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सिविल सर्जन और उप सिविल सर्जन ने एक-एक टीबी मरीज को गोद लिया

Sat, 10 Sep 2022 01:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 10 Sep 2022 01:09 AM IST
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Civil Surgeon and Deputy Civil Surgeon adopted one TB patient each
देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाने की पहल तेज कर दी गई है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ ‘निक्षय कार्यक्रम फेज-2’ के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली से किया।
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टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की सफलता के लिए कम्युनिटी सपोर्ट कैंपेन की शुरुआत हुई है। जिसके तहत टीबी मरीजों को पूर्ण उपचार के लिए गोद लिया जाएगा। मरीजों को गोद लेने के लिए निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण करके स्वयंसेवी संगठन, बड़ी इकाइयां व कोई भी व्यक्ति मदद कर सकते हैं। कार्यक्रम के शुभारंभ पर सिविल सर्जन डॉ. जयकिशोर व उप सिविल सर्जन डॉ. तरुण यादव ने टीबी के एक-एक मरीज को गोद लिया। उन्होंने मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की जिम्मेदारी ली है। साथ ही उपायुक्त ललित सिवाच व अतिरिक्त उपायुक्त अंकिता चौधरी ने भी एक-एक मरीज गोद लेने की बात कही है।
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वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सरकार ने वर्ष 2025 तक पूरे देश को टीबीमुक्त करने का लक्ष्य रखा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से टोल फ्री नंबर 180011-6666 पर कोई भी व्यक्ति टीबी से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकता है। वर्ष 2025 तक टीबी को समाप्त करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामाजिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जो सभी लोगों को जन आंदोलन में एक साथ लाए। उन्होंने बेहतर पोषण, स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के साथ ही बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने के लिए प्रयास करने का आह्वान किया।
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वर्चुअल कार्यक्रम के बाद उपायुक्त ने कहा कि टीबी को समाप्त करने के लक्ष्य के बारे में पहले ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। सभी विभाग अपने-अपने स्तर पर टीबी की जागरूकता के लिए प्रयास करें। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के अनुसार देश में हर साल 10 लाख से ज्यादा महिलाएं व लड़कियां और 3 लाख से ज्यादा बच्चे टीबी के शिकार हो रहे हैं। गर्भावस्था के दौरान भ्रूण और प्रसव के बाद शिशुओं पर प्रतिकूल प्रभाव के साथ ही महिलाओं में टीबी बीमारी के जोखिम से समस्या बढ़ जाती है।

सिविल सर्जन डॉ. जयकिशोर ने बताया कि दो सप्ताह से ज्यादा खांसी, रात के समय में बुखार आना, बलगम में खून आना, वजन का कम होना व रात को सोते समय पसीना आना आदि लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी जांच केंद्र में अपनी टीबी की जांच करवानी चाहिए। टीबी से पीड़ित मिलने पर मरीज को सरकार की ओर से मुफ्त दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती है। अधिसूचित रोगी का जब तक उपचार चलता है, तब तक प्रतिमाह 500 रुपये वित्तीय सहायता प्रोत्साहन राशि निक्षय पोषण योजना के तहत सीधे मरीज के खाते में भेजी जाती है। समय-समय पर चलाए जाने वाले एक्टिव केस फाइंडिंग कार्यक्रम में स्लम एरिया, हाई रिस्क एरिया और पहले से संभावित क्षेत्रों में टीबी के संदिग्ध मरीजों की जांच की जाती है। एक्टिव केस फाइंडिंग कार्यक्रम के तहत प्रत्येक गांव में आशा वर्कर द्वारा टीबी के संभावित मरीजों के नमूने लिए जाते हैं। इस दौरान अतिरिक्त उपायुक्त अंकिता चौधरी, उप सिविल सर्जन डॉ. तरुण यादव समेत अन्य चिकित्सक भी मौजूद रहे।
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