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ओलंपियन के गांव में तीन साल से किराए के भवन में चल रहा औषधालय, डेढ़ माह से चिकित्सक भी नहीं
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सोनीपत। ओलंपियन पहलवान रवि दहिया के गांव नाहरी में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। गांव में तीन साल से चल रहे राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय में अब चिकित्सक नहीं होने के कारण मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा। चिकित्सक नहीं होने के कारण नाहरी समेत आसपास कई गांवों के लोगों को इलाज के लिए शहर का रुख करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वह इस संबंध में कई बार स्वास्थ्य अधिकारियों तक अपनी मांग पहुंचा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
ग्रामीण अंचल के लोगों को इलाज समय पर मिल सके और उन्हें शहर की तरफ न भागना पड़े इसे लेकर आयुष विभाग ने तीन वर्ष पहले गांव नाहरी में राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय को खोला था। वर्ष 2019 में औषधालय खुलने के बाद नाहरी के अलावा गांव हलालपुर, झिंझोली, कतलूपुर, नाहरा, खेड़ी मनाजात, मल्हा माजरा, अकबरपुर बारोटा, सफियाबाद, मुनीरपुर से रोजाना 50 से ज्यादा लोग इलाज कराने आते थे। लेकिन अब चिकित्सक नहीं होने के कारण उनकी परेशानी बढ़ गई है। अब उन्हें सोनीपत या नरेला की तरफ जाना पड़ता और या फिर गांवों में दुकान खोलकर बैठे झोला छाप डॉक्टरों से इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है। बताया जा रहा है डेढ़ माह से औषधालय में चिकित्सक नहीं है। चिकित्सक के मेडिकल लीव पर होने के कारण यहां सेवाएं नहीं मिल पा रही। यह मामला आयुष विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में होते हुए भी औषधालय में अतिरिक्त चिकित्सक की ड्यूटी नहीं लगाई जा रही। आयुष अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीण पदम सिंह दहिया, सतबीर सिंह, सुनीता, रमेश कुमार, रणधीर सिंह, मुकेश, राजबीर सिंह, साक्षी व शीला आदि ने मांग करते हुए कहा कि महिलाओं की देखभाल करने के लिए एएनएम या स्टाफ नर्स की औषधालय में स्थायी नियुक्ति की जाए। सप्ताह में तीन दिन की बजाय फार्मासिस्ट की औषधालय में स्थाई नियुक्ति की जाए। वर्ष 2019 से किराये के भवन में चलाए जा रहे औषधालय के लिए अपने भवन का निर्माण शीघ्र कराया जाए।
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वर्जन
मेरे गांव में सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए औषधालय खोला था। अब यहां पर चिकित्सक व स्टाफ नर्स तक नहीं होने के कारण उपचार नहीं हो पा रहा है। इसे लेकर अधिकारियों को शिकायत की जा चुकी है। अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो सीएम के दरबार में मांग को उठाया जाएगा।
- सुकेश रानी, निवर्तमान पंचायत समिति सदस्य
वर्जन
राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय नाहरी में डेढ़ माह से चिकित्सक मेडिकल लीव पर थे। एक या दो दिन में चिकित्सक दोबारा ड्यूटी पर आएंगे। अगर पंचायत अपनी जमीन पर औषधालय के भवन निर्माण के लिए रेजुलेशन पास करके दे तो मुख्यालय से बजट मंगवाकर अलग से नए भवन का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. अजीत मलिक, जिला आयुर्वेद अधिकारी
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ग्रामीण अंचल के लोगों को इलाज समय पर मिल सके और उन्हें शहर की तरफ न भागना पड़े इसे लेकर आयुष विभाग ने तीन वर्ष पहले गांव नाहरी में राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय को खोला था। वर्ष 2019 में औषधालय खुलने के बाद नाहरी के अलावा गांव हलालपुर, झिंझोली, कतलूपुर, नाहरा, खेड़ी मनाजात, मल्हा माजरा, अकबरपुर बारोटा, सफियाबाद, मुनीरपुर से रोजाना 50 से ज्यादा लोग इलाज कराने आते थे। लेकिन अब चिकित्सक नहीं होने के कारण उनकी परेशानी बढ़ गई है। अब उन्हें सोनीपत या नरेला की तरफ जाना पड़ता और या फिर गांवों में दुकान खोलकर बैठे झोला छाप डॉक्टरों से इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है। बताया जा रहा है डेढ़ माह से औषधालय में चिकित्सक नहीं है। चिकित्सक के मेडिकल लीव पर होने के कारण यहां सेवाएं नहीं मिल पा रही। यह मामला आयुष विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में होते हुए भी औषधालय में अतिरिक्त चिकित्सक की ड्यूटी नहीं लगाई जा रही। आयुष अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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ग्रामीण पदम सिंह दहिया, सतबीर सिंह, सुनीता, रमेश कुमार, रणधीर सिंह, मुकेश, राजबीर सिंह, साक्षी व शीला आदि ने मांग करते हुए कहा कि महिलाओं की देखभाल करने के लिए एएनएम या स्टाफ नर्स की औषधालय में स्थायी नियुक्ति की जाए। सप्ताह में तीन दिन की बजाय फार्मासिस्ट की औषधालय में स्थाई नियुक्ति की जाए। वर्ष 2019 से किराये के भवन में चलाए जा रहे औषधालय के लिए अपने भवन का निर्माण शीघ्र कराया जाए।
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मेरे गांव में सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए औषधालय खोला था। अब यहां पर चिकित्सक व स्टाफ नर्स तक नहीं होने के कारण उपचार नहीं हो पा रहा है। इसे लेकर अधिकारियों को शिकायत की जा चुकी है। अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो सीएम के दरबार में मांग को उठाया जाएगा।
- सुकेश रानी, निवर्तमान पंचायत समिति सदस्य
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राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय नाहरी में डेढ़ माह से चिकित्सक मेडिकल लीव पर थे। एक या दो दिन में चिकित्सक दोबारा ड्यूटी पर आएंगे। अगर पंचायत अपनी जमीन पर औषधालय के भवन निर्माण के लिए रेजुलेशन पास करके दे तो मुख्यालय से बजट मंगवाकर अलग से नए भवन का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. अजीत मलिक, जिला आयुर्वेद अधिकारी