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यूनिवर्सिटी में भर्तियों व खर्च की सरकार ने शुरू कराई विजिलेंस जांच
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत
Updated Wed, 08 Mar 2017 12:45 AM IST
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दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल में कोई घपला हुआ होगा तो वह जल्द ही खुलकर सामने आएगा, क्योंकि सरकार ने यूनिवर्सिटी में भर्तियों से लेकर खर्च तक की विजिलेंस जांच शुरू करा दी है। विजिलेंस ने जांच के आदेश मिलने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन से सभी फाइलों को मांगा है, जिसके बाद से वहां हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि वहां भर्तियों से लेकर रुपया खर्च में कई की गर्दन फंस सकती है। वहीं यूनिवर्सिटी से काफी फाइलें गायब हैं और फाइलों के नहीं मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।
फिलहाल यूनिवर्सिटी में फाइलों को तलाशना शुरू कर दिया है, लेकिन वहां अभी लगभग एक दर्जन फाइलें गायब है।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल में मई 2014 से अगस्त 2016 तक प्रो. आरपी दहिया वीसी रहे हैं। इस दौरान यूनिवर्सिटी में काफी भर्तियां भी हुई हैं तो यूनिवर्सिटी में करोड़ों रुपये के काम भी कराए गए हैं, लेकिन इन भर्तियों से लेकर कार्य कराने के लिए रुपये खर्च करने में गड़बड़ के आरोप लगते रहे हैं। इस गड़बड़ी की शिकायत सरकार तक भी पहुंची, जिसके बाद सरकार ने प्रो. आरपी दहिया के कार्यकाल के दौरान हुई सभी भर्तियों व रुपये खर्च की जांच कराने के आदेश जारी किए हैं।
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इसके अलावा प्रो. आरपी दहिया के ज्यादा वेतन लेने के मामले की जांच भी कराने के आदेश दिए गए हैं, क्योंकि सरकार से निर्धारण नहीं होने की स्थिति में उस समय वीसी ने खुद ही अपना वेतन निर्धारित कर लिया था। इस तरह जांच का आदेश मिलने पर विजिलेंस ने उस दौरान की सभी फाइलों को मांगा है। अब विजिलेंस जांच होने में कई की गर्दन फंसती दिख रही है। वहीं यूनिवर्सिटी से उस दौरान की काफी फाइलें गायब हैं और उस फाइलों के गायब होने के मामले में भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है। इसमें यूनिवर्सिटी के कई लिपिक भी फंसते दिख रहे है, क्योंकि फाइल किस तरह गायब हुई है। उसके लिए उनको भी जिम्मेदार माना जा सकता है। विजिलेंस विभाग के सूत्रों के अनुसार जिस तरह के सबूत शिकायत में दिए गए हैं, उससे लग रहा है कि वहां काफी खेल किया गया है। लेकिन विभाग अपनी ओर से जांच करने के बाद ही रिपोर्ट सरकार को भेजेगा।
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पूर्व वीसी को भेजा गया था 6 लाख रिकवरी के लिए नोटिस
सरकार ही विजिलेंस जांच कराकर पूर्व वीसी पर शिकंजा कसने में नहीं लगी है। बल्कि यूनिवर्सिटी की ओर से भी उनको वेतन निर्धारण नहीं होने के बावजूद ज्यादा रुपये लेने की बात कहते हुए रिकवरी के लिए शोकॉज नोटिस भेजा गया था, जिसमें कहा गया था कि उनसे क्यों ना छह लाख रुपये की रिकवरी की जाए, क्योंकि वह वीसी के पद पर रहते हुए ज्यादा वेतन लेते रहे है।