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सिविल अस्पताल को मिलेगा मेडिकल कॉलेज का दर्जा

Thu, 24 Dec 2015 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत Updated Thu, 24 Dec 2015 12:20 AM IST
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civil hospital upgrade to medical college
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे सोनीपत शहर के सिविल अस्पताल में जल्द ही इलाज के साथ पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। अगर साधारण शब्दों में कहा जाए तो सरकार इसे मेडिकल कॉलेज का दर्जा दे सकती है। यह इशारा स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके महापात्र ने अस्पताल का दौरा करते हुए कही। उन्होंने नागरिक अस्पताल को अपग्रेड करने और उसे आधुनिकी बनाने के प्रयासों की जानकारी देने के साथ ही इस संबंध में स्थानीय अधिकारियों को प्रस्ताव बनाकर देने को कहा है। उन्होंने कहा कि अस्पताल को नया लुक देने के लिए नई बिल्डिंग तैयार की जाए। इस तरह का प्रस्ताव बनाकर दिया जाए कि अलग-अलग चरणों में बिल्डिंग का निर्माण हो सके। ट्रामा सेंटर के लिए भेजे गए प्रस्ताव के बारे में बताते हुए कहा कि नेशनल हाईवे पर ट्रामा सेंटर के लिए जमीन देखी गई, जिसका प्रस्ताव बनाकर प्रदेश सरकार के पास भेजा जा चुका है। इस पर प्रदेश सरकार द्वारा निर्णय लिया जाना है। उम्मीद है कि प्रदेश सरकार इस योजना को शीघ्र ही अमलीजामा पहनाएगी। सिविल अस्पताल मेें अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बुधवार को डॉक्टरों व डीसी राजीव रतन के साथ दौरा किया। सबसे पहले वह आपातकालीन वार्ड में पहुंचे। जहां उन्होंने टीबी के विज्ञापन को देखकर सिविल सर्जन से टीबी से संबंधित जानकारी ली। जिस पर सिविल सर्जन ने बताया कि प्रतिवर्ष टीबी के करीब 700-800 मरीज अस्पताल में आते है। जिनको फिलहाल कंट्रोल मेें किया गया है। उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय में डीसी राजीव रतन और एसपी अभिषेक गर्ग के साथ डॉक्टरों की मीटिंग भी ली।  
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पीएमआर और एमएलआर रिपोर्ट के लिए कंप्यूटर में नया सॉफ्टवेयर अपलोड करने को कहा
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने आपातकालीन वार्ड में कंप्यूटर पर दर्ज की जा रही पीएमआर और एमएलआर रिपोर्ट के बारे में जानकारी ली। दोनों रिपोर्ट को ऑनलाइन करने के दौरान खामियां आ रही थीं। इनको दूर कराने के लिए डीसी राजीव रतन को निर्देश दिए गए हैं कि पीएमआर व एमएलआर रिपोर्ट को तेजी से ऑनलाइन कराने के लिए वे जल्द ही कंप्यूटर में नया सॉफ्टवेयर अपलोड करने का प्रयास करें।
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घटना के बार इमरजेंसी में बुलाए जाए स्पेशल डॉक्टर
सिविल अस्पताल से रेफर मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा होती है। अस्पताल में घायल मरीज को चेक करने के लिए स्पेशल डॉक्टर बुलाया जाए। उन्होंने कहा कि मरीज को जिस तरह की चोट लगी है, अगर अस्पताल में उसी बीमारी से संबंधित डॉक्टर होगा तो इलाज तुरंत हो सकेगा। जरूरत पर ऑपरेशन भी किया जा सकता है। इससे रेफरों की संख्या मेें कमी आएगी।
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स्टाफ नर्स के कमरों में भी लगाए जाएं सीसीटीवी कैमरे
आपातकालीन वार्ड की स्टाफ नर्स की कार्रवाई को कैद करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। ताकि सिविल अस्पताल में मरीजों को समय पर उपचार मिल सके और मरीज निजी अस्पताल में जल्द से न जा सके।

ब्लड बैंक में जानी रक्त की जानकारी
आपातकालीन वार्ड के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके महापात्रा ब्लड बैंक पहुंचे। जहां पर उन्होंने बताया कि वर्ष 1996 में सोनीपत में हुए आतंकी हमले में घायल लोगों को रक्त चढ़ाने के लिए अस्पताल में खून की कमी पड़ गई थी। जिसके चलते रोहतक पीजीआई से रक्त मंगाना पड़ा था। उस समय वह सोनीपत के डीसी थे। उन्होंने निर्देश दिए कि ब्लड बैंक में रक्त की कमी न पड़े, इसके लिए समय-समय पर शिविर लगाते रहें।

अस्पताल के अंदर लगाए जाए डिस्प्ले बोर्ड
अस्पताल में ओपीडी का वातावरण बहुत ही अच्छा है। इस संदर्भ में अस्पताल मेें आने वाले मरीजों की सुविधा के लिए ओपीडी लगाने के निर्देश दिए गए।

बेड की संख्या बढ़ाई जाए
प्रसूति वार्ड का दौरा करते समय अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बेडों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। अस्पताल में वर्तमान में बेड की संख्या 150 है। जिसे 300 बेड तक किया जा सकता है। चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि पहले ही इसे 200 बेड करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा है।


समस्या आने पर मेल से भेजे शिकायत
अच्छी फीडबैक लेने के लिए कोई भी कर्मचारी, अधिकारी विभाग को मेल भेजकर समस्या को अवगत करवा सकता है। जिसकी तुरंत समस्या का समाधान किया जा सकता है।
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