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Sonipat News: साइबर अपराध मामले में आरोपी को दी जमानत
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सोनीपत। साइबर क्राइम के एक मामले में सेशन जज जगजीत सिंह ने आरोपी अमित कुमार को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही आरोपी को 50 हजार के निजी मुचलके और इतनी ही राशि का एक जमानती अदालत में पेश करने का आदेश दिया है। इस मामले में 1 अप्रैल को आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया था।
प्राथमिकी राहुल सैनी की शिकायत पर थाना साइबर क्राइम में 5 दिसंबर 2025 को दर्ज की गई थी। इसमें आरोपी उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-2 में गौतम बुद्ध नगर निवासी अमित कुमार पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए थे। आरोपी ने ऑनलाइन पैसा कमाने के नाम पर शिकायतकर्ता से 1,83,549 रुपये की साइबर धोखाधड़ी की थी।
आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि यह आरोपी की दूसरी जमानत याचिका है। पहली याचिका खारिज कर दी गई थी। अब शिकायतकर्ता की अदालत में गवाही हो चुकी है और उसने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया है। आरोपी को आगे हिरासत में रखने से कोई उद्देश्य सिद्ध नहीं होगा। दूसरी ओर सरकारी वकील ने तर्क दिया कि आरोपी की जमानत याचिका इसी अदालत से खारिज हो चुकी हैं और पहली याचिका खारिज होने के बाद से परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं आया है। इसलिए जमानत याचिका खारिज की जानी चाहिए।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी 21 फरवरी से हिरासत में है। हालांकि उसकी पहली जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी, लेकिन वकील की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार शिकायतकर्ता की अदालत में जांच की जा चुकी है और उसने अपनी शिकायत या अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया है। अन्य गवाह सरकारी कर्मचारी हैं, जिन्हें आरोपी की ओर से प्रभावित करने की संभावना कम है। शिकायतकर्ता के मुकर जाने को ध्यान में रखते हुए, आरोपी को और अधिक समय तक जेल में रखने का कोई लाभ नहीं है।
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प्राथमिकी राहुल सैनी की शिकायत पर थाना साइबर क्राइम में 5 दिसंबर 2025 को दर्ज की गई थी। इसमें आरोपी उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-2 में गौतम बुद्ध नगर निवासी अमित कुमार पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए थे। आरोपी ने ऑनलाइन पैसा कमाने के नाम पर शिकायतकर्ता से 1,83,549 रुपये की साइबर धोखाधड़ी की थी।
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आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि यह आरोपी की दूसरी जमानत याचिका है। पहली याचिका खारिज कर दी गई थी। अब शिकायतकर्ता की अदालत में गवाही हो चुकी है और उसने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया है। आरोपी को आगे हिरासत में रखने से कोई उद्देश्य सिद्ध नहीं होगा। दूसरी ओर सरकारी वकील ने तर्क दिया कि आरोपी की जमानत याचिका इसी अदालत से खारिज हो चुकी हैं और पहली याचिका खारिज होने के बाद से परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं आया है। इसलिए जमानत याचिका खारिज की जानी चाहिए।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी 21 फरवरी से हिरासत में है। हालांकि उसकी पहली जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी, लेकिन वकील की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार शिकायतकर्ता की अदालत में जांच की जा चुकी है और उसने अपनी शिकायत या अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया है। अन्य गवाह सरकारी कर्मचारी हैं, जिन्हें आरोपी की ओर से प्रभावित करने की संभावना कम है। शिकायतकर्ता के मुकर जाने को ध्यान में रखते हुए, आरोपी को और अधिक समय तक जेल में रखने का कोई लाभ नहीं है।