विश्व पैरा एथलीट ग्रांडप्रिक्स प्रतियोगिता: डिस्कस थ्रो में अपने गुरु के 12 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ धर्मबीर ने जीते दो रजत पदक
पैरा एथलीट धर्मबीर नैन ने डिस्कस थ्रो में 10.93 मीटर और क्लब थ्रो में 31.09 मीटर की थ्रो लगाकर दो रजत पदक जीते। 12 साल से पैरा एथलीट अमित सरोहा के नाम ये दोनों रिकॉर्ड थे।
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13वीं अंतरराष्ट्रीय विश्व पैरा एथलीट ग्रांडप्रिक्स प्रतियोगिता में हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव भदाना निवासी धर्मबीर नैन ने अपने ही गुरु अमित सरोहा के रिकॉर्ड को तोड़ दो नए एशियन रिकॉर्ड बनाए हैं। धर्मबीर नैन ने डिस्कस थ्रो में 10.93 मीटर और क्लब थ्रो में 31.09 मीटर के थ्रो कर नए रिकॉर्ड कायम करते हुए रजत पदक अपने नाम किए। यह प्रतियोगिता 17 से 25 मार्च तक दुबई में आयोजित हो रही है। इससे पहले ये दोनों रिकॉर्ड 12 साल से भारतीय पैरा एथलीट अमित सरोहा के नाम थे, जो डिस्कस थ्रो में 10.45 मीटर और क्लब थ्रो में 30.27 मीटर थे।
टोक्यो पैरालंपिक में मिली निराशा के बाद इस साल की अपनी पहली प्रतिस्पर्धा खेल रहे धर्मबीर नैन ने बेहतर शुरुआत की है। दुबई में खेली जा रही प्रतियोगिता में धर्मबीर ने 17 मार्च को जहां क्लब थ्रो के फाइनल में 31.09 मीटर थ्रो कर रजत पदक जीत नया रिकॉर्ड बनाया था, वहीं बुधवार को डिस्कस थ्रो में अपने गुरु अमित सरोहा का 12 साल पुराना 10.45 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ 10.93 मीटर थ्रो किया। धर्मबीर नैन की सफलता पर लगातार बधाई मिल रही है। धर्मबीर नैन दोनों प्रतिस्पर्धाओं में नए एशियन रिकॉर्ड कायम कर 25 मार्च को लौटेंगे।
अमित सरोहा की प्रेरणा से क्लब थ्रो में चमके धर्मबीर
गांव भदाना निवासी रणबीर सिंह के पुत्र धर्मबीर नैन जून 2012 में एमए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे। तब दोस्तों के साथ नहर में नहाने के लिए चले गए। नहाने के लिए नहर में छलांग लगाई, लेकिन जलस्तर कम होने से गर्दन सीधा जमीन से जा टकराई। इस हादसे में रीढ़ की हड्डी टूट गई और शरीर के नीचे आधे से ज्यादा हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था।
दिल्ली में इलाज करने के बाद छह महीने गुरुग्राम में आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण लिया। व्हीलचेयर पर आने के बाद वे पैरालंपियन गांव बैंयापुर के अमित सरोहा के संपर्क में आए। अमित की प्रेरणा से क्लब थ्रो में जमकर अभ्यास किया।
अमित के साथ धर्मबीर ने भी टोक्यो पैरालंपिक में भाग लिया। धर्मबीर ने वर्ष 2015 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और कांस्य पदक अपने नाम किया। 2016 के रियो पैरा ओलंपिक, 2017 और 2019 की विश्व चैंपियनशिप में प्रतिभागिता की।
टूटने के लिए ही बनते हैं रिकॉर्ड : सरोहा
अमित सरोहा ने कहा कि रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं। उन्होंने कहा कि एक कोच के लिए इससे ज्यादा खुशी क्या हो सकती है कि उसका शिष्य ही उनका रिकॉर्ड तोड़े। धर्मबीर एक बेहतरीन खिलाड़ी है। मैं यही चाहूंगा कि हमारी जोड़ी पैरा एशियन खेलों में एक बार फिर पदक लाए।
अमित सरोहा जैसा कोच मिलना गर्व की बात : धर्मबीर नैन
धर्मबीर नैन ने कहा कि अमित सरोहा जैसा कोच और मार्गदर्शक मिलना मेरे लिए गर्व की बात है। उन्होंने मुझे कभी भी अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं माना और हमेशा बेहतर खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके द्वारा दिए गए प्रशिक्षण के कारण ही आज इस काबिल बना हूं कि देश के लिए पदक जीत सकूं। मैं यही कामना करता हूं कि हम दोनों गुरु-शिष्य की जोड़ी हमेशा देश के लिए पदक जीतती रहे।