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बच्चों के अंगुली पकड़कर चलने से पहले ही कोरोना ने छीना पिता
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कोरोना महामारी ने काफी परिवारों को ऐसा दुख दिया है कि उनसे अपनों को छीनने के साथ ही पूरे परिवार के सामने रोटी तक का संकट खड़ा हो गया है। कोरोना काल में दातौली गांव के एक परिवार पर दुख का पहाड़ टूट गया है। जहां बच्चों के अंगुली पकड़कर चलने से पहले ही पिता की मौत हो गई। अब परिवार में गुजारा करने वाला भी कोई नहीं बचा है। घर में पत्नी व बुजुर्ग मां के साथ ही छोटे बच्चे हैं। अब उनको सरकार से आस है, जिससे परिवार का गुजारा हो सके और बच्चे आगे पढ़ाई भी कर सके।
दातौली गांव में राजू (32) परचून की दुकान करता था और उसके सहारे ही परिवार का गुजारा करता था। राजू को मई के शुरूआत में कोरोना हुआ। उसकी हालत शुरुआत में सामान्य रही, लेकिन बाद में अचानक तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई। परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। राजू की दस मई को कोरोना के कारण मौत हो गई। राजू की मौत के बाद परिवार में पत्नी पूजा और उसके एक वर्ष की बेटी परी व तीन वर्ष का बेटा अनमोल के अलावा राजू की बुजुर्ग मां भी साथ ही रहती है। इस तरह से परिवार में अब कमाने वाला कोई नहीं बचा है, जिससे परिवार को दो वक्त की रोटी भी मिल सके। पूजा ने बताया कि उनके पास दुकान भी अपनी नहीं थी, बल्कि उसके पति ने किराये पर लेकर की हुई थी। अब उनके सामने रोटी तक का संकट खड़ा हो गया है। वहीं बच्चे छोटे होने के कारण अभी अपने पिता की अंगुली तक नहीं पकड़ी थी और उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। पूजा कहती है कि सरकार से आर्थिक मदद की उम्मीद है और सरकार से मदद मिलती है तो परिवार का गुजारा हो सकता है।
पति की मौत के बाद पत्नी के सहारे बच्चे, मायके लेकर जाना पड़ा
दातौली गांव में ऐसा एक ओर परिवार है, जिससे कोरोना ने परिवार का गुजारा करने वाला ही छीन लिया। गांव में सुरेंद्र (35) की कोरोना से पिछले दिनों मौत हो गई। सुरेंद्र के बाद परिवार का गुजारा करने वाला कोई नहीं बचा, जबकि परिवार में पत्नी पूनम के अलावा 13 वर्षीय बेटी प्रिया व 10 वर्षीय बेटा मयंक है। उनकी पढ़ाई से लेकर रोटी तक के लिए जूझना पड़ रहा है। पूनम फिलहाल बच्चों को लेकर मायके चली गई है। सरकार से उनको भी मदद की उम्मीद है, जिससे बच्चों की बेहतर पढ़ाई हो सके।
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दातौली गांव में राजू (32) परचून की दुकान करता था और उसके सहारे ही परिवार का गुजारा करता था। राजू को मई के शुरूआत में कोरोना हुआ। उसकी हालत शुरुआत में सामान्य रही, लेकिन बाद में अचानक तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई। परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। राजू की दस मई को कोरोना के कारण मौत हो गई। राजू की मौत के बाद परिवार में पत्नी पूजा और उसके एक वर्ष की बेटी परी व तीन वर्ष का बेटा अनमोल के अलावा राजू की बुजुर्ग मां भी साथ ही रहती है। इस तरह से परिवार में अब कमाने वाला कोई नहीं बचा है, जिससे परिवार को दो वक्त की रोटी भी मिल सके। पूजा ने बताया कि उनके पास दुकान भी अपनी नहीं थी, बल्कि उसके पति ने किराये पर लेकर की हुई थी। अब उनके सामने रोटी तक का संकट खड़ा हो गया है। वहीं बच्चे छोटे होने के कारण अभी अपने पिता की अंगुली तक नहीं पकड़ी थी और उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। पूजा कहती है कि सरकार से आर्थिक मदद की उम्मीद है और सरकार से मदद मिलती है तो परिवार का गुजारा हो सकता है।
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पति की मौत के बाद पत्नी के सहारे बच्चे, मायके लेकर जाना पड़ा
दातौली गांव में ऐसा एक ओर परिवार है, जिससे कोरोना ने परिवार का गुजारा करने वाला ही छीन लिया। गांव में सुरेंद्र (35) की कोरोना से पिछले दिनों मौत हो गई। सुरेंद्र के बाद परिवार का गुजारा करने वाला कोई नहीं बचा, जबकि परिवार में पत्नी पूनम के अलावा 13 वर्षीय बेटी प्रिया व 10 वर्षीय बेटा मयंक है। उनकी पढ़ाई से लेकर रोटी तक के लिए जूझना पड़ रहा है। पूनम फिलहाल बच्चों को लेकर मायके चली गई है। सरकार से उनको भी मदद की उम्मीद है, जिससे बच्चों की बेहतर पढ़ाई हो सके।
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