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Earthquake: हरियाणा के सोनीपत में भूकंप के झटके, गहरी नींद में थे लोग, तभी डोली धरती
Sat, 27 Sep 2025 07:45 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, सोनीपत
अमर उजाला नेटवर्क, सोनीपत
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 27 Sep 2025 07:45 AM IST
सार
हरियाणा के सोनीपत में शुक्रवार देर रात करीब एक बजकर 47 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस हुए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.4 मापी गई। जैसे ही झटके महसूस हुए कुछ लोग नींद से अचानक जाग गए और घरों से बाहर निकल आए।
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भूकंप
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
हरियाणा के सोनीपत जिले में शुक्रवार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। जिस समय भूकंप आया, उस वक्त अधिकतर लोग गहरी नींद में सो रहे थे। इसी दौरान धरती हिलने लगी। झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकल गए। हालांकि हल्के झटके होने से किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार देर रात करीब एक बजकर 47 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस हुए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.4 मापी गई। भूकंप का केंद्र हरियाणा का सोनीपत रहा।
जैसे ही झटके महसूस हुए कुछ लोग नींद से अचानक जाग गए और घरों से बाहर निकल आए। देर रात का समय होने की वजह से शुरुआत में लोगों को समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है?
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भूकंप के हल्के झटके थे। ऐसे में ग्रामीण और शहरी इलाकों में कंपन महसूस हुआ। राहत की बात यह है कि किसी भी प्रकार की जनहानि की कोई सूचना सामने नहीं आई है।
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जानकारी के अनुसार, शुक्रवार देर रात करीब एक बजकर 47 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस हुए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.4 मापी गई। भूकंप का केंद्र हरियाणा का सोनीपत रहा।
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जैसे ही झटके महसूस हुए कुछ लोग नींद से अचानक जाग गए और घरों से बाहर निकल आए। देर रात का समय होने की वजह से शुरुआत में लोगों को समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है?
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भूकंप के हल्के झटके थे। ऐसे में ग्रामीण और शहरी इलाकों में कंपन महसूस हुआ। राहत की बात यह है कि किसी भी प्रकार की जनहानि की कोई सूचना सामने नहीं आई है।
क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।