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शरीर और पर्यावरण को स्वस्थ रखती है साइकिल : अरुण
Tue, 03 Jun 2025 01:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 03 Jun 2025 01:09 AM IST
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फोटो :12: देवेंद्र कुहाड़।
- फोटो : kathua news
सोनीपत। भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास खुद के लिए समय नहीं है। इसका असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। साइकिल का स्थान बाइक ने ले लिया है। बढ़ते वाहनों के प्रचलन के बावजूद आज भी कई लोग साइकिल को जिंदगी का हिस्सा बनाए हुए हैं।
इनमें से एक हैं, सेक्टर-23 निवासी अरुण मलिक, जो साइकिल के प्रति युवाओं को जागरूक ही नहीं कर रहे, बल्कि दो दशक से अधिक समय से साइकिल चलाओ, प्रदूषण भगाओ का संदेश दे रहे हैं।
विश्व साइकिल दिवस पर मूलरूप से हरियाणा के सोनीपत के गांव रिवाड़ा हाल सेक्टर-23 निवासी अरुण मलिक ने बताया कि साइकिल ने उनकी जिंदगी ही नहीं नजरिया भी बदल दिया है। साइकिल चलाने की जिद कब जुनून बन गई, पता ही नहीं चला। जब वह पांचवीं कक्षा में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तब साइकिल चलाने की जिद की थी। उस समय उनके ताऊ ने कहा था कि साइकिल तो हमारे जमाने में चलाते थे। आजकल के बच्चों को कहां साइकिल चलानी आती है। उनकी यही बात दिल में घर कर गई और साइकिल चलाने की ठान ली।
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साइकिल चलाना सीखा और सोनीपत से गांव तक ताऊ को दिखाने के लिए साइकिल चलाकर गया। वहां से शुरू हुआ साइकिल पर सफर आज भी जारी है। 23 साल से साइकिल ही है, जिस पर करीब 95 हजार किलोमीटर तक का सफर तय किया है। उन्होंने साइकिल को बढ़ाव देने के लिए साइकिल फाउंडेशन तक बना दिया।
यह उपलब्धियां कर चुके नाम
अमित मलिक वर्ष 2020 में इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड व वर्ष 2021 में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवा चुके है। उन्हें इंडिया गेट से हिमाचल प्रदेश के अटल टनल तक साइकिल यात्रा करने वाले देश के पहले युवा बनने का गौरव मिला। साथ ही वह राजस्थान के जयपुर से सोनीपत तक 374 किलोमीटर तक का सफर एक ही रात में तय करने का रिकॉर्ड बनाया। साथ ही प्रदूषण मुक्त भारत बनाने के लिए 2300 किलोमीटर की राजस्थान साइकिल यात्रा कर अनोखा कारनामा रचा, यह यात्रा सिंगल गियर साइकिल पर 12 दिन में पूरी की।
सोनीपत में आज भी साइकिल ट्रैक का इंतजार
अरुण मलिक बताते हैं कि जिले में कहीं पर भी साइकिल ट्रैक नहीं है। जो युवा साइकिल चलाने के क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उन्हें अभ्यास करने के लिए दिल्ली दौड़ लगानी पड़ती है। उन्होंने साइकिल चलाने को बढ़ावा देने के लिए जिले में साइकिल ट्रैक बनाने की मांग की है। साथ ही कहा है कि सड़क किनारे साइकिल के लिए अलग से लेन बनानी चाहिए। साइकिल चलाने का प्रचलन बढ़ेगा तो हादसे भी कम होंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जिसे साइकिल का प्रयोग बढ़ाकर कम किया जा सकता है।
डॉ. देवेंद्र कुहाड़ दे रहे साइकि को बढ़ावा
कृषि विभाग उप मंडल अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुहाड़ साइकिल को लगातार बढ़ावा देते हैं। मूलरूप से बड़वासनी हाल सेक्टर-23 निवासी डॉ. देवेंद्र कुहाड़ कहते हैं कि साइकिल चलाने से पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता, साथ ही शरीर भी स्वस्थ रहता है। उनका प्रयास रहता है कि वह जितना अधिक हो सके साइकिल का ही प्रयोग करें। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हमारा एक प्रयास बेहतरी की ओर ले जा सकता है। हमारा छोटा सा प्रयास आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने के लिए काफी है।
उन्होंने कहा कि बेटा राजस्थान के कोटा में पढ़ने गया था। वहां बेटे के पास रहने गए तो दिन में समय व्यतीत करने के लिए साइकिल चलाने लगे, जिसके बाद तो कोटा और उसके आसपास भ्रमण साइकिल से ही किया। सोनीपत आते ही यहां भी साइकिल खरीद ली। इससे स्वास्थ्य में भी सुधार हो गया और काफी ऊर्जावान महसूस करने लगा हूं।
साइकिल चलाने के फायदे
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा बताते हैं कि साइकिल चलाने से हृदय घात की संभावना कम हो जाती है। साइकिल चलाने से ब्रेन स्ट्रोक व लकवा जैसी बीमारियों की आशंका कम होती है। साइकिल चलाने से वजन को आसानी से कम किया जा सकता है। इससे श्वास संबंधी रोगों से छुटकारा मिलता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
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इनमें से एक हैं, सेक्टर-23 निवासी अरुण मलिक, जो साइकिल के प्रति युवाओं को जागरूक ही नहीं कर रहे, बल्कि दो दशक से अधिक समय से साइकिल चलाओ, प्रदूषण भगाओ का संदेश दे रहे हैं।
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विश्व साइकिल दिवस पर मूलरूप से हरियाणा के सोनीपत के गांव रिवाड़ा हाल सेक्टर-23 निवासी अरुण मलिक ने बताया कि साइकिल ने उनकी जिंदगी ही नहीं नजरिया भी बदल दिया है। साइकिल चलाने की जिद कब जुनून बन गई, पता ही नहीं चला। जब वह पांचवीं कक्षा में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तब साइकिल चलाने की जिद की थी। उस समय उनके ताऊ ने कहा था कि साइकिल तो हमारे जमाने में चलाते थे। आजकल के बच्चों को कहां साइकिल चलानी आती है। उनकी यही बात दिल में घर कर गई और साइकिल चलाने की ठान ली।
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साइकिल चलाना सीखा और सोनीपत से गांव तक ताऊ को दिखाने के लिए साइकिल चलाकर गया। वहां से शुरू हुआ साइकिल पर सफर आज भी जारी है। 23 साल से साइकिल ही है, जिस पर करीब 95 हजार किलोमीटर तक का सफर तय किया है। उन्होंने साइकिल को बढ़ाव देने के लिए साइकिल फाउंडेशन तक बना दिया।
यह उपलब्धियां कर चुके नाम
अमित मलिक वर्ष 2020 में इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड व वर्ष 2021 में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवा चुके है। उन्हें इंडिया गेट से हिमाचल प्रदेश के अटल टनल तक साइकिल यात्रा करने वाले देश के पहले युवा बनने का गौरव मिला। साथ ही वह राजस्थान के जयपुर से सोनीपत तक 374 किलोमीटर तक का सफर एक ही रात में तय करने का रिकॉर्ड बनाया। साथ ही प्रदूषण मुक्त भारत बनाने के लिए 2300 किलोमीटर की राजस्थान साइकिल यात्रा कर अनोखा कारनामा रचा, यह यात्रा सिंगल गियर साइकिल पर 12 दिन में पूरी की।
सोनीपत में आज भी साइकिल ट्रैक का इंतजार
अरुण मलिक बताते हैं कि जिले में कहीं पर भी साइकिल ट्रैक नहीं है। जो युवा साइकिल चलाने के क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उन्हें अभ्यास करने के लिए दिल्ली दौड़ लगानी पड़ती है। उन्होंने साइकिल चलाने को बढ़ावा देने के लिए जिले में साइकिल ट्रैक बनाने की मांग की है। साथ ही कहा है कि सड़क किनारे साइकिल के लिए अलग से लेन बनानी चाहिए। साइकिल चलाने का प्रचलन बढ़ेगा तो हादसे भी कम होंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जिसे साइकिल का प्रयोग बढ़ाकर कम किया जा सकता है।
डॉ. देवेंद्र कुहाड़ दे रहे साइकि को बढ़ावा
कृषि विभाग उप मंडल अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुहाड़ साइकिल को लगातार बढ़ावा देते हैं। मूलरूप से बड़वासनी हाल सेक्टर-23 निवासी डॉ. देवेंद्र कुहाड़ कहते हैं कि साइकिल चलाने से पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता, साथ ही शरीर भी स्वस्थ रहता है। उनका प्रयास रहता है कि वह जितना अधिक हो सके साइकिल का ही प्रयोग करें। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हमारा एक प्रयास बेहतरी की ओर ले जा सकता है। हमारा छोटा सा प्रयास आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने के लिए काफी है।
उन्होंने कहा कि बेटा राजस्थान के कोटा में पढ़ने गया था। वहां बेटे के पास रहने गए तो दिन में समय व्यतीत करने के लिए साइकिल चलाने लगे, जिसके बाद तो कोटा और उसके आसपास भ्रमण साइकिल से ही किया। सोनीपत आते ही यहां भी साइकिल खरीद ली। इससे स्वास्थ्य में भी सुधार हो गया और काफी ऊर्जावान महसूस करने लगा हूं।
साइकिल चलाने के फायदे
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा बताते हैं कि साइकिल चलाने से हृदय घात की संभावना कम हो जाती है। साइकिल चलाने से ब्रेन स्ट्रोक व लकवा जैसी बीमारियों की आशंका कम होती है। साइकिल चलाने से वजन को आसानी से कम किया जा सकता है। इससे श्वास संबंधी रोगों से छुटकारा मिलता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।

फोटो :12: देवेंद्र कुहाड़।- फोटो : kathua news