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Sonipat News: जीएनएम नर्सिंग कोर्स कराने के नाम पर छात्र से ठगी का आरोप
Wed, 12 Nov 2025 01:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 12 Nov 2025 01:41 AM IST
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खरखौदा। जीएनएम नर्सिंग कोर्स में दाखिला करवाने के नाम पर युवक से ठगी का मामला सामने आया है। वार्ड 7 गुरुकुल वाली गली निवासी कृष्ण ने इस मामले में अदालत की शरण ली। अदालत के आदेश पर थाना खरखौदा में इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर व कॉलेज के डायरेक्टर के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
कृष्ण ने कहा कि आरोपी ने खुद को पंजाब में नर्सिंग कॉलेज का साझेदार बताकर जीएनएम कोर्स में दाखिला दिलाने का भरोसा दिया। तीन साल के कोर्स की कुल फीस दो लाख आठ रुपये तय हुई थी लेकिन आरोपी ने नए बहाने बनाकर 4 लाख रुपये तक वसूल लिए। प्रैक्टिकल की तारीखों की जानकारी तक नहीं दी गई जिससे उनका पेपर छूट गया।
पीड़ित ने बताया कि कोर्स में लंबी देरी कर उन्हें चार साल छह महीने तक उलझाए रखा गया। तीसरे वर्ष के परिणाम के बाद जब उन्होंने अपने मूल दस्तावेज वापस मांगे तो आरोपियों ने रजिस्ट्रेशन के नाम पर 25 हजार रुपये और मांगे। दस्तावेज लौटाने से इंकार कर दिया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी।
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शिकायत में यह भी कहा कि दो अन्य छात्राओं प्रिया और पूजा से भी इसी प्रकार की धोखाधड़ी की गई है। पीड़ित ने इसकी शिकायत एसएचओ खरखौदा और पुलिस आयुक्त सोनीपत को भी दी थी पर कार्रवाई नहीं होने पर उसने अदालत की शरण ली।
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कृष्ण ने कहा कि आरोपी ने खुद को पंजाब में नर्सिंग कॉलेज का साझेदार बताकर जीएनएम कोर्स में दाखिला दिलाने का भरोसा दिया। तीन साल के कोर्स की कुल फीस दो लाख आठ रुपये तय हुई थी लेकिन आरोपी ने नए बहाने बनाकर 4 लाख रुपये तक वसूल लिए। प्रैक्टिकल की तारीखों की जानकारी तक नहीं दी गई जिससे उनका पेपर छूट गया।
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पीड़ित ने बताया कि कोर्स में लंबी देरी कर उन्हें चार साल छह महीने तक उलझाए रखा गया। तीसरे वर्ष के परिणाम के बाद जब उन्होंने अपने मूल दस्तावेज वापस मांगे तो आरोपियों ने रजिस्ट्रेशन के नाम पर 25 हजार रुपये और मांगे। दस्तावेज लौटाने से इंकार कर दिया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी।
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शिकायत में यह भी कहा कि दो अन्य छात्राओं प्रिया और पूजा से भी इसी प्रकार की धोखाधड़ी की गई है। पीड़ित ने इसकी शिकायत एसएचओ खरखौदा और पुलिस आयुक्त सोनीपत को भी दी थी पर कार्रवाई नहीं होने पर उसने अदालत की शरण ली।