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फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने वाले बर्खास्त चीनी मिल कर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज
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चौधरी देवीलाल सहकारी चीनी मिल आहुलाना में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले कर्मी के खिलाफ बरोदा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। धोखाधड़ी का यह मामला जब उजागर हुआ तो आरोपी कर्मी सहकारी चीनी मिल सोनीपत में कार्यरत था। उस पर नौकरी पाने के लिए जाली अनुभव प्रमाणपत्र देने का आरोप है। सोनीपत मिल के कार्यकारी कार्यालय अधीक्षक विनय मलिक की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी को पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है।
चौधरी देवीलाल सहकारी चीनी मिल आहुलाना में अप्रैल 2003 में सल्फर फरनेट अटेंडेंट ( मौसमी स्थायी) पद के लिए आवेदन मांगा गया था। आर्य नगर सोनीपत के सुनील कुमार की इस पद पर नियुक्ति हुई थी। आहुलाना मिल से सुनील कुमार 2016 में सहकारी चीनी मिल सोनीपत में गन्ना लिपिक सीजनल के पद पर तबादला किया गया था। मिल प्रबंधन ने गन्ना विभाग से उसका दूसरे विभाग में तबादला किया गया था लेकिन उसने पद ग्रहण नहीं किया। मिल प्रबंधन की तरफ से उससे पत्राचार किया गया लेकिन वह नियुक्ति को नहीं पहुंचे। अधिकारियों को उनकी नियुक्ति को लेकर शक हुआ। इसके बाद अधिकारियों ने उनके रिकॉर्ड की जांच करवाई। जांच में सामने आया कि सुनील ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। सुनील कुमार ने सराय चीनी मिल लिमिटेड सरदार नगर जिला गोरखपुर, यूपी का पांच वर्ष का सल्फर फरनेस अटेंडेंट का अनुभव प्रमाणपत्र दिया था। प्रमाण पत्र में अनुभव 10 फरवरी 1994 से 20 अप्रैल 1999 तक की अवधि दर्शाई गई थी। अनुभव प्रमाण पत्र में दर्शाई गई तिथि अनुसार फरवरी 1994 में सुनील की आयु 14 साल 10 महीने थी। उस समय तक सुनील ने दसवीं कक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी। जांच अधिकारियों ने संबंधित मिल से अनुभव के बारे में जानकारी जुटाई तो वहां से जवाब मिला कि उस अवधि में सुनील नाम का कोई कर्मचारी कार्यरत नहीं था। इस पर अधिकारियों ने सुनील कुमार को बर्खास्त कर दिया था। अब सोनीपत मिल के कार्यकारी कार्यालय अधीक्षक विनय मलिक की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। मिल प्रशासन को उससे वेतन और अन्य भत्तों के करीब 22 लाख रुपये वसूल करने की मांग की है। आहुलाना चीनी मिल भी उससे रिकवरी की तैयारी कर रहा है।
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चौधरी देवीलाल सहकारी चीनी मिल आहुलाना में अप्रैल 2003 में सल्फर फरनेट अटेंडेंट ( मौसमी स्थायी) पद के लिए आवेदन मांगा गया था। आर्य नगर सोनीपत के सुनील कुमार की इस पद पर नियुक्ति हुई थी। आहुलाना मिल से सुनील कुमार 2016 में सहकारी चीनी मिल सोनीपत में गन्ना लिपिक सीजनल के पद पर तबादला किया गया था। मिल प्रबंधन ने गन्ना विभाग से उसका दूसरे विभाग में तबादला किया गया था लेकिन उसने पद ग्रहण नहीं किया। मिल प्रबंधन की तरफ से उससे पत्राचार किया गया लेकिन वह नियुक्ति को नहीं पहुंचे। अधिकारियों को उनकी नियुक्ति को लेकर शक हुआ। इसके बाद अधिकारियों ने उनके रिकॉर्ड की जांच करवाई। जांच में सामने आया कि सुनील ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। सुनील कुमार ने सराय चीनी मिल लिमिटेड सरदार नगर जिला गोरखपुर, यूपी का पांच वर्ष का सल्फर फरनेस अटेंडेंट का अनुभव प्रमाणपत्र दिया था। प्रमाण पत्र में अनुभव 10 फरवरी 1994 से 20 अप्रैल 1999 तक की अवधि दर्शाई गई थी। अनुभव प्रमाण पत्र में दर्शाई गई तिथि अनुसार फरवरी 1994 में सुनील की आयु 14 साल 10 महीने थी। उस समय तक सुनील ने दसवीं कक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी। जांच अधिकारियों ने संबंधित मिल से अनुभव के बारे में जानकारी जुटाई तो वहां से जवाब मिला कि उस अवधि में सुनील नाम का कोई कर्मचारी कार्यरत नहीं था। इस पर अधिकारियों ने सुनील कुमार को बर्खास्त कर दिया था। अब सोनीपत मिल के कार्यकारी कार्यालय अधीक्षक विनय मलिक की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। मिल प्रशासन को उससे वेतन और अन्य भत्तों के करीब 22 लाख रुपये वसूल करने की मांग की है। आहुलाना चीनी मिल भी उससे रिकवरी की तैयारी कर रहा है।
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