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Sonipat News: हरियाणवी डाइट के मुरीद कश्मीरी युवा बोले-मौका मिले तो बार-बार आएंगे
Mon, 16 Feb 2026 01:38 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 16 Feb 2026 01:38 AM IST
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अब्दुल लतीफ बट्ट, अनंतनाग
सोनीपत। सृष्टि का अटल नियम है कि जिंदगीभर सीखते रहना और सीखे हुए को दूसरों को सिखा जाना। इसी आस को मन में संजोकर 120 कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में सोनीपत आए व लौट गए। छह दिन की यात्रा में उनको सबसे अधिक पसंद हरियाणवी डाइट आई और कहा कि उनको मौका मिला तो बार-बार आएंगे। उन्होंने यहां बहुत कुछ सीखा और बहुत कुछ सिखा भी गए। सारिक गनी लोन, अब्दुल लतीफ बट्ट, तुफैल अहमद, तज्जमुल बशीर, तंजिला अली, खालिद अज़ीज, आसमा इम्तियाज हरियाणवी संस्कृति के बारे में यहां आने से पहले क्या सोचते थे? अब इनका क्या मानना है? आइए जानें...
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जब हम यहां आए तो थोड़ी नर्वसनेस थी। जहां जा रहे हैं, पता नहीं कैसे लोग हैं वहां के। कैसा खान-पान होगा और कैसा व्यवहार होगा। लेकिन यहां हमारी सोच एकदम बदल गई। लग रहा है-हम अपने घर में हैं। कश्मीर में एक-दूसरे जिले में तो बहुत बार सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिला। लेकिन अपने राज्य से बाहर पहली बार आना हुआ है। यहां देखा कि देश की सरकार कितना विकास कर रही है। आर्टिकल 370 के निष्क्रिय होने के बाद वैसे भी बहुत कुछ बदला है। इंडस्ट्री लग रही हैं। कल्चरल प्रोग्राम के जरिये अब हमें ऐसे लोगों के साथ जोड़ा है जिनके बारे में हम कभी सोच भी नहीं सकते थे। छह दिन में हमने यहां एसआरएम यूनिवर्सिटी, स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया, वुमैन कॉलेज में जाकर बहुत ही अच्छा लगा। हरियाणवी डांस, हलवा-पूरी और चूरमा मुझे और मेरे साथियों को बहुत पसंद आया।
- अब्दुल लतीफ बट्ट, अनंतनाग
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कश्मीर से बाहर पहली बार निकलने का मौका मिला है। लाजमी पहलू है कि जब आप अपनी दहलीज लांघकर किसी दूसरी जगह जाते हैं तो जेहन में बहुत सारे ख्यालात आते हैं। हम बहुत डरते थे, लेकिन यहां आकर लगा कि गलत सोचते थे। यहां भी हमारे जैसे लोग रहते हैं, हमारी तरह ही बोलते हैं। हमने यहां रेल कोच फैक्टरी भी देखी, कॉलेज का ऑडिटोरियम भी शायद ऐसा कहीं हो। बाजार भी घूमे। बहुत अच्छा लगा। हमें इस टूर के दौरान हरियाणा में बहुत अपनापन महसूस हुआ। अल्लाह मौका बख्शें, हम यहां बार-बार आना चाहेंगे। - तज्जमुल बशीर, अनंतनाग
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हम वुमैन कॉलेज गए थे। वहां हरियाणवी डांस देखा पहनावा बहुत भाया। एकदम वैसा ही, जैसा औरतें पहनती हैं। हमारे वहां से यहां की ड्रेस बहुत अलग है, लेकिन अच्छी लगी। बहुत सारी चीजें, हमारे वहां भी ऐसी हैं। हालांकि यहां का खान-पान बहुत अलग लगा। हम ब्रेकफास्ट में सिर्फ नमक वाली चाय और रोटी लेते हैं, लेकिन यहां ब्रेकफास्ट में बहुत सारी चीजें लोग लेते हैं। यहां की मेहमान नवाजी हमें बहुत पसंद आई। डेवलपमेंट मामले में यहां की इंडस्ट्री बहुत वास्ट है। हमारे कश्मीर में इतना नहीं है। हालांकि बुनकर उद्योग वहां अच्छा-खासा फल-फूल रहा है। जैसे यहां कारपेट वीविंग की जो तकनीक है, वैसा ही कश्मीर में भी जरूर होना चाहिए। - तंजिजा अली, अनंतनाग
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यहां का हर व्यक्ति और यहां की खातिरदारी हमें बहुत पसंद आई। बिलकुल हमारी तरह। जैसे हम वहां मिल-जुल के रहते हैं, वैसे ही यहां आकर हमने कुछ भी मिस नहीं किया। पांच दिन कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। हम कल ही सर से बात कर रहे थे कि कम से कम दो दिन और रुकने का मौका मिलता तो अच्छा रहता। आज शाम को हम निकल रहे हैं। यहां का कल्चर मुझे पहले से ही बहुत पसंद है। घर पे हम चावल खाते हैं लेकिन यहां आकर मैंने चावल को अवाइड किया। हम लोग वहां नाश्ते में नमकीन चाय और रोटी लेते हैं। एकदम हल्का, लेकिन यहां हैवी डाइट लोग लेते हैं। हमने भी लिया। पालक-पनीर, हलवा-पूरी और चूरमा वगैरह हर चीज टेस्टी थी। - खुशबू मुश्ताक, श्रीनगर
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जम्मू-कश्मीर की जो पहचान बाकी स्टेट्स में बनाई जा रही है, वो कतई सही नहीं है। पूरा भारत एक है। हम सब भारतवासी हैं। हमें मिलकर रहना चाहिए। यहां का स्टाफ, जहां-जहां हम घूमने गए वहां जिस शख्स से मिले सबका व्यवहार बहुत अच्छा रहा। मन करता है कि फिर एक बार हरियाणा आने का मौका मिले।
- खालिद अजीज, बारामूला
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मैं एक डिस्ट्रक्ट एनएसएस टीम लीडर हूं। मैं और मेरे साथी पहली बार अपने प्रांत से बाहर आए हैं। सोनीपत में बहुत प्यार मिला। यहां से प्यार का पैगाम लेकर जा रहे हैं। यहां के लोग अमन पसंद हैं। इनकी यादें सदा बनी रहेंगी। सोनीपत में बहुत कुछ सीखने व समझने को मिला, जिन्हें हम अपने जेहन में संजोकर ले जा रहे हैं।
- सारिक गनी लोन, कुपवाड़ा
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जब हम यहां आए तो थोड़ी नर्वसनेस थी। जहां जा रहे हैं, पता नहीं कैसे लोग हैं वहां के। कैसा खान-पान होगा और कैसा व्यवहार होगा। लेकिन यहां हमारी सोच एकदम बदल गई। लग रहा है-हम अपने घर में हैं। कश्मीर में एक-दूसरे जिले में तो बहुत बार सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिला। लेकिन अपने राज्य से बाहर पहली बार आना हुआ है। यहां देखा कि देश की सरकार कितना विकास कर रही है। आर्टिकल 370 के निष्क्रिय होने के बाद वैसे भी बहुत कुछ बदला है। इंडस्ट्री लग रही हैं। कल्चरल प्रोग्राम के जरिये अब हमें ऐसे लोगों के साथ जोड़ा है जिनके बारे में हम कभी सोच भी नहीं सकते थे। छह दिन में हमने यहां एसआरएम यूनिवर्सिटी, स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया, वुमैन कॉलेज में जाकर बहुत ही अच्छा लगा। हरियाणवी डांस, हलवा-पूरी और चूरमा मुझे और मेरे साथियों को बहुत पसंद आया।
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- अब्दुल लतीफ बट्ट, अनंतनाग
कश्मीर से बाहर पहली बार निकलने का मौका मिला है। लाजमी पहलू है कि जब आप अपनी दहलीज लांघकर किसी दूसरी जगह जाते हैं तो जेहन में बहुत सारे ख्यालात आते हैं। हम बहुत डरते थे, लेकिन यहां आकर लगा कि गलत सोचते थे। यहां भी हमारे जैसे लोग रहते हैं, हमारी तरह ही बोलते हैं। हमने यहां रेल कोच फैक्टरी भी देखी, कॉलेज का ऑडिटोरियम भी शायद ऐसा कहीं हो। बाजार भी घूमे। बहुत अच्छा लगा। हमें इस टूर के दौरान हरियाणा में बहुत अपनापन महसूस हुआ। अल्लाह मौका बख्शें, हम यहां बार-बार आना चाहेंगे। - तज्जमुल बशीर, अनंतनाग
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हम वुमैन कॉलेज गए थे। वहां हरियाणवी डांस देखा पहनावा बहुत भाया। एकदम वैसा ही, जैसा औरतें पहनती हैं। हमारे वहां से यहां की ड्रेस बहुत अलग है, लेकिन अच्छी लगी। बहुत सारी चीजें, हमारे वहां भी ऐसी हैं। हालांकि यहां का खान-पान बहुत अलग लगा। हम ब्रेकफास्ट में सिर्फ नमक वाली चाय और रोटी लेते हैं, लेकिन यहां ब्रेकफास्ट में बहुत सारी चीजें लोग लेते हैं। यहां की मेहमान नवाजी हमें बहुत पसंद आई। डेवलपमेंट मामले में यहां की इंडस्ट्री बहुत वास्ट है। हमारे कश्मीर में इतना नहीं है। हालांकि बुनकर उद्योग वहां अच्छा-खासा फल-फूल रहा है। जैसे यहां कारपेट वीविंग की जो तकनीक है, वैसा ही कश्मीर में भी जरूर होना चाहिए। - तंजिजा अली, अनंतनाग
यहां का हर व्यक्ति और यहां की खातिरदारी हमें बहुत पसंद आई। बिलकुल हमारी तरह। जैसे हम वहां मिल-जुल के रहते हैं, वैसे ही यहां आकर हमने कुछ भी मिस नहीं किया। पांच दिन कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। हम कल ही सर से बात कर रहे थे कि कम से कम दो दिन और रुकने का मौका मिलता तो अच्छा रहता। आज शाम को हम निकल रहे हैं। यहां का कल्चर मुझे पहले से ही बहुत पसंद है। घर पे हम चावल खाते हैं लेकिन यहां आकर मैंने चावल को अवाइड किया। हम लोग वहां नाश्ते में नमकीन चाय और रोटी लेते हैं। एकदम हल्का, लेकिन यहां हैवी डाइट लोग लेते हैं। हमने भी लिया। पालक-पनीर, हलवा-पूरी और चूरमा वगैरह हर चीज टेस्टी थी। - खुशबू मुश्ताक, श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर की जो पहचान बाकी स्टेट्स में बनाई जा रही है, वो कतई सही नहीं है। पूरा भारत एक है। हम सब भारतवासी हैं। हमें मिलकर रहना चाहिए। यहां का स्टाफ, जहां-जहां हम घूमने गए वहां जिस शख्स से मिले सबका व्यवहार बहुत अच्छा रहा। मन करता है कि फिर एक बार हरियाणा आने का मौका मिले।
- खालिद अजीज, बारामूला
मैं एक डिस्ट्रक्ट एनएसएस टीम लीडर हूं। मैं और मेरे साथी पहली बार अपने प्रांत से बाहर आए हैं। सोनीपत में बहुत प्यार मिला। यहां से प्यार का पैगाम लेकर जा रहे हैं। यहां के लोग अमन पसंद हैं। इनकी यादें सदा बनी रहेंगी। सोनीपत में बहुत कुछ सीखने व समझने को मिला, जिन्हें हम अपने जेहन में संजोकर ले जा रहे हैं।
- सारिक गनी लोन, कुपवाड़ा

अब्दुल लतीफ बट्ट, अनंतनाग

अब्दुल लतीफ बट्ट, अनंतनाग

अब्दुल लतीफ बट्ट, अनंतनाग

अब्दुल लतीफ बट्ट, अनंतनाग

अब्दुल लतीफ बट्ट, अनंतनाग