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पशुपालन विभाग के उपनिदेशक ने फर्जी प्रमाणपत्र से यूनिवर्सिटी में लिया दाखिला, डिग्री मिलने के 29 साल बाद मुकदमा दर्ज
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सोनीपत। जिलास्तर पर पशुपालन विभाग के उपनिदेशक रहे डॉ. जसवंत सिंह पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर हिसार की यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने का आरोप लगा है। डिग्री मिलने के 29 साल बाद अब उनपर सिटी थाना में मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमा उनके विभाग की महिला चिकित्सक की शिकायत पर दर्ज हुआ है। उन्होंने अपनी शिकायत एडीजीपी सीआईडी को दी थी। जिस पर सीआईडी व सीएम फ्लाइंग की टीम ने जांच कर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। अब सिटी थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के तत्कालीन रजिस्ट्रार की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
पशुपालन विभाग की महिला चिकित्सक डॉ. रितू ने एडीजीपी सीआईडी को भेजी शिकायत में आरोप लगाया कि उनके विभाग के उप निदेशक डॉ. जसवंत सिंह दहिया ने सामान्य जाति से होते हुए धोखाधड़ी कर फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आरटीआई में इसका खुलासा हुआ है। उन्होंने बताया कि बीवीएससी एएच (पशु चिकित्सक) की डिग्री लेने के लिए सामान्य श्रेणी के छात्र को 12वीं में 50 फीसदी अंक होने चाहिए। जबकि डॉॅ. जसवंत के अंक कम थे। जिस पर उन्होंने जून, 1986 में फर्जी कागजात देकर फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनवा लिया। जिसके आधार पर उन्होंने दाखिला ले लिया था। उन्होंने 1991 में डिग्री प्राप्त कर ली थी। उसके बाद में 1993 में एमवीएससी की डिग्री भी ले ली। उनके खिलाफ 1996 में एक शिकायत दी गई थी। जिस पर रजिस्ट्रार कार्यालय के स्टाफ ने मिलीभगत कर उनका बचाव कर दिया था। महिला चिकित्सक ने आरोप लगाया कि मामले की जांच की जाए। अगर सामान्य श्रेणी के होते हुए अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र से डिग्री कर नौकरी पाई है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। जिस पर सीआईडी व सीएम फ्लाइंग ने जांच कर मुकदमा दर्ज करने के लिए सिटी थाना पुलिस को भेज दिया। अब पुलिस ने मामले में डॉ.जसंवत के खिलाफ भादसं की धारा 120बी, 201, 420, 467, 468 व 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
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सीएम फ्लाइंग ने मामले की जांच कर उनके पास भेजा है। जिस पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की गहनता से जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ.रवींद्र कुमार, डीएसपी सोनीपत।
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पशुपालन विभाग की महिला चिकित्सक डॉ. रितू ने एडीजीपी सीआईडी को भेजी शिकायत में आरोप लगाया कि उनके विभाग के उप निदेशक डॉ. जसवंत सिंह दहिया ने सामान्य जाति से होते हुए धोखाधड़ी कर फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आरटीआई में इसका खुलासा हुआ है। उन्होंने बताया कि बीवीएससी एएच (पशु चिकित्सक) की डिग्री लेने के लिए सामान्य श्रेणी के छात्र को 12वीं में 50 फीसदी अंक होने चाहिए। जबकि डॉॅ. जसवंत के अंक कम थे। जिस पर उन्होंने जून, 1986 में फर्जी कागजात देकर फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनवा लिया। जिसके आधार पर उन्होंने दाखिला ले लिया था। उन्होंने 1991 में डिग्री प्राप्त कर ली थी। उसके बाद में 1993 में एमवीएससी की डिग्री भी ले ली। उनके खिलाफ 1996 में एक शिकायत दी गई थी। जिस पर रजिस्ट्रार कार्यालय के स्टाफ ने मिलीभगत कर उनका बचाव कर दिया था। महिला चिकित्सक ने आरोप लगाया कि मामले की जांच की जाए। अगर सामान्य श्रेणी के होते हुए अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र से डिग्री कर नौकरी पाई है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। जिस पर सीआईडी व सीएम फ्लाइंग ने जांच कर मुकदमा दर्ज करने के लिए सिटी थाना पुलिस को भेज दिया। अब पुलिस ने मामले में डॉ.जसंवत के खिलाफ भादसं की धारा 120बी, 201, 420, 467, 468 व 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
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सीएम फ्लाइंग ने मामले की जांच कर उनके पास भेजा है। जिस पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की गहनता से जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ.रवींद्र कुमार, डीएसपी सोनीपत।