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Sonipat News: फसल कटाई का कार्य बना रोजगार का साधन
Sun, 16 Mar 2025 10:26 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 16 Mar 2025 10:26 PM IST
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फोटो नंबर- 08सरसों की कटाई करते किसान। संवाद
नारनौल। जिले की 6 मंडियों में सरसों की खरीद शनिवार से शुरू की गई है, लेकिन खरीद के पहले दिन मंडियों में किसान फसल लेकर नहीं पहुंचे, क्योंकि जिले में इस समय अधिकतर स्थानों पर सरसों की कटाई की जा रही है। सप्ताह भर बाद सरसों की आवक में तेजी आने की संभावना है।
सरसों की कटाई के लिए क्षेत्र में इस समय मजदूरों की मांग भी बनी हुई है। इस कारण फसल कटाई के मेहनताना में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस समय फसल कटाई की दिहाड़ी में 100 से 200 रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वहीं प्रवासी मजदूरों द्वारा ठेके पर की जाने वाली फसल कटाई की लागत में भी करीब 700 से 800 रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
सरसों की कटाई के लिए दिहाड़ी 600 रुपये और ठेके पर फसल कटाई की लागत 4 हजार 8 सौ रुपये से 5 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से आ रही है। फसल कटाई में अधिक लागत के कारण अधिकतर किसान स्वयं फसल की कटाई कर रहे हैं। नौकरीपेशा लोग छुट्टी लेकर फसल कटाई का कार्य कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग रिश्तेदारों को बुलावा भेज कर फसल कटवाने में मदद मांग रहे हैं।
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स्थानीय बुजुर्ग किसानों के अनुसार पहले लोग सरसों के डाकल को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करते थे और केवल ईंधन के लिए सरसों की कटाई करते थे। वह जितनी सरसों की फलियों की कटाई करते थे, उतने ईंधन को काट कर वह घर ले जाते थे, लेकिन जैसे-जैसे लोगों के घरों में चूल्हे की जगह गैस और बिजली से चलने वाले चूल्हों ने ली है। ईंधन की मांग में कमी देखने को मिली है। इस कारण भी किसान मजदूरी और ठेके पर फसल कटवा रहे हैं।
जिले में पिछले कुछ सालों में खेती करने के तौर-तरीकों में बदलाव आया है। पहले जहां फसल की कटाई एक साधारण काम होता था। अब फसल कटाई ने रोजगार का रूप ले लिया है। प्रवासी व स्थानीय मजदूर द्वारा फसल कटाई का कार्य ठेके पर लिया जाता है। ठेके पर फसल कटाई करने वाले मजदूरों का समूह आमतौर पर फसल को काटने में लगने वाले समय से जल्दी कटाई का कार्य करते हैं। जिस कारण किसान मौसम की मार सहित अन्य कारणों से जल्द से जल्द फसल कटवाने के लिए ठेके पर कटाई का कार्य दे रहे हैं।
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आमतौर पर सरसों की कटाई के समय मौसम साफ रहता था, लेकिन इस बार मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इस कारण जितना जल्दी हो सके सरसों की कटाई पूरी करना चाहते हैं। मजदूरी महंगी होने के कारण स्वयं ही फसल काट रहे हैं। - मूर्ति देवी, किसान
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मेहनताना बढ़ने के कारण फसल कटाई के कार्य में अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। ओलावृष्टि से भी सरसों को अधिक नुकसान हुआ है। सरकार से मांग है कि सर्वे का कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए।-लालाराम, किसान
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सरसों की कटाई के लिए क्षेत्र में इस समय मजदूरों की मांग भी बनी हुई है। इस कारण फसल कटाई के मेहनताना में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस समय फसल कटाई की दिहाड़ी में 100 से 200 रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वहीं प्रवासी मजदूरों द्वारा ठेके पर की जाने वाली फसल कटाई की लागत में भी करीब 700 से 800 रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
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सरसों की कटाई के लिए दिहाड़ी 600 रुपये और ठेके पर फसल कटाई की लागत 4 हजार 8 सौ रुपये से 5 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से आ रही है। फसल कटाई में अधिक लागत के कारण अधिकतर किसान स्वयं फसल की कटाई कर रहे हैं। नौकरीपेशा लोग छुट्टी लेकर फसल कटाई का कार्य कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग रिश्तेदारों को बुलावा भेज कर फसल कटवाने में मदद मांग रहे हैं।
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स्थानीय बुजुर्ग किसानों के अनुसार पहले लोग सरसों के डाकल को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करते थे और केवल ईंधन के लिए सरसों की कटाई करते थे। वह जितनी सरसों की फलियों की कटाई करते थे, उतने ईंधन को काट कर वह घर ले जाते थे, लेकिन जैसे-जैसे लोगों के घरों में चूल्हे की जगह गैस और बिजली से चलने वाले चूल्हों ने ली है। ईंधन की मांग में कमी देखने को मिली है। इस कारण भी किसान मजदूरी और ठेके पर फसल कटवा रहे हैं।
जिले में पिछले कुछ सालों में खेती करने के तौर-तरीकों में बदलाव आया है। पहले जहां फसल की कटाई एक साधारण काम होता था। अब फसल कटाई ने रोजगार का रूप ले लिया है। प्रवासी व स्थानीय मजदूर द्वारा फसल कटाई का कार्य ठेके पर लिया जाता है। ठेके पर फसल कटाई करने वाले मजदूरों का समूह आमतौर पर फसल को काटने में लगने वाले समय से जल्दी कटाई का कार्य करते हैं। जिस कारण किसान मौसम की मार सहित अन्य कारणों से जल्द से जल्द फसल कटवाने के लिए ठेके पर कटाई का कार्य दे रहे हैं।
आमतौर पर सरसों की कटाई के समय मौसम साफ रहता था, लेकिन इस बार मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इस कारण जितना जल्दी हो सके सरसों की कटाई पूरी करना चाहते हैं। मजदूरी महंगी होने के कारण स्वयं ही फसल काट रहे हैं। - मूर्ति देवी, किसान
मेहनताना बढ़ने के कारण फसल कटाई के कार्य में अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। ओलावृष्टि से भी सरसों को अधिक नुकसान हुआ है। सरकार से मांग है कि सर्वे का कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए।-लालाराम, किसान