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खाप सड़क पर नहीं, अदालत में लड़ेंगी आरक्षण की लड़ाई
अमर उजाला, सोनीपत
Updated Fri, 03 Jun 2016 01:02 AM IST
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supreme court
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एक तरफ जहां यशपाल मलिक गुट पांच जून से प्रदेशस्तर पर जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर धरने और प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है वहीं खाप एक-एक कर आंदोलन से किनारा करने लगी हैं। एक दिन पहले जहां 360 खाप के प्रधान राजेंद्र खत्री ने आंदोलन से दूर रहने की बात कही थी, वहीं गुरुवार को दहिया खाप के प्रतिनिधि सुरेंद्र दहिया उर्फ बनिया और सरोहा खाप के प्रधान रणधीर सिंह सरोहा ने साफ किया कि खाप आंदोलन की बजाए अदालत में जाट आरक्षण की लड़ाई लड़ेंगी।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए खाप प्रतिनिधियों ने कहा कि खाप इस बार सीधे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के मूड में नहीं हैं। खाप अब न्यायपालिका के माध्यम से ही आरक्षण प्राप्त करना चाहती है। यही नहीं विभिन्न खापों के प्रमुख कोर्ट में हर दस साल में आरक्षण की समीक्षा के नियम को सही ढंग से लागू कराने की याचिका भी डालेंगे। इसके लिए खाप समाज के विभिन्न वर्गों से भी सलाह लेंगी। आगामी 5 जून को घोषित आंदोलन के प्रति संवेदनशील नजर आए खाप प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन का आह्वान करने वाले जाट नेताओं को भी आंदोलन स्थगित करके कोर्ट में लड़ाई लड़नी चाहिए। क्योंकि समाज के हर वर्ग को न्यायपालिका पर विश्वास है।
जाट आरक्षण पर कोर्ट ने स्टे लगाया है। इसलिए कोर्ट के माध्यम से ही अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे। जरूरतमंद व्यक्ति को आरक्षण का लाभ पहुंचे, इसके लिए सरकार से मांग की जाएगी कि वे हर 10 साल में आरक्षण की समीक्षा सुनिश्चित करें। यही नहीं अपनी इस मांग को लेकर कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
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-रणधीर सिंह सरोहा, प्रधान, सरोहा खाप।
प्रदेश सरकार ने आरक्षण दे दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई है। अब आरक्षण को लेकर लड़ाई सरकार से नहीं है। ऐसे में आंदोलन की बजाए खाप कानूनी लड़ाई लड़ेंगी। वे पांच जून से शुरू होने वाले संभावित आंदोलन का समर्थन नहीं करते। खापों को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। सरकार से मांग की जाएगी कि कोर्ट में मजबूत पक्ष रखकर जाट आरक्षण पर लगी रोक हटवाई जाए।
-सुरेंद्र दहिया उर्फ बनिया, प्रतिनिधि दहिया खाप
पत्रकारों से बातचीत करते हुए खाप प्रतिनिधियों ने कहा कि खाप इस बार सीधे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के मूड में नहीं हैं। खाप अब न्यायपालिका के माध्यम से ही आरक्षण प्राप्त करना चाहती है। यही नहीं विभिन्न खापों के प्रमुख कोर्ट में हर दस साल में आरक्षण की समीक्षा के नियम को सही ढंग से लागू कराने की याचिका भी डालेंगे। इसके लिए खाप समाज के विभिन्न वर्गों से भी सलाह लेंगी। आगामी 5 जून को घोषित आंदोलन के प्रति संवेदनशील नजर आए खाप प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन का आह्वान करने वाले जाट नेताओं को भी आंदोलन स्थगित करके कोर्ट में लड़ाई लड़नी चाहिए। क्योंकि समाज के हर वर्ग को न्यायपालिका पर विश्वास है।
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जाट आरक्षण पर कोर्ट ने स्टे लगाया है। इसलिए कोर्ट के माध्यम से ही अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे। जरूरतमंद व्यक्ति को आरक्षण का लाभ पहुंचे, इसके लिए सरकार से मांग की जाएगी कि वे हर 10 साल में आरक्षण की समीक्षा सुनिश्चित करें। यही नहीं अपनी इस मांग को लेकर कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
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-रणधीर सिंह सरोहा, प्रधान, सरोहा खाप।
प्रदेश सरकार ने आरक्षण दे दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई है। अब आरक्षण को लेकर लड़ाई सरकार से नहीं है। ऐसे में आंदोलन की बजाए खाप कानूनी लड़ाई लड़ेंगी। वे पांच जून से शुरू होने वाले संभावित आंदोलन का समर्थन नहीं करते। खापों को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। सरकार से मांग की जाएगी कि कोर्ट में मजबूत पक्ष रखकर जाट आरक्षण पर लगी रोक हटवाई जाए।
-सुरेंद्र दहिया उर्फ बनिया, प्रतिनिधि दहिया खाप