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सिंचाई विभाग के एक्सईएन, तीन एसडीओ व दो जेई सस्पेंड
ब्यूरो, अमर उजाला/सोनीपत
Updated Fri, 30 Sep 2016 12:58 AM IST
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युमना के टिकोला घाट पर एक करोड़ रुपये खर्च कर सिंचाई विभाग द्वारा करवाए गए ठोकरों को निर्माण में कोताही बरतने पर विभाग के एक्सईएन, तीन एसडीओ तथा दो जेई को सस्पेंड किया गया है। जांच में सामने आया है कि निर्माण कार्य के दौरान पत्थर कम डाले गए, जिसमें विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत रही। इस संबंध में शिकायत जिला प्रशासन को की गई थी। डीसी ने मामले की जांच एसडीएम सोनीपत निशांत यादव को सौंपी थी। एसडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर वीरवार को विभाग के छह अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया।
जुलाई माह में बाढ़ सुरक्षा कार्यों के तहत सिंचाई विभाग ने टिकोला घाट पर ठोकरों का निर्माण कार्य कराया था। निर्माण कंपनी एमएम कंस्ट्रक्शन को इसका ठेका दिया गया था। बाद में निर्माण कार्य में शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप किया और एसडीएम निशांत कुमार यादव ने मामले की जांच की। कहां पत्थर डाले गए और कहां रेत से ही काम चलाया गया है, सभी की रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्ट में पाया गया कि ठेकेदार ने जानबूझकर अधिकारियों की शह पर यह काम किया गया था। एसडीएम निशांत यादव ने टीम के साथ मौके पर जाकर ठोकरों के निर्माण में लगे पत्थरों की जांच की। पत्थरों के बीच मिले छेद के अनुसार इसमें भरी गई रेत का आकलन किया गया है। इसके अलावा जांच में उन्होंने तकनीकी जानकारों की सलाह के बाद रिपोर्ट तैयार की। एसडीएम ने जांच पूरी कर रिपोर्ट डीसी को सौंपी थी। इसमें उन्होंने धर्मकांटे पर पत्थर तौलाई से लेकर ठोकरों के निर्माण तक का ब्योरा देते हुए विभाग के कई अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
ये था मामला
टिकोला घाट पर ठोकरों के निर्माण के लिए सिंचाई विभाग ने एक एजेंसी को करीब एक करोड़ रुपये का टेंडर दिया था। नियम अनुसार यहां पर 65 सौ क्यूबिक मीटर यानी 65 सौ क्यूम पत्थर डाला जाना था। जब ठेकेदार ने ठोकर का निर्माण कार्य पूरा कर दिया तो विभाग के अधिकारियों ने इसकी पैमाइश की। पहली पैमाइश में 62 सौ क्यूम पत्थर मिला। दूसरी जांच में 49 क्यूम पत्थर मिला। हैरानी यह रही कि तीसरी पैमाइश में केवल 39 सौ क्यूम पत्थर मिला। इसमें विभाग के एक जूनियर इंजीनियर्स ने आरोप लगाया था कि जिस अधिकारी की लापरवाही इस मामले में सबसे ज्यादा थी, उसे ही जांच अधिकारी बना दिया गया था। एक आरोपी खुद अपनी जांच कैसे कर सकता है। दो जेई को चार्जशीट कराने को भी लिख दिया था। इसके बाद अधिकारियों ने समझौते का प्रयास करना उचित समझा। लेकिन डीसी ने एसडीएम को जांच आदेश दे दिए थे।
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इन अधिकारियों को किया गया सस्पेंड
एसडीएम निशांत यादव की रिपोर्ट के बाद डीसी केएम पांडुरंग द्वारा सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों के पास भेजी गई रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए वीरवार को सिंचाई विभाग के एक्सईएन कमलकांत राणा, एसडीओ भूपसिंह, सूरत सैनी, आशीष कौशिक व जेई विजय और जितेंद्र को सस्पेंड कर दिया गया है।
टिकोला घाट पर सिंचाई विभाग द्वारा डाले गए पत्थरों में गड़बड़ी के मामले की जांच उन्हें सौंपी गई थी। इसके तहत सिंचाई विभाग के छह अधिकारियों की कमी पाई गई। इन पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार कर डीसी को सौंपी गई थी, जिसके तहत विभाग के उच्चाधिकारियों ने यह कार्रवाई की है।
निशांत यादव, एसडीएम, सोनीपत
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जुलाई माह में बाढ़ सुरक्षा कार्यों के तहत सिंचाई विभाग ने टिकोला घाट पर ठोकरों का निर्माण कार्य कराया था। निर्माण कंपनी एमएम कंस्ट्रक्शन को इसका ठेका दिया गया था। बाद में निर्माण कार्य में शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप किया और एसडीएम निशांत कुमार यादव ने मामले की जांच की। कहां पत्थर डाले गए और कहां रेत से ही काम चलाया गया है, सभी की रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्ट में पाया गया कि ठेकेदार ने जानबूझकर अधिकारियों की शह पर यह काम किया गया था। एसडीएम निशांत यादव ने टीम के साथ मौके पर जाकर ठोकरों के निर्माण में लगे पत्थरों की जांच की। पत्थरों के बीच मिले छेद के अनुसार इसमें भरी गई रेत का आकलन किया गया है। इसके अलावा जांच में उन्होंने तकनीकी जानकारों की सलाह के बाद रिपोर्ट तैयार की। एसडीएम ने जांच पूरी कर रिपोर्ट डीसी को सौंपी थी। इसमें उन्होंने धर्मकांटे पर पत्थर तौलाई से लेकर ठोकरों के निर्माण तक का ब्योरा देते हुए विभाग के कई अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
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ये था मामला
टिकोला घाट पर ठोकरों के निर्माण के लिए सिंचाई विभाग ने एक एजेंसी को करीब एक करोड़ रुपये का टेंडर दिया था। नियम अनुसार यहां पर 65 सौ क्यूबिक मीटर यानी 65 सौ क्यूम पत्थर डाला जाना था। जब ठेकेदार ने ठोकर का निर्माण कार्य पूरा कर दिया तो विभाग के अधिकारियों ने इसकी पैमाइश की। पहली पैमाइश में 62 सौ क्यूम पत्थर मिला। दूसरी जांच में 49 क्यूम पत्थर मिला। हैरानी यह रही कि तीसरी पैमाइश में केवल 39 सौ क्यूम पत्थर मिला। इसमें विभाग के एक जूनियर इंजीनियर्स ने आरोप लगाया था कि जिस अधिकारी की लापरवाही इस मामले में सबसे ज्यादा थी, उसे ही जांच अधिकारी बना दिया गया था। एक आरोपी खुद अपनी जांच कैसे कर सकता है। दो जेई को चार्जशीट कराने को भी लिख दिया था। इसके बाद अधिकारियों ने समझौते का प्रयास करना उचित समझा। लेकिन डीसी ने एसडीएम को जांच आदेश दे दिए थे।
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इन अधिकारियों को किया गया सस्पेंड
एसडीएम निशांत यादव की रिपोर्ट के बाद डीसी केएम पांडुरंग द्वारा सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों के पास भेजी गई रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए वीरवार को सिंचाई विभाग के एक्सईएन कमलकांत राणा, एसडीओ भूपसिंह, सूरत सैनी, आशीष कौशिक व जेई विजय और जितेंद्र को सस्पेंड कर दिया गया है।
टिकोला घाट पर सिंचाई विभाग द्वारा डाले गए पत्थरों में गड़बड़ी के मामले की जांच उन्हें सौंपी गई थी। इसके तहत सिंचाई विभाग के छह अधिकारियों की कमी पाई गई। इन पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार कर डीसी को सौंपी गई थी, जिसके तहत विभाग के उच्चाधिकारियों ने यह कार्रवाई की है।
निशांत यादव, एसडीएम, सोनीपत