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ओपीडी बंद कर हड़ताल पर गए चिकित्सक, इलाज न मिलने पर भटकते रहे मरीज
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जिला अस्पताल में चिकित्सकों की हड़ताल के चलते इलाज के लिए इंतजार में बैठे मरीज। संवाद
- फोटो : Sonipat
स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञ कैडर, पीजी पॉलिसी की मांग व एसएमओ की सीधी भर्ती के विरोध में मंगलवार को चिकित्सकों ने ओपीडी बंद रखी। सीएचसी खरखौदा व गन्नौर समेत जिलेभर में 29 चिकित्सक हड़ताल पर रहे। चिकित्सकों ने जिला नागरिक अस्पताल में मंगलवार को आपातकालीन वार्ड के बाहर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ रोष जताया।
अस्पताल में दिनभर ओपीडी बंद रहने से मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। अस्पताल में कोई दर्द से कराहता दिखा तो कोई बुखार से पीड़ित ओपीडी शुरू होने का इंतजार करता दिखा। अस्पताल में रोजाना की तरह मरीज सुबह नौ बजे से पहले पहुंचना शुरू हो गए थे। सिर्फ बच्चों व गर्भवती महिलाओं व दोपहर को ईएनटी की सेवा शुरू होने से 685 मरीजों को इलाज मुहैया हो सका।
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिला प्रवक्ता डॉ. प्यारेलाल ने बताया कि सरकार स्वास्थ्य विभाग में सीधे एसएमओ के पद पर चिकित्सकों की भर्ती करने की तैयारी में है। यह योजना शुरू होने के बाद पहले से नियुक्त मेडिकल अधिकारियों की अनदेखी होगी। इस भर्ती प्रक्रिया का चिकित्सकों ने वर्ष 2015 में विरोध किया था। 10 दिसंबर, 2021 को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के साथ चिकित्सकों की बैठक भी हुई थी। सरकार के आश्वासन के एक माह बाद तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे चिकित्सकों में रोष है। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने 14 जनवरी से सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी है। अगर स्वास्थ्य सेवाएं बंद की गईं तो उपचार कराने के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी और बढ़ेगी। इस दौरान जिला प्रधान राहुल आंतिल, डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. विशाल सैनी, डॉ. विकास चहल, डॉ. प्रिया, डॉ. पूनम दहिया समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
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इंतजार कर इलाज के बिना ही लौटे मरीज
सामान्य अस्पताल में हड़ताल के दौरान चिकित्सकों ने दिनभर ओपीडी बंद रखी। इस दौरान मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। अस्पताल में पहुंचा कोई मरीज जोड़ों व पेट दर्द से कराह रहा था तो कोई बुखार से पीड़ित इलाज के लिए गुहार लगा रहा था। मरीज रोजाना की तरह मंगलवार सुबह 9 बजे से पहले अस्पताल में पहुंचना शुरू हो गए थे, लेकिन हड़ताल होने के मरीज अस्पताल परिसर में भटकते रहे। काफी देर तक इंतजार के बाद इलाज नहीं मिलने पर मरीज व उसके तीमारदार घर लौट गए।
अस्पताल में 685 मरीजों को मिल सका इलाज
चिकित्सकों के हड़ताल के बावजूद छोटे बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लिए चिकित्सा सुविधा चालू रही। ऐसे में मंगलवार को 685 मरीजों का इलाज हो सका। ओपीडी पर्ची भी शिशु वार्ड व गायनी वार्ड से संबंधित बनाई जा रही थी। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप लाकड़ा मंगलवार को जेल ड्यूटी पर गए हुए थे। उनके आने के बाद दोपहर एक बजे ईएनटी के मरीजों का इलाज शुरू हो सका।
यह बोले मरीज और तीमारदार
मेरी पत्नी को कूल्हे में फ्रेक्चर हो गया है। मैं उन्हें इलाज कराने के लिए नागरिक अस्पताल में लाया तो यहां ओपीडी में हड्डी रोग विशेषज्ञ सीट पर नहीं मिले। हड़ताल होने के चलते अस्पताल से पत्नी मंजू को लेकर मजबूरी में लौटना पड़ रहा है।
- अनिल कुमार निवासी गांव जाखौली
कई दिन से मेरे पैर में दर्द हो रहा है। इलाज के लिए मैं परिजनों को साथ लेकर अस्पताल पहुंचा था। चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने के कारण मैं एक घंटे से ओपीडी के बाहर बैठा हुआ हूं, लेकिन चिकित्सक अभी तक अपनी सीट पर नहीं लौटे।
- रामकुमार निवासी गांव खेवड़ा
मुझे कई दिन से बुखार आ रहा है। मैं इलाज कराने के लिए जिला नागरिक अस्पताल में आया तो ओपीडी बंद मिली। ओपीडी खुलने के लिए काफी देर तक इंतजार किया, लेकिन डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने की वजह से लौटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
- शिव सिंह निवासी ऋषि कॉलोनी
बेटे पारस का चयन दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हुआ है। मैं बेटे को लेकर उसका मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पताल में आया था, लेकिन चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने के बाद यहां बेटे की मेडिकल जांच नहीं हो सकी।
- संदीप कुमार निवासी गांव भिगान
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सीएचसी में चिकित्सकों ने रखी ओपीडी बंद
खरखौदा/गन्नौर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मंगलवार को चिकित्सकों ने मांगों को लेकर ओपीडी बंद रखी, जबकि आपात स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही डिलिवरी सेवा सुचारु रूप से चलती रही। सीएचसी में उपचार कराने के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी हुई। डॉक्टर्स एसोसिएशन, सोनीपत के उपप्रधान डॉ. हेमंत नागर का कहना है कि अगर दो दिन में उनकी मांगों का संज्ञान नहीं लिया जाता है तो 14 जनवरी को पूर्ण रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को बंद कर सकते हैं।
वर्जन
एक दिन का काटा जाएगा वेतन
जिलेभर के 29 चिकित्सक ओपीडी में न जाकर हड़ताल पर रहे, जिसकी रिपोर्ट तैयार करके मुख्यालय भेज दी गई है। हड़ताल पर जाने वाले चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटा जाएगा। अब मुख्यालय की ओर से हड़ताल पर जाने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन
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अस्पताल में दिनभर ओपीडी बंद रहने से मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। अस्पताल में कोई दर्द से कराहता दिखा तो कोई बुखार से पीड़ित ओपीडी शुरू होने का इंतजार करता दिखा। अस्पताल में रोजाना की तरह मरीज सुबह नौ बजे से पहले पहुंचना शुरू हो गए थे। सिर्फ बच्चों व गर्भवती महिलाओं व दोपहर को ईएनटी की सेवा शुरू होने से 685 मरीजों को इलाज मुहैया हो सका।
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हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिला प्रवक्ता डॉ. प्यारेलाल ने बताया कि सरकार स्वास्थ्य विभाग में सीधे एसएमओ के पद पर चिकित्सकों की भर्ती करने की तैयारी में है। यह योजना शुरू होने के बाद पहले से नियुक्त मेडिकल अधिकारियों की अनदेखी होगी। इस भर्ती प्रक्रिया का चिकित्सकों ने वर्ष 2015 में विरोध किया था। 10 दिसंबर, 2021 को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के साथ चिकित्सकों की बैठक भी हुई थी। सरकार के आश्वासन के एक माह बाद तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे चिकित्सकों में रोष है। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने 14 जनवरी से सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी है। अगर स्वास्थ्य सेवाएं बंद की गईं तो उपचार कराने के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी और बढ़ेगी। इस दौरान जिला प्रधान राहुल आंतिल, डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. विशाल सैनी, डॉ. विकास चहल, डॉ. प्रिया, डॉ. पूनम दहिया समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
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इंतजार कर इलाज के बिना ही लौटे मरीज
सामान्य अस्पताल में हड़ताल के दौरान चिकित्सकों ने दिनभर ओपीडी बंद रखी। इस दौरान मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। अस्पताल में पहुंचा कोई मरीज जोड़ों व पेट दर्द से कराह रहा था तो कोई बुखार से पीड़ित इलाज के लिए गुहार लगा रहा था। मरीज रोजाना की तरह मंगलवार सुबह 9 बजे से पहले अस्पताल में पहुंचना शुरू हो गए थे, लेकिन हड़ताल होने के मरीज अस्पताल परिसर में भटकते रहे। काफी देर तक इंतजार के बाद इलाज नहीं मिलने पर मरीज व उसके तीमारदार घर लौट गए।
अस्पताल में 685 मरीजों को मिल सका इलाज
चिकित्सकों के हड़ताल के बावजूद छोटे बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लिए चिकित्सा सुविधा चालू रही। ऐसे में मंगलवार को 685 मरीजों का इलाज हो सका। ओपीडी पर्ची भी शिशु वार्ड व गायनी वार्ड से संबंधित बनाई जा रही थी। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप लाकड़ा मंगलवार को जेल ड्यूटी पर गए हुए थे। उनके आने के बाद दोपहर एक बजे ईएनटी के मरीजों का इलाज शुरू हो सका।
यह बोले मरीज और तीमारदार
मेरी पत्नी को कूल्हे में फ्रेक्चर हो गया है। मैं उन्हें इलाज कराने के लिए नागरिक अस्पताल में लाया तो यहां ओपीडी में हड्डी रोग विशेषज्ञ सीट पर नहीं मिले। हड़ताल होने के चलते अस्पताल से पत्नी मंजू को लेकर मजबूरी में लौटना पड़ रहा है।
- अनिल कुमार निवासी गांव जाखौली
कई दिन से मेरे पैर में दर्द हो रहा है। इलाज के लिए मैं परिजनों को साथ लेकर अस्पताल पहुंचा था। चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने के कारण मैं एक घंटे से ओपीडी के बाहर बैठा हुआ हूं, लेकिन चिकित्सक अभी तक अपनी सीट पर नहीं लौटे।
- रामकुमार निवासी गांव खेवड़ा
मुझे कई दिन से बुखार आ रहा है। मैं इलाज कराने के लिए जिला नागरिक अस्पताल में आया तो ओपीडी बंद मिली। ओपीडी खुलने के लिए काफी देर तक इंतजार किया, लेकिन डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने की वजह से लौटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
- शिव सिंह निवासी ऋषि कॉलोनी
बेटे पारस का चयन दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हुआ है। मैं बेटे को लेकर उसका मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पताल में आया था, लेकिन चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने के बाद यहां बेटे की मेडिकल जांच नहीं हो सकी।
- संदीप कुमार निवासी गांव भिगान
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सीएचसी में चिकित्सकों ने रखी ओपीडी बंद
खरखौदा/गन्नौर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मंगलवार को चिकित्सकों ने मांगों को लेकर ओपीडी बंद रखी, जबकि आपात स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही डिलिवरी सेवा सुचारु रूप से चलती रही। सीएचसी में उपचार कराने के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी हुई। डॉक्टर्स एसोसिएशन, सोनीपत के उपप्रधान डॉ. हेमंत नागर का कहना है कि अगर दो दिन में उनकी मांगों का संज्ञान नहीं लिया जाता है तो 14 जनवरी को पूर्ण रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को बंद कर सकते हैं।
वर्जन
एक दिन का काटा जाएगा वेतन
जिलेभर के 29 चिकित्सक ओपीडी में न जाकर हड़ताल पर रहे, जिसकी रिपोर्ट तैयार करके मुख्यालय भेज दी गई है। हड़ताल पर जाने वाले चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटा जाएगा। अब मुख्यालय की ओर से हड़ताल पर जाने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन

जिला अस्पताल में आपातकालीन वार्ड के बाहर सरकार के खिलाफ रोष जताते चिकित्सक। संवाद- फोटो : Sonipat