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पेयजल किल्लत: जिला मुख्यालय पर महिलाओं ने फोड़े मटके, जताया विरोध
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गांव झरोठी में पेयजल संकट विकट हो चुका है। अधिकारियों को शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। पेयजल संकट से त्रस्त ग्रामीणों ने लघु सचिवालय में प्रदर्शन किया। महिलाओं ने जिला मुख्यालय के गेट के सामने मटके फोड़कर विरोध जताया। इसके बाद ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम डीसी को ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों का कहना था कि मुख्यमंत्री ने गांव झरोठी में पेयजल लाइन दबाकर पानी की सप्लाई शुरू करने का आश्वासन दिया था। अधिकारियों ने ट्यूबवेल लगवा दिया और गलियों में पेयजल लाइन दब चुकी है। उसके बावजूद पानी के कनेक्शन न होने के कारण घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है जिससे महिलाओं को पीने का पानी लाने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जहां प्रदेश सरकार नीतियां बनाकर हर घर तक स्वच्छ पेयजल की योजना पर काम कर रही है। वहीं अधिकारी सरकार की नीतियों को खोखला कर रहे हैं। प्रशासन की मनमानी के चलते ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ नहीं पा रहा है।
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ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से घरों में पेयजल लाइन जोड़ने का कार्य लंबित पड़ा है। ग्रामीणों ने कई माह पहले गांव में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पेयजल की समस्या से अवगत कराते हुए लिखित रूप में शिकायत दी थी। मुख्यमंत्री ने पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर डीसी व संबंधित अधिकारियों को ट्यूबवेल लगाकर पानी की आपूर्ति के निर्देश दिए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में आज तक पेयजल लाइन के कनेक्शन नहीं किए हैं। महिलाओं को काम के समय में मटका उठाकर गांव से दो किलोमीटर दूर जाकर नलकूप से पानी लाना पड़ता है। जहां एक नलकूप होने के कारण पहले से ही लंबी लाइन लगी रहती है। अधिकतर लोगों को पैसे खर्च करके पानी खरीदना पड़ रहा है।
गांव में लगे नलकूप से खारा आ रहा पानी
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जो नलकूप लगाए गए हैं। उनका पानी पीने लायक नहीं है। गांव में लगे नलकूपों से खारा पानी आ रहा है। इसका इस्तेमाल करने से ग्रामीण बीमार पड़ रहे हैं। शरीर को नुकसान हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द गांव में ट्यूबवेल का पाइप लाइन से कनेक्शन करके पेयजल आपूर्ति की जाए। जिससे ग्रामीणों को परेशानी न झेलनी पड़े।
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ग्रामीणों का कहना था कि मुख्यमंत्री ने गांव झरोठी में पेयजल लाइन दबाकर पानी की सप्लाई शुरू करने का आश्वासन दिया था। अधिकारियों ने ट्यूबवेल लगवा दिया और गलियों में पेयजल लाइन दब चुकी है। उसके बावजूद पानी के कनेक्शन न होने के कारण घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है जिससे महिलाओं को पीने का पानी लाने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि जहां प्रदेश सरकार नीतियां बनाकर हर घर तक स्वच्छ पेयजल की योजना पर काम कर रही है। वहीं अधिकारी सरकार की नीतियों को खोखला कर रहे हैं। प्रशासन की मनमानी के चलते ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ नहीं पा रहा है।
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ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से घरों में पेयजल लाइन जोड़ने का कार्य लंबित पड़ा है। ग्रामीणों ने कई माह पहले गांव में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पेयजल की समस्या से अवगत कराते हुए लिखित रूप में शिकायत दी थी। मुख्यमंत्री ने पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर डीसी व संबंधित अधिकारियों को ट्यूबवेल लगाकर पानी की आपूर्ति के निर्देश दिए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में आज तक पेयजल लाइन के कनेक्शन नहीं किए हैं। महिलाओं को काम के समय में मटका उठाकर गांव से दो किलोमीटर दूर जाकर नलकूप से पानी लाना पड़ता है। जहां एक नलकूप होने के कारण पहले से ही लंबी लाइन लगी रहती है। अधिकतर लोगों को पैसे खर्च करके पानी खरीदना पड़ रहा है।
गांव में लगे नलकूप से खारा आ रहा पानी
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जो नलकूप लगाए गए हैं। उनका पानी पीने लायक नहीं है। गांव में लगे नलकूपों से खारा पानी आ रहा है। इसका इस्तेमाल करने से ग्रामीण बीमार पड़ रहे हैं। शरीर को नुकसान हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द गांव में ट्यूबवेल का पाइप लाइन से कनेक्शन करके पेयजल आपूर्ति की जाए। जिससे ग्रामीणों को परेशानी न झेलनी पड़े।