{"_id":"6ace9821f3569de5e90caf12","slug":"centre-of-excellence-for-pulse-protein-to-be-set-up-at-niftem-sonipat-news-c-197-1-snp1001-162318-2026-10-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: निफ्टम में बनेगा दलहन प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: निफ्टम में बनेगा दलहन प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र
Wed, 14 Oct 2026 02:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 14 Oct 2026 02:14 AM IST
विज्ञापन
सोनीपत के कुंडली स्थित निफ्टम संस्थान में आयोजित सम्मेलन के दौरान कनाडा के सस्केचेवान प्रांत क
सोनीपत। राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टम) कुंडली में भारत और कनाडा मिलकर दलहन प्रोटीन के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देंगे। संस्थान में एक वर्ष के भीतर भारत-कनाडा दलहन प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह केंद्र दलहन से प्रोटीन निकालने, खाद्य उत्पादों में उसके उपयोग करने पर ध्यान देगा। निफ्टम में मंगलवार को दलहन प्रोटीन में नवाचार, मूल्य संवर्धन और रणनीतिक साझेदारी विषय पर भारत-कनाडा सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें दोनों देशों के सरकारी प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग संगठनों ने भाग लिया।
सम्मेलन में दलहन आधारित खाद्य पदार्थों, खाद्य प्रसंस्करण, पोषण और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के विकास में आपसी सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। निफ्टम के निदेशक हरिंदर सिंह ओबरॉय ने कहा कि निफ्टम और कनाडा की सस्केचेवान यूनिवर्सिटी के बीच हुए समझौते को अब आगे बढ़ाने का समय है। शुरुआती दो वर्षों के लिए अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों पर सहमति बनाना जरूरी है। इनमें दलहन से प्रोटीन निकालने, प्रसंस्करण, पोषक खाद्य उत्पादों का विकास और संयुक्त अनुसंधान शामिल हैं।
विज्ञापन
सम्मेलन में दलहन आधारित खाद्य पदार्थों, खाद्य प्रसंस्करण, पोषण और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के विकास में आपसी सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। निफ्टम के निदेशक हरिंदर सिंह ओबरॉय ने कहा कि निफ्टम और कनाडा की सस्केचेवान यूनिवर्सिटी के बीच हुए समझौते को अब आगे बढ़ाने का समय है। शुरुआती दो वर्षों के लिए अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों पर सहमति बनाना जरूरी है। इनमें दलहन से प्रोटीन निकालने, प्रसंस्करण, पोषक खाद्य उत्पादों का विकास और संयुक्त अनुसंधान शामिल हैं।
विज्ञापन