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कोरोना काल में बने सहारा, भोजन, मास्क व सैनिटाइजर किए वितरित
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स्प्रेड स्माइल फाउंडेशन की सदस्य झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों को पढ़ाते हुए। (फाइल फोटो)
- फोटो : Sonipat
कोरोना महामारी की शुरुआत का वह भयावह मंजर आज भी लोगों के जहन में ताजा है, जब पेट की आग शांत करने के लिए लोगों को लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा था। खाने के एक निवाले के लिए भी लोग बरस रहीं लाठियों के बीच डटे रहे। इन सबके बीच महामारी में जान की परवाह किए बिना लोगों के लिए मसीहा बनकर आए स्प्रेड स्माइल फाउंडेशन के सदस्यों ने जरूरतमंदों तक खाना पहुंचाने का काम किया।
संस्था के सदस्यों ने विपरीत हालात में भी जरूरतमंदों का साथ नहीं छोड़ा और झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री व जरूरत का सामान वितरित किया। यही नहीं संस्था के सदस्यों ने कॉलोनियों में जाकर लोगों को कोरोना नियमों का पाठ पढ़ाया और सैनिटाइजर व मास्क भी वितरित किए। युवा दिवस के मौके पर संस्था के सदस्यों से इस विषय में बात की तो उन्होंने एक ही शब्द कहा- अगर सभी साधन संपन्न लोग जरूरतमंदों का सहारा बन जाएं तो इनकी दशा सुधारना भी कोई मुश्किल काम नहीं। संस्था के सदस्यों का हौसला और जरूरतमंदों के प्रति भावना ने दूसरे लोगों को भी प्रभावित किया है।
बोले युवा
कोरोना महामारी की शुरुआत में लोगों में कोरोना को लेकर भय बना हुआ था। लंबे समय तक लगे लॉकडाउन के कारण निम्न वर्ग के लोगों के पास खाने तक का सामान नहीं बचा था। ऐसे में संस्था के सभी सदस्यों ने जरूरतमंदों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने का काम किया। जरूरतमंदों के लिए शुरू की गई यह मुहिम लगातार जारी रहेगी।
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- हिमांशु, सदस्य
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जब कभी भी झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों को मैले व फटे-पुराने कपड़ों में सड़कों पर भीख मांगते देखती थी तो अजीब महसूस होता था। मन में सोचती थी कि काश इनके लिए कुछ कर सकूं। एक बार नितिन जैन की संस्था स्प्रेड स्माइल फाउंडेशन के बारे में पढ़ा, जो इन बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रही थी। उसके बाद नितिन जैन से मिलीं और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।
- तान्या, सदस्य
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कोरोना महामारी के समय में साधन-संपन्न लोग तो घरों में रहकर अपना गुजर-बसर कर रहे थे, लेकिन फैक्टरियों में काम करने वालों को खाने के लाले पड़ गए थे। एक तरफ उनका काम छूट गया और दूसरी कमरे के किराये की चिंता सताने लगी थी। बसें व ट्रेनें बंद होने से घर जा नहीं सकते थे। ऐसी स्थिति में परिवार के पेट की आग कैसे बुझाते। हमने उनका दर्द समझा और उनके पास पहुंचे सहारा बने।
- आरती साहू, सदस्य
--
स्प्रेड स्माइल फाउंडेशन का उद्देश्य हर जरूरतमंद का सहारा बनना है। इस उद्देश्य को लेकर हम निरंतर प्रयासरत रहे हैं और आगे भी इसी उद्देश्य के लिए कार्य करते रहेंगे। फिर उसमें बच्चों को पढ़ाने की बात हो या फिर कोरोना जैसी महामारी में जरूरतमंदों को खाना, खाद्य सामग्री, सैनिटाइजर या मास्क वितरित करने काम।
फोटो 38- मोक्ष ग्रोवर, सदस्य
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संस्था के सदस्यों ने विपरीत हालात में भी जरूरतमंदों का साथ नहीं छोड़ा और झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री व जरूरत का सामान वितरित किया। यही नहीं संस्था के सदस्यों ने कॉलोनियों में जाकर लोगों को कोरोना नियमों का पाठ पढ़ाया और सैनिटाइजर व मास्क भी वितरित किए। युवा दिवस के मौके पर संस्था के सदस्यों से इस विषय में बात की तो उन्होंने एक ही शब्द कहा- अगर सभी साधन संपन्न लोग जरूरतमंदों का सहारा बन जाएं तो इनकी दशा सुधारना भी कोई मुश्किल काम नहीं। संस्था के सदस्यों का हौसला और जरूरतमंदों के प्रति भावना ने दूसरे लोगों को भी प्रभावित किया है।
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बोले युवा
कोरोना महामारी की शुरुआत में लोगों में कोरोना को लेकर भय बना हुआ था। लंबे समय तक लगे लॉकडाउन के कारण निम्न वर्ग के लोगों के पास खाने तक का सामान नहीं बचा था। ऐसे में संस्था के सभी सदस्यों ने जरूरतमंदों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने का काम किया। जरूरतमंदों के लिए शुरू की गई यह मुहिम लगातार जारी रहेगी।
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- हिमांशु, सदस्य
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जब कभी भी झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों को मैले व फटे-पुराने कपड़ों में सड़कों पर भीख मांगते देखती थी तो अजीब महसूस होता था। मन में सोचती थी कि काश इनके लिए कुछ कर सकूं। एक बार नितिन जैन की संस्था स्प्रेड स्माइल फाउंडेशन के बारे में पढ़ा, जो इन बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रही थी। उसके बाद नितिन जैन से मिलीं और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।
- तान्या, सदस्य
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कोरोना महामारी के समय में साधन-संपन्न लोग तो घरों में रहकर अपना गुजर-बसर कर रहे थे, लेकिन फैक्टरियों में काम करने वालों को खाने के लाले पड़ गए थे। एक तरफ उनका काम छूट गया और दूसरी कमरे के किराये की चिंता सताने लगी थी। बसें व ट्रेनें बंद होने से घर जा नहीं सकते थे। ऐसी स्थिति में परिवार के पेट की आग कैसे बुझाते। हमने उनका दर्द समझा और उनके पास पहुंचे सहारा बने।
- आरती साहू, सदस्य
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स्प्रेड स्माइल फाउंडेशन का उद्देश्य हर जरूरतमंद का सहारा बनना है। इस उद्देश्य को लेकर हम निरंतर प्रयासरत रहे हैं और आगे भी इसी उद्देश्य के लिए कार्य करते रहेंगे। फिर उसमें बच्चों को पढ़ाने की बात हो या फिर कोरोना जैसी महामारी में जरूरतमंदों को खाना, खाद्य सामग्री, सैनिटाइजर या मास्क वितरित करने काम।
फोटो 38- मोक्ष ग्रोवर, सदस्य

कोरोना महामारी के समय स्प्रेड स्माइल फाउंडेशन के सदस्य जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री वितरित करते - फोटो : Sonipat