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कोरोना काल में लाखों लोगों की भूख मिटा रही गोविंद रसोई
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सेक्टर 14-15 डिवाइडर रोड पर खाना बांटते समाजसेवी
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। कोरोना काल में जहां अधिकतर लोग खुद को संक्रमण से बचाने में लगे हैं, वहीं गोविंद रसोई को अस्पताल से बाहर निकालकर लाखों लोगों की भूख मिटाई जा रही है। समाजसेवियों, सरकारी अधिकारियों, गृहणी, शिक्षाविद् समेत अन्य मिलकर मुफ्त खाना खिलाने के लिए गोविंद रसोई का संचालन कर रहे हैं और कोरोना काल शुरू होने के बाद से अभी तक लगभग पांच लाख जरूरतमंद व प्रवासियों को खाना खिलाया जा चुका है।
लॉकडाउन में खाना बांटने के लिए गाड़ी तक लगाकर नंबर जारी कर दिए गए, जिससे किसी जगह से फोन आता तो वहां खाना पहुंचा दिया जाता। गोविंद रसोई से केवल खाना ही नहीं, बल्कि अपने घर के लिए सड़क पर पैदल जाने वालों को चप्पल बांटी गई तो चना, सत्तू व काढ़ा भी बांटा गया। कोरोना काल में इस तरह गोविंद रसोई हर गरीबों के पेट भरने का सहारा बनी हुई है।
शहर के रहने वाले समाजसेवी संजय सिंगला, प्रवीण वर्मा, दिनेश कुच्छल, मनीष बंसल, रामकुमार जिंदल, सतीश माथुर, बीएसएनएल के एजीएम वाईके त्यागी, गृहणी शालू त्यागी, शिक्षाविद् परिमल कुमार ने मिलकर नागरिक अस्पताल में तीन साल पहले गोविंद रसोई शुरू की। जिससे वहां भर्ती मरीजों को सुबह के नाश्ते के अलावा दोपहर व शाम का खाना मुफ्त खिलाया जा सके और वहां शुरुआत में मरीजों व उनके साथ आने वाले 150-200 लोगों को खाना खिलाया जाता था। जिसके लगभग पांच महीने बाद इस तरह ही गन्नौर सीएचसी में गोविंद रसोई शुरू की गई और वहां भी मुफ्त खाना खिलाया जाने लगा। यह व्यवस्था ऐसे ही चलती रही, लेकिन कोरोना के कारण लॉकडाउन लगा तो गोविंद रसोई चलाने वालों ने देखा कि मजदूरों, गरीबों और प्रवासियों के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया है। जिससे अग्रसेन भवन के अंदर भी गोविंद रसोई को शुरू कर दिया गया और वहां एक दिन में दस हजार तक लोगों का खाना बनवाकर बांटना शुरू किया। जहां पहले खाना बनाने में कर्मी लगे रहते थे, वहीं कोरोना काल शुरू होते ही यह सभी लोग भी खाना बनवाने से लेकर पैकिंग कराने में दिनभर जुटे रहते। गोविंद रसोई के संचालकों में शामिल वाईके त्यागी का दावा है कि लॉकडाउन के दौरान ही लगभग 5 लाख लोगों को खाना खिलाया गया तो उसके बाद भी केवल अस्पताल की जगह बाहर के जरूरतमंद लोगों के लिए भी गोविंद रसोई का संचालन कराया जा रहा है। इसके लिए सेक्टर 14-15 की डिवाइडर रोड पर काउंटर बनाया गया है, जहां दिनभर खाना मिलता है और वहां कोई भी पहुंचकर मुफ्त में खाना खा सकता है। इस समय भी रोजाना लगभग एक हजार लोग गोविंद रसोई से खाना खाते है, जिनमें मरीज भी शामिल है।
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प्रवासियों को सत्तू, चने व चप्पल भी बांटी
लॉकडाउन जब बढ़ाया गया तो प्रवासी मजदूरों ने अपने घरों के लिए पलायन कर लिया और नेशनल हाईवे से होते ही यूपी व बिहार समेत अन्य प्रदेशों के लोगों की लाइन लगी रहती थी। उनके पास खाने का कोई साधन नहीं था तो किसी के पैर में चप्पल भी नहीं होती थी। यह देखकर ही गोविंद रसोई संचालकों ने नेशनल हाईवे पर प्रवासियों के लिए सत्तू व चने की व्यवस्था करके बांटने शुरू कर दिए। इसके अलावा कोई नंगे पैर मिलता था तो उनको चप्पल भी पहनाई जाती थी। समाजसेवी संजय सिंगला कहते है कि कोरोना काल में इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी कि कोई भूखा नहीं रहे। यह ध्यान में रखकर ही सेवा शुरू की गई और ऐसा करके काफी खुशी भी मिली।
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लॉकडाउन में खाना बांटने के लिए गाड़ी तक लगाकर नंबर जारी कर दिए गए, जिससे किसी जगह से फोन आता तो वहां खाना पहुंचा दिया जाता। गोविंद रसोई से केवल खाना ही नहीं, बल्कि अपने घर के लिए सड़क पर पैदल जाने वालों को चप्पल बांटी गई तो चना, सत्तू व काढ़ा भी बांटा गया। कोरोना काल में इस तरह गोविंद रसोई हर गरीबों के पेट भरने का सहारा बनी हुई है।
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शहर के रहने वाले समाजसेवी संजय सिंगला, प्रवीण वर्मा, दिनेश कुच्छल, मनीष बंसल, रामकुमार जिंदल, सतीश माथुर, बीएसएनएल के एजीएम वाईके त्यागी, गृहणी शालू त्यागी, शिक्षाविद् परिमल कुमार ने मिलकर नागरिक अस्पताल में तीन साल पहले गोविंद रसोई शुरू की। जिससे वहां भर्ती मरीजों को सुबह के नाश्ते के अलावा दोपहर व शाम का खाना मुफ्त खिलाया जा सके और वहां शुरुआत में मरीजों व उनके साथ आने वाले 150-200 लोगों को खाना खिलाया जाता था। जिसके लगभग पांच महीने बाद इस तरह ही गन्नौर सीएचसी में गोविंद रसोई शुरू की गई और वहां भी मुफ्त खाना खिलाया जाने लगा। यह व्यवस्था ऐसे ही चलती रही, लेकिन कोरोना के कारण लॉकडाउन लगा तो गोविंद रसोई चलाने वालों ने देखा कि मजदूरों, गरीबों और प्रवासियों के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया है। जिससे अग्रसेन भवन के अंदर भी गोविंद रसोई को शुरू कर दिया गया और वहां एक दिन में दस हजार तक लोगों का खाना बनवाकर बांटना शुरू किया। जहां पहले खाना बनाने में कर्मी लगे रहते थे, वहीं कोरोना काल शुरू होते ही यह सभी लोग भी खाना बनवाने से लेकर पैकिंग कराने में दिनभर जुटे रहते। गोविंद रसोई के संचालकों में शामिल वाईके त्यागी का दावा है कि लॉकडाउन के दौरान ही लगभग 5 लाख लोगों को खाना खिलाया गया तो उसके बाद भी केवल अस्पताल की जगह बाहर के जरूरतमंद लोगों के लिए भी गोविंद रसोई का संचालन कराया जा रहा है। इसके लिए सेक्टर 14-15 की डिवाइडर रोड पर काउंटर बनाया गया है, जहां दिनभर खाना मिलता है और वहां कोई भी पहुंचकर मुफ्त में खाना खा सकता है। इस समय भी रोजाना लगभग एक हजार लोग गोविंद रसोई से खाना खाते है, जिनमें मरीज भी शामिल है।
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प्रवासियों को सत्तू, चने व चप्पल भी बांटी
लॉकडाउन जब बढ़ाया गया तो प्रवासी मजदूरों ने अपने घरों के लिए पलायन कर लिया और नेशनल हाईवे से होते ही यूपी व बिहार समेत अन्य प्रदेशों के लोगों की लाइन लगी रहती थी। उनके पास खाने का कोई साधन नहीं था तो किसी के पैर में चप्पल भी नहीं होती थी। यह देखकर ही गोविंद रसोई संचालकों ने नेशनल हाईवे पर प्रवासियों के लिए सत्तू व चने की व्यवस्था करके बांटने शुरू कर दिए। इसके अलावा कोई नंगे पैर मिलता था तो उनको चप्पल भी पहनाई जाती थी। समाजसेवी संजय सिंगला कहते है कि कोरोना काल में इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी कि कोई भूखा नहीं रहे। यह ध्यान में रखकर ही सेवा शुरू की गई और ऐसा करके काफी खुशी भी मिली।