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फर्जी रसीद बनाने का आरोपी विशाखापट्टनम से गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Fri, 25 Dec 2015 12:00 AM IST
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जिले के बहुचर्चित चंदन तस्करी के मामले में फर्जी रसीद तैयार करने के आरोपी लोकेश प्रसाद निवासी विजयवाड़ा रहमत मंजिल, विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कागजात बनाना स्वीकार किया है। आरोपी ने हजारों की नकदी और चंदन तस्करी में दो फीसदी हिस्सेदारी के लिए कागजात बनवाए थे।
विशेष जांच टीम के एसआई बिजेंद्र सिंह ने बताया कि सितंबर, 2014 को गांव सिसाना निवासी जितेंद्र उर्फ धोला के प्लाट से अवैध शराब और चंदन की लकड़ियां बरामद की थी। पुलिस ने वहां से जितेंद्र, शीशपाल, नरेश, नीरज और उदय को काबू किया था। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने सवा करोड़ की चंदन की लकड़ी व ढाई सौ पेटी शराब बरामद की थी। पुलिस ने आरोपी जितेंद्र को रिमांड पर लेकर उसकी निशानदेही पर पांच लाख की चंदन और बरामद की थी। पुलिस ने बाद में मामले में आरोपी गांव मंगली, हिसार निवासी राजू को भी गिरफ्तार किया था। जितेंद्र ने बताया था कि वह राजू से ही चंदन खरीदकर लाया था।
पुलिस ने मामला दर्ज कर कागजी कार्रवाई के बाद केस अदालत में पेश कर दिया था। इसी बीच आरोपी जितेंद्र ने कागजात देकर करीब 50 लाख रुपये कीमत की चंदन लकड़ी की सुपरदारी करा ली थी। कोर्ट में जब कागजात की जांच हुई तो पता लगा कि फर्जी कागजात जमा कराकर चंदन की सुपरदारी कराई गई है। जिस पर अदालत के निर्देश पर पुलिस ने फिर से जितेंद्र के खिलाफ 26 फरवरी को धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस टीम ने आरोपी जितेंद्र को मई माह में काबू कर लिया था। जिसने बताया था कि उसने फर्जी कागजात लोकेश प्रसाद से बनाए है। जिसके बाद से पुलिस टीम आरोपी की तलाश कर रही थी। इसी बीच पुलिस टीम ने साइबर की मदद से आरोपी का पता लगाते हुए एसआई बिजेंद्र कुमार की टीम ने आरोपी को विशाखापट्टनम से काबू कर लिया है।
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समुद्र में फेंक दिए बिल बुक और मोहर
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने अपनी फर्म लोकेश इंटरप्राइजेज के नाम से फर्जी बिल बनाए थे। इतना ही नहीं उसे जब मामला दर्ज होने का पता लगा तो उसने फर्जी बिल बुक और मोहर को समुद्र में फेंक दिया था। लोकेश ने बताया कि फर्जी कागजात तैयार करने के लिए आरोपी जितेंद्र ने उसे पहले 50 हजार नकद दिए। साथ में चंदन लकड़ी बेचकर मिलने वाली राशि में से भी दो फीसदी हिस्सेदारी देने की बात कही थी।
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विशेष जांच टीम के एसआई बिजेंद्र सिंह ने बताया कि सितंबर, 2014 को गांव सिसाना निवासी जितेंद्र उर्फ धोला के प्लाट से अवैध शराब और चंदन की लकड़ियां बरामद की थी। पुलिस ने वहां से जितेंद्र, शीशपाल, नरेश, नीरज और उदय को काबू किया था। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने सवा करोड़ की चंदन की लकड़ी व ढाई सौ पेटी शराब बरामद की थी। पुलिस ने आरोपी जितेंद्र को रिमांड पर लेकर उसकी निशानदेही पर पांच लाख की चंदन और बरामद की थी। पुलिस ने बाद में मामले में आरोपी गांव मंगली, हिसार निवासी राजू को भी गिरफ्तार किया था। जितेंद्र ने बताया था कि वह राजू से ही चंदन खरीदकर लाया था।
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पुलिस ने मामला दर्ज कर कागजी कार्रवाई के बाद केस अदालत में पेश कर दिया था। इसी बीच आरोपी जितेंद्र ने कागजात देकर करीब 50 लाख रुपये कीमत की चंदन लकड़ी की सुपरदारी करा ली थी। कोर्ट में जब कागजात की जांच हुई तो पता लगा कि फर्जी कागजात जमा कराकर चंदन की सुपरदारी कराई गई है। जिस पर अदालत के निर्देश पर पुलिस ने फिर से जितेंद्र के खिलाफ 26 फरवरी को धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस टीम ने आरोपी जितेंद्र को मई माह में काबू कर लिया था। जिसने बताया था कि उसने फर्जी कागजात लोकेश प्रसाद से बनाए है। जिसके बाद से पुलिस टीम आरोपी की तलाश कर रही थी। इसी बीच पुलिस टीम ने साइबर की मदद से आरोपी का पता लगाते हुए एसआई बिजेंद्र कुमार की टीम ने आरोपी को विशाखापट्टनम से काबू कर लिया है।
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समुद्र में फेंक दिए बिल बुक और मोहर
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने अपनी फर्म लोकेश इंटरप्राइजेज के नाम से फर्जी बिल बनाए थे। इतना ही नहीं उसे जब मामला दर्ज होने का पता लगा तो उसने फर्जी बिल बुक और मोहर को समुद्र में फेंक दिया था। लोकेश ने बताया कि फर्जी कागजात तैयार करने के लिए आरोपी जितेंद्र ने उसे पहले 50 हजार नकद दिए। साथ में चंदन लकड़ी बेचकर मिलने वाली राशि में से भी दो फीसदी हिस्सेदारी देने की बात कही थी।