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Sonipat News: यूरिया-डीएपी वितरण नीति पर पुनर्विचार की मांग, निजी खाद विक्रेताओं ने सरकार से लगाई गुहार
Mon, 06 Jul 2026 05:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 06 Jul 2026 05:03 AM IST
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फोटो: सोनीपत के मुरथल स्थित होटल में हुई बैठक के दौरान उपस्थित खाद विक्रेता। स्रोत: एसोसिएश
सोनीपत। मुरथल स्थित होटल में रविवार को हरियाणा सीड्स, फर्टिलाइजर एवं पेस्टीसाइड एसोसिएशन के तत्वावधान में प्रदेशभर के खाद विक्रेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने हरियाणा सरकार से यूरिया एवं डीएपी वितरण नीति पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई।
सभी ने निजी खाद विक्रेताओं और उनसे जुड़े लाखों परिवारों की आजीविका को सुरक्षित रखने की अपील की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकार की तरफ से यूरिया और डीएपी खाद के लगभग 60 प्रतिशत वितरण को सहकारी समितियों के माध्यम से संचालित करने के निर्णय से प्रदेश के 10 हजार निजी खाद विक्रेताओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
यदि इस नीति में संतुलन नहीं बनाया गया तो हजारों प्रतिष्ठानों के बंद होने और लाखों लोगों के रोजगार प्रभावित होने की आशंका है। निजी खाद विक्रेता केवल व्यवसायी नहीं बल्कि किसानों के लंबे समय से विश्वसनीय सहयोगी रहे हैं। वह किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराने के साथ जरूरत पड़ने पर उधार में सामग्री देकर भी मदद करते हैं।
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बैठक में कहा कि अनेक किसानों के सहकारी समितियों में खाते नहीं हैं या वह तकनीकी कारणों से डिफाल्टर की श्रेणी में आ चुके हैं। ऐसे किसानों को खाद लेने में दिक्कत होगी। छुट्टियों और व्यस्त समय में सहकारी समितियों पर पर्याप्त सुविधा न होने से किसानों की परेशानी बढ़ेगी।
बैठक में संजय सिंगला सोनीपत, अमित गोयल करनाल, अक्षय जैन सफीदों, जींद, महेंद्र जैन पानीपत, संजय गर्ग यमुनानगर, संदीप लोहान अलेवा, राजकुमार और अमित गोहाना, रवि गर्ग दादरी, संदीप नरवाना, सुनील खत्री सोनीपत, सुरेंद्र गोहाना, बबलू चेयरमैन जींद और सुरेंद्र उचाना सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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सभी ने निजी खाद विक्रेताओं और उनसे जुड़े लाखों परिवारों की आजीविका को सुरक्षित रखने की अपील की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकार की तरफ से यूरिया और डीएपी खाद के लगभग 60 प्रतिशत वितरण को सहकारी समितियों के माध्यम से संचालित करने के निर्णय से प्रदेश के 10 हजार निजी खाद विक्रेताओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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यदि इस नीति में संतुलन नहीं बनाया गया तो हजारों प्रतिष्ठानों के बंद होने और लाखों लोगों के रोजगार प्रभावित होने की आशंका है। निजी खाद विक्रेता केवल व्यवसायी नहीं बल्कि किसानों के लंबे समय से विश्वसनीय सहयोगी रहे हैं। वह किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराने के साथ जरूरत पड़ने पर उधार में सामग्री देकर भी मदद करते हैं।
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बैठक में कहा कि अनेक किसानों के सहकारी समितियों में खाते नहीं हैं या वह तकनीकी कारणों से डिफाल्टर की श्रेणी में आ चुके हैं। ऐसे किसानों को खाद लेने में दिक्कत होगी। छुट्टियों और व्यस्त समय में सहकारी समितियों पर पर्याप्त सुविधा न होने से किसानों की परेशानी बढ़ेगी।
बैठक में संजय सिंगला सोनीपत, अमित गोयल करनाल, अक्षय जैन सफीदों, जींद, महेंद्र जैन पानीपत, संजय गर्ग यमुनानगर, संदीप लोहान अलेवा, राजकुमार और अमित गोहाना, रवि गर्ग दादरी, संदीप नरवाना, सुनील खत्री सोनीपत, सुरेंद्र गोहाना, बबलू चेयरमैन जींद और सुरेंद्र उचाना सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।