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Sonipat News: स्वास्थ्य सेवाओं में उभरती तकनीकों की नई संभावनाओं पर किया मंथन
Sat, 23 May 2026 08:24 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 23 May 2026 08:24 PM IST
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फोटो :: सोनीपत के राजीव गांधी एजुकेशन सिटी स्थित ट्रिपल आईटी संस्थान में आयोजित कार्यशाला में
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) सोनीपत में आयोजित पांच दिवसीय अंतर्विभागीय कार्यशाला तकनीक और स्वास्थ्य शोध के अनूठे संगम का मंच बनकर उभरी। एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मेडिकल इमेजिंग और बायोमेडिकल रिसर्च जैसे अत्याधुनिक विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
कार्यशाला में सबसे अधिक आकर्षण ईसीजी सिग्नल आधारित रियल टाइम लाइव डेमो रहा। इसमें प्रतिभागियों ने आधुनिक हेल्थ टेक्नोलॉजी के व्यावहारिक उपयोग को करीब से देखा और समझा। इस दौरान विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने स्वास्थ्य सेवाओं में उभरती तकनीकों की नई संभावनाओं पर गहन मंथन किया।
इस लाइव प्रदर्शन में प्रतिभागियों को आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों के जरिए हृदय संबंधी संकेतों की निगरानी और विश्लेषण की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से दिखाया गया। विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने इसे तकनीक और स्वास्थ्य विज्ञान के बेहतरीन समन्वय का उदाहरण बताया।
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नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से आयोजित कार्यशाला में देशभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। उद्घाटन समारोह में आशुतोष कुमार सिंह मुख्य अतिथि रहे जबकि राम विलास पचौरी और संस्थान की निदेशक मनीषा शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
एआई और हेल्थ टेक्नोलॉजी पर हुआ गहन मंथन
कार्यशाला का मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सिग्नल एवं इमेज प्रोसेसिंग और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी पर केंद्रित रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक तकनीकें किस प्रकार रोगों की शुरुआती पहचान, विश्लेषण और उपचार को अधिक प्रभावी बना रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में एआई आधारित प्रणालियों की उपयोगिता, मेडिकल डेटा विश्लेषण और स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला संयोजक मोहन बंसल तथा सह संयोजक रमेश साहा और गौरव जैन ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नवीन तकनीकी शोध और व्यावहारिक प्रयोगों से जोड़ना था ताकि वे वैश्विक स्तर की उभरती तकनीकों को समझ सकें।
बायोमेडिकल रिसर्च पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला के दौरान देश के विभिन्न संस्थानों से पहुंचे विशेषज्ञों ने बायोमेडिकल सेंसर, ईईजी, ईसीजी, स्पीच सिग्नल और मेडिकल इमेजिंग तकनीकों के माध्यम से रोगों की पहचान और विश्लेषण से जुड़े शोध प्रस्तुत किए। आईआईटी दिल्ली, आईआईटी इंदौर, रुडक़ी, कुरुक्षेत्र, सिक्किम और रायपुर सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के भविष्य पर चर्चा की।
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सोनीपत। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) सोनीपत में आयोजित पांच दिवसीय अंतर्विभागीय कार्यशाला तकनीक और स्वास्थ्य शोध के अनूठे संगम का मंच बनकर उभरी। एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मेडिकल इमेजिंग और बायोमेडिकल रिसर्च जैसे अत्याधुनिक विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
कार्यशाला में सबसे अधिक आकर्षण ईसीजी सिग्नल आधारित रियल टाइम लाइव डेमो रहा। इसमें प्रतिभागियों ने आधुनिक हेल्थ टेक्नोलॉजी के व्यावहारिक उपयोग को करीब से देखा और समझा। इस दौरान विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने स्वास्थ्य सेवाओं में उभरती तकनीकों की नई संभावनाओं पर गहन मंथन किया।
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इस लाइव प्रदर्शन में प्रतिभागियों को आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों के जरिए हृदय संबंधी संकेतों की निगरानी और विश्लेषण की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से दिखाया गया। विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने इसे तकनीक और स्वास्थ्य विज्ञान के बेहतरीन समन्वय का उदाहरण बताया।
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नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से आयोजित कार्यशाला में देशभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। उद्घाटन समारोह में आशुतोष कुमार सिंह मुख्य अतिथि रहे जबकि राम विलास पचौरी और संस्थान की निदेशक मनीषा शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
एआई और हेल्थ टेक्नोलॉजी पर हुआ गहन मंथन
कार्यशाला का मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सिग्नल एवं इमेज प्रोसेसिंग और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी पर केंद्रित रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक तकनीकें किस प्रकार रोगों की शुरुआती पहचान, विश्लेषण और उपचार को अधिक प्रभावी बना रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में एआई आधारित प्रणालियों की उपयोगिता, मेडिकल डेटा विश्लेषण और स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला संयोजक मोहन बंसल तथा सह संयोजक रमेश साहा और गौरव जैन ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नवीन तकनीकी शोध और व्यावहारिक प्रयोगों से जोड़ना था ताकि वे वैश्विक स्तर की उभरती तकनीकों को समझ सकें।
बायोमेडिकल रिसर्च पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला के दौरान देश के विभिन्न संस्थानों से पहुंचे विशेषज्ञों ने बायोमेडिकल सेंसर, ईईजी, ईसीजी, स्पीच सिग्नल और मेडिकल इमेजिंग तकनीकों के माध्यम से रोगों की पहचान और विश्लेषण से जुड़े शोध प्रस्तुत किए। आईआईटी दिल्ली, आईआईटी इंदौर, रुडक़ी, कुरुक्षेत्र, सिक्किम और रायपुर सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के भविष्य पर चर्चा की।