फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   exclusive

महिला किसान खूब कर रहीं आंदोलन में सहयोग, 470 किमी. दूर से घर भी संभाल रहीं

Thu, 10 Dec 2020 12:08 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 10 Dec 2020 12:08 AM IST
विज्ञापन
exclusive
घर में मोबाइल पर बात करती गुरमीत कौर - फोटो : Sonipat
अंकित चौहान
विज्ञापन

सोनीपत। सिंघू बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में पहुंचीं हैं। आंदोलन की शुरुआत में जहां महिला किसान कम दिखाई देती थीं, वहीं अब पंजाब से लगातार महिला किसान आ रही हैं और वह आंदोलन आंदोलन में पूरा सहयोग करते हुए मोर्चा संभाले हुए है। खाना बनाने से लेकर अन्य घरेलू जरूरी कार्यों की जिम्मेदारी को खुद संभाल लिया है। वह केवल आंदोलन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि 470 किमी दूर अपना घर भी यहां बैठकर संभाल रही हैं। वीडियो कॉल व मोबाइल से बात करके बच्चों व परिवार की अन्य महिलाओं को पूरी जानकारी देती है, जिससे घर में रहकर वह आसानी से सभी काम कर सके।
कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं। किसानों के इन जत्थों में जहां शुरुआत में महिला किसान काफी कम दिखाई देती थी, वहीं अब महिला किसान बढ़ती जा रही है। आंदोलन लंबा चलता देख महिला किसान भी अपने परिवार के पुरुषों का साथ देने के लिए सिंघु बॉर्डर पर पहुंच गई है। क्योंकि किसानों को खाना भी खुद ही बनाना पड़ता है तो कपड़े धोना व अन्य ऐसे ही कार्य खुद ही करने पड़ते थे। अब महिला किसानों ने पहुंचकर खाने से लेकर अन्य जरूरी कार्यों की जिम्मेदारी को संभाल लिया है। वह केवल ऐसे कार्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि धरनास्थल पर जाकर किसानों का मनोबल बढ़ाने से लेकर सरकार के खिलाफ जुलूस तक भी महिलाएं निकाल रही हैं। महिला किसान कहती हैं कि सरकार ने जिस तरह के कृषि कानून बनाए है, उससे खेती व किसान दोनों खत्म हो जाएंगे। इसलिए अपनी खेती को बचाने के लिए किसान को लड़ाई लड़नी पड़ रही है और वह उस लड़ाई में आखिर तक पुरुषों के साथ खड़ी हुई है। वह किसी भी तरह से पीछे हटने वाली नहीं है। वह कहती है कि कृषि कानूनों को रद्द कराकर ही अब वह वापस घर जाएंगी।
विज्ञापन

बयान
अपने परिवार के लोगों के साथ यहां आई हुई हूं। क्योंकि जब परिवार के पुरुष खेती बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं तो महिलाएं भी पीछे क्यों रहे। महिलाएं बढ़कर आंदोलन में हिस्सा ले रही हैं और खाना बनाने के साथ ही धरना देने व जुलूस निकालने में आगे रहती हैं। यहां से बैठकर ही घर में बच्चों व अन्य महिलाओं को वीडियो कॉल या मोबाइल पर बात करके समझा देती हूं कि किस तरह से क्या करना है। घर का काम व खेती दोनों के बारे में बता देते है तो अन्य महिलाएं आराम से कर लेती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- राजिंदर, कलानौर गुरदासपुर पंजाब
मैं एक सप्ताह पहले धरने पर आई थी, मेरे दो बेटे हैं और उनकी उम्र 14 व 16 साल है। वह खुद ही खाना बनाते हैं और पशुओं का चारा व अन्य काम भी संभाल रहे हैं। खेत में पड़ोसी के साथ जाकर देखभाल कर लेते हैं। मैं फोन पर उनको काम समझा देती हूं, जिससे उनको कोई दिक्कत नहीं आती है। बच्चों को बता दिया है कि जब तक हम अपने हक की लड़ाई नहीं जीत जाते हैं, तब तक वापस नहीं आएंगे। जिस तरह से चल रहा है, उससे लगता है कि आंदोलन अभी लंबा होने वाला है।

गुरमीत कौर, अमृतसर पंजाब
मैं पिछले कई दिन से यहां आई हुई हूं और अपनी खेती बचाने के लिए इस आंदोलन में हम महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। पहले कम महिलाएं थीं, क्योंकि तब आंदोलन दो दिन के लिए होना था और ऐसा लग रहा था कि सरकार मांग मान लेगी। लेकिन जिस तरह से सरकार का रवैया है, उससे लग रहा है कि सरकार जल्द ही मांग को मानने वाली नहीं है। इन कृषि कानूनों से किसान को बड़ा नुकसान होगा और महिलाओं पर ज्यादा असर पड़ेगा। क्योंकि पंजाब में महिलाएं भी घर की पूरी जिम्मेदारी उठाती हैं। अब हम यहां बैठे है और घर में बच्चों को फोन पर बता रहे है कि उनको क्या-क्या करना है। यहां आंदोलन में हिस्सा रहे हैं तो फोन से घर भी संभाल रहे हैं।
- नीलम, कुमान गुरदासपुर पंजाब
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed