस तरह से नेताओं ने गणतंत्र दिवस की परेड के लिए हर गतिरोध को तोड़कर दिल्ली में घुसने का एलान किया है। उसको देखते हुए भी किसान अब किसी भी हालत में दिल्ली की परेड में शामिल होने की तैयारी कर रहे है। जिस तरह दिल्ली कूच के लिए निकले किसानों को रोकने का प्रयास करते हुए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पानी की बौछार मारी गई।
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सिंघु बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी, पैरा मिलिट्री फोर्स 24 घंटे तैनात
किसानों के गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के एलान के बाद से सिंघु बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। सबसे ज्यादा किसान इस बॉर्डर से दिल्ली जाने का प्रयास करेंगे। इसके लिए ही वहां ज्यादा पत्थर लगाए गए हैं तो पैरा मिलिट्री फोर्स भी कुछ आगे आ गई है। वहां पैरा मिलिट्री फोर्स 24 घंटे के लिए तैनात कर दी गई है। जिससे कोई भी वहां से अंदर जाने का प्रयास नहीं कर सके।
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सरकार 26 जनवरी तक मान जाए और ऐसा नहीं होता है तो हमें मनवाना आता है। हम बैरिकेड तोड़कर अंदर घुसेंगे। पुलिस गोली ही मार सकती है, लेकिन किसान पीछे नहीं हटेगा। हम गणतंत्र दिवस की परेड को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, बल्कि हम 26 जनवरी को सभी बैरिकेड तोड़कर दिल्ली में जाएंगे और परेड में शामिल होंगे। उसके बाद ऐसा हो सकता है कि किसान ही संसद में बैठे। हमारे लिए नामुमकिन कुछ नहीं है, क्योंकि दिल्ली आने से रोकने के लिए भी खूब प्रयास किए गए। उसके बावजूद हम लोग यहां तक पहुंचे और अब आगे भी बढ़ेंगे।

गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष, भाकियू, हरियाणा
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देश के सभी किसानों को न्योता देने का अभियान शुरू हो गया है, यह ऐतिहासिक परेड होगी। पहली बार परेड में किसान होगा और ट्रैक्टर चलेंगे। पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान, उत्तराखंड समेत अन्य जिन जगहों से किसान आएंगे। सरकार चाहे कितनी भी फोर्स लगाए, लेकिन किसान रुकने वाला नहीं है। सभी बैरिकेड को तोड़कर जाएंगे और डंडा, गोली या अन्य कोई प्रयास भी किसानों को नहीं रोक सकता है।
शमशेर दहिया, महासचिव, भाकियू अंबावता
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