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अस्पतालों में बेड खाली पड़े, ऑक्सीजन नहीं मिलने से तड़प रहे मरीज, मिल रही दुत्कार

Sun, 02 May 2021 11:37 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 02 May 2021 11:37 PM IST
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Beds are empty in hospitals, patients suffering from lack of oxygen, getting treatment
कोरोना का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाएं दम तोड़ती जा रही हैं। जिससे लोगों की जिंदगी की डोर भी टूट रही है। हालात यह है कि अस्पतालों में बेड खाली पड़े हैं, लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण मरीज तड़प रहे हैं। उनको अस्पतालों में भर्ती कराने के लिए परिजन लेकर जाते है तो वहां से दुत्कार मिलती है। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को देखे तो जिले में शनिवार तक कोरोना के 7353 एक्टिव केस में 6934 होम आईसोलेट हैं। इस तरह 2800 बेड खाली होने चाहिए, जिनमें वेंटिलेटर से लेकर आईसीयू व ऑक्सीजन के बेड हैं। इसके बावजूद अस्पतालों में मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। उनको खुद ही ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की शर्त रखी जा रही है।
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स्वास्थ्य विभाग का कोरोना मरीजों के लिए 3219 बेड होने का दावा, इनमें 972 गंभीर मरीजों के लिए
प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोरोना का कहर देखते हुए मेडिकल कॉलेज के अलावा 18 प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार इस समय कोरोना के मरीजों के लिए 3219 बेड निर्धारित किए गए हैं। इनमें 102 वेंटिलेटर, 60 आईसीयू व 810 ऑक्सीजन बेड हैं और इन पर गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है। जबकि अन्य सामान्य मरीजों के लिए बेड हैं। अब प्रशासन के अनुसार जिले में इस समय 7353 एक्टिव केस हैं। जिनमें से 6934 को लक्षण नहीं होने के कारण होम आइसोलेट किया गया है। इस तरह से केवल 419 मरीज ही अस्पतालों में भर्ती है। इस तरह देखा जाए तो अस्पतालों में गंभीर मरीजों वाले बेड भी पूरे नहीं भरते हैं। लेकिन गंभीर हालत होने पर मरीज को परिजन मेडिकल कॉलेज, नागरिक अस्पताल या प्राइवेट अस्पताल में लेकर जाता है तो उनको भर्ती नहीं किया जाता है। नागरिक अस्पताल में यहां तक धमकी दी जा रही है कि वह चाहे किसी के पास भी शिकायत करें, लेकिन वह मरीज को भर्ती नहीं कर सकते हैं।
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कोविड वार्ड का बुरा हाल, घंटों पड़े रहते हैं शव, मरीजों को देखने भी नहीं जाते चिकित्सक
प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग भले ही कोरोना मरीजों को बेहतर उपचार देने का दावा करता हो। लेकिन अस्पताल के कोविड वार्ड का बुरा हाल है। वहां कोरोना से मौत होने पर शव घंटों तक बेड पर पड़ा रहता है और उनके पास ही मरीज रहते हैं। इससे मरीजों के अंदर दहशत पैदा हो जाती है। नागरिक अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती एक मरीज का कहना है कि रविवार को कई लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन उनके शव पांच घंटे तक नहीं उठाए गए। उसने अस्पताल कर्मियों पर सैनिटाइज नहीं करने का आरोप भी लगाया है। इसके अलावा कोविड वार्ड में कोई चिकित्सक तक नहीं आता है और वहां मरीज को परेशानी होने पर परिजनों को खुद ही देखभाल करनी पड़ रही है। इस तरह के हालात नागरिक अस्पताल के कोविड वार्ड में बने हुए हैं।
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प्रशासन ने ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए बनाई व्यवस्था, फिर भी भटक रहे मरीजों के परिजन
जिन मरीजों की हालत ज्यादा खराब हो जाती है, उनको परिजन अस्पताल में लेकर पहुंचते हैं तो उनसे ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था करने के लिए कहा जाता है। इसको देखते हुए प्रशासन ने एक व्यवस्था बनाई है कि किसी अस्पताल में कोई मरीज भर्ती है और उनको ऑक्सीजन के लिए परेशानी होती है तो वह अस्पताल से लिखवाकर लाएंगे कि उनको ऑक्सीजन की जरूरत है। उसके बाद जिमखाना क्लब में चिकित्सक व प्रशासन की टीम उनको एक पर्ची देगी और उस पर्ची को बहालगढ़ में ऑक्सीजन सिलिंडर कंपनी में लेकर जाने पर सिलिंडर मिल जाएगा। लेकिन वहां से पर्ची रोजाना 100 से ज्यादा को मिल रही है और कंपनी में पहले अपने परिचितों को सिलिंडर दिए जा रहे हैं। वहां कंपनी के मालिक व अधिकारी पहले अपने परिचितों को सिलिंडर देते हैं और उसके बाद कोई बचता है तो उसको सिलिंडर दिया जाता है। इस तरह मरीजों के परिजन भटक रहे है।

अस्पताल में जितने बेड है, उन पर सभी पर मरीज भर्ती है। ऑक्सीजन की समस्या है और उसके आधार पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। कोविड वार्ड में शव नहीं छोड़ा जाता है और उसको आधे घंटे में उठवा दिया जाता है। अगर उपचार व अन्य कोई समस्या है तो उसको दिखवाया जाएगा और किसी को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। डॉ. जयभगवान जाटान, पीएमओ
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