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Sonipat News: डिवाइडरों को हटाने के मामले में नपा की ओर से दायर की गई अर्जी खारिज
Sat, 04 Jul 2026 04:23 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 04 Jul 2026 04:23 AM IST
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खरखौदा। शहर के मुख्य मार्ग के बीच रखे डिवाइडरों को हटाने के मामले में नगर पालिका को अदालत से राहत नहीं मिली। खरखौदा की अदालत ने डिवाइडर हटाने पर पहले से लगी रोक को बरकरार रखते हुए नगर पालिका की ओर से स्टे हटाने और मामले को समाप्त करने के लिए दायर अर्जी खारिज कर दी। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।
शहर के मुख्य मार्ग पर करोड़ों की लागत से डिवाइडरों का निर्माण कराया था लेकिन नगर पालिका की तरफ से शहर की सड़कों पर हुए अतिक्रमण को खत्म करने के लिए मुहिम का मुंह डिवाइडरों की तरफ मोड़ दिया था। इस कार्रवाई का न केवल कई पार्षदों ने बल्कि खुद नगर पालिका अध्यक्ष हीरालाल इंदौरा भी विरोध दर्ज कराया था।
इस मामले में न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाया गया था। उनका कहना था कि बिना किसी प्रस्ताव, तकनीकी स्वीकृति और वैधानिक प्रक्रिया के डिवाइडर हटाना सरकारी धन की बर्बादी है साथ ही इससे शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
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शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान नगर पालिका ने अदालत से स्टे हटाने की मांग करते हुए कहा कि डिवाइडर हटाना जनहित में है। वहीं, अध्यक्ष और पार्षदों की ओर से अधिवक्ता कमल शर्मा ने तर्क दिया कि डिवाइडर हटाने से सड़क दुर्घटनाओं और जाम की आशंका बढ़ेगी। करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति व्यर्थ चली जाएगी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जज सुषमा ने डिवाइडर हटाने पर लगी रोक को यथावत रखते हुए नगर पालिका की अर्जी खारिज कर दी। अधिवक्ता कमल शर्मा ने बताया कि अदालत ने जनहित और सार्वजनिक धन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह आदेश दिया है।
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शहर के मुख्य मार्ग पर करोड़ों की लागत से डिवाइडरों का निर्माण कराया था लेकिन नगर पालिका की तरफ से शहर की सड़कों पर हुए अतिक्रमण को खत्म करने के लिए मुहिम का मुंह डिवाइडरों की तरफ मोड़ दिया था। इस कार्रवाई का न केवल कई पार्षदों ने बल्कि खुद नगर पालिका अध्यक्ष हीरालाल इंदौरा भी विरोध दर्ज कराया था।
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इस मामले में न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाया गया था। उनका कहना था कि बिना किसी प्रस्ताव, तकनीकी स्वीकृति और वैधानिक प्रक्रिया के डिवाइडर हटाना सरकारी धन की बर्बादी है साथ ही इससे शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
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शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान नगर पालिका ने अदालत से स्टे हटाने की मांग करते हुए कहा कि डिवाइडर हटाना जनहित में है। वहीं, अध्यक्ष और पार्षदों की ओर से अधिवक्ता कमल शर्मा ने तर्क दिया कि डिवाइडर हटाने से सड़क दुर्घटनाओं और जाम की आशंका बढ़ेगी। करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति व्यर्थ चली जाएगी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जज सुषमा ने डिवाइडर हटाने पर लगी रोक को यथावत रखते हुए नगर पालिका की अर्जी खारिज कर दी। अधिवक्ता कमल शर्मा ने बताया कि अदालत ने जनहित और सार्वजनिक धन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह आदेश दिया है।