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Sonipat News: सत्रह दुकानों को खाली करने के नोटिस देने पर दुकानदारों में रोष
Sun, 06 Jul 2025 01:01 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 06 Jul 2025 01:01 AM IST
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फोटो 15: सोनीपत में सुभाष चौक के पास प्रशासन के खिलाफ रोष जताते दुकानदार। संवाद
सोनीपत। सुभाष चौक के पास वर्ष 1977 में निर्मित दुकानों को खाली करने के नोटिस के विरोध में शनिवार को दुकानदारों ने रोष प्रकट किया। उनका कहना है कि जब तक उन्हें दूसरी जगह समुचित स्थान नहीं दिया जाता, तब तक वह अपनी दुकानें नहीं खाली करेंगे। उन्होंने प्रशासन पर मनमानी करने और रसूखदारों के दबाव में आकर काम करने का आरोप लगाया।
दुकानदारों का कहना है कि यह दुकानें नगर पालिका ने विधिवत रूप से बनाकर किराये पर दी थीं। वर्ष 2000 में 40 हजार रुपये प्रति दुकान की दर से इनका नाम पर आवंटन भी कर दिया गया था। दुकानदारों का यह भी दावा है कि वर्ष 2009 तक चंडीगढ़ से ऑडिट होती रही, जिसमें किराये व अन्य मामलों की नियमित जांच होती रही। फिर भी आज इन्हें अवैध बताकर हटाने की कोशिश की जा रही है जो अनुचित है।
ईश्वर छाबड़ा, मदन लाल, अजीत सिंह, हवा सिंह, हरिचंद सहित ने प्रशासन से मांग की कि उन्हें जब तक नई जगह नहीं दी जाती, तब तक दुकानें खाली न करवाई जाएं। उनके हक की सुरक्षा की जाए। दुकानदारों ने एक स्वर में कहा कि वे किसी भी सूरत में दुकान खाली नहीं करेंगे। उनका दावा है कि दुकानें पूरी तरह वैध हैं। उन्हें नगर पालिका ने न केवल बनवाया, बल्कि किराये पर दिया और वर्षों तक किराया भी वसूलती रही।
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दुकानदारों का कहना है कि यह दुकानें नगर पालिका ने विधिवत रूप से बनाकर किराये पर दी थीं। वर्ष 2000 में 40 हजार रुपये प्रति दुकान की दर से इनका नाम पर आवंटन भी कर दिया गया था। दुकानदारों का यह भी दावा है कि वर्ष 2009 तक चंडीगढ़ से ऑडिट होती रही, जिसमें किराये व अन्य मामलों की नियमित जांच होती रही। फिर भी आज इन्हें अवैध बताकर हटाने की कोशिश की जा रही है जो अनुचित है।
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ईश्वर छाबड़ा, मदन लाल, अजीत सिंह, हवा सिंह, हरिचंद सहित ने प्रशासन से मांग की कि उन्हें जब तक नई जगह नहीं दी जाती, तब तक दुकानें खाली न करवाई जाएं। उनके हक की सुरक्षा की जाए। दुकानदारों ने एक स्वर में कहा कि वे किसी भी सूरत में दुकान खाली नहीं करेंगे। उनका दावा है कि दुकानें पूरी तरह वैध हैं। उन्हें नगर पालिका ने न केवल बनवाया, बल्कि किराये पर दिया और वर्षों तक किराया भी वसूलती रही।
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