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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सोनीपत में बनेगी अलग विंग

Wed, 09 Mar 2022 11:56 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 09 Mar 2022 11:56 PM IST
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A separate wing will be formed in Sonepat to promote natural farming
सोनीपत। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग सोनीपत में अलग विंग बना रहा है। इसके लिए 500 किसान शून्य बजट खेती के लिए तैयार हो गए हैं। विभाग किसानों को रासायनिक खेती की राह छुड़ाकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर लगा है। अलग से तैयार की जा रही विंग में प्राकृतिक खेती से जुड़ने वाले किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही प्राकृतिक खेती पद्धति अपनाने से खेती में हुए नफा-नुकसान की निगरानी भी की जाएगी।
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खेती में लगातार रासायनिक खाद व कीटनाशक के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। प्रदेश में ज्यादातर जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। प्रदेश का बासमती धान विश्व में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन कुछ साल से फसलों में हानिकारक तत्वों की मात्रा अधिक मिलने से यूरोप के देश हरियाणा से चावल जैसी खाद्य वस्तुओं को आयात करने में हिचक रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने प्राकृतिक खेती योजना को शुरू करने का फैसला किया है। दो साल में कोरोना संक्रमण की वजह से पैदा हुए हालातों के कारण यह योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही थी, लेकिन अब स्थिति बेहतर होने के बाद सरकार ने इस योजना को धरातल पर लाने की पहल तेज कर दी है।
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खरीफ सीजन से होगी शुरुआत, 500 किसान तैयार
कृषि विभाग प्राकृतिक खेती योजना को खरीफ सीजन से शुरू करने जा रहा है। इसके लिए विभाग की तरफ से जिले में 500 किसानों की सूची तैयार की गई है। शुरुआत में करीब 500 एकड़ भूमि में किसान प्राकृतिक खेती पद्धति को अपनाएंगे। इसके लिए कृषि विभाग ने कुरुक्षेत्र में मंगलवार को आयोजित हुए राज्यस्तरीय सेमिनार में भी सोनीपत के 50 किसानों को भेजकर इस दिशा में जानकारी दिलाई है।
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भावांतर भरपाई योजना की तर्ज पर नुकसान होने पर की जाएगी भरपाई
कृषि विभाग प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण करवाएगा। सरकार प्राकृतिक खेती योजना के तहत शामिल किसानों को 3 साल तक लाभ भी देगी। जिसके तहत मौसम या अन्य कारणों से अगर किसान की फसल का उत्पादन कम होता है तो भावांतर भरपाई योजना की तर्ज पर किसानों के नुकसान की भरपाई भी करवाई जाएगी।
ऐसे की जाएगी प्राकृतिक खेती
जीरो बजट प्राकृतिक खेती देसी गाय के गोबर एवं गोमूत्र पर आधारित है। एक देसी गाय के गोबर एवं गोमूत्र से एक किसान तीस एकड़ जमीन पर जीरो बजट खेती कर सकता है। देसी प्रजाति के गोवंश के गोबर एवं मूत्र से जीवामृत, घनजीवामृत तथा जामन बीजामृत बनाया जाता है। इनका खेत में उपयोग करने से मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि के साथ-साथ जैविक गतिविधियों का विस्तार होता है। जीवामृत का महीने में एक अथवा दो बार खेत में छिडक़ाव किया जा सकता है। जबकि बीजामृत का इस्तेमाल बीजों को उपचारित करने में किया जाता है। इस विधि से खेती करने वाले किसान को बाजार से किसी प्रकार की खाद और कीटनाशक रसायन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है। फसलों की सिंचाई के लिए पानी भी मौजूदा खेतीबाड़ी की तुलना में कम लगता है।

वर्जन
खरीफ सीजन में प्राकृतिक खेती योजना को शुरू किया जाएगा। इसके लिए 50 किसानों के ग्रुप को सेमिनार में भेजकर उन्हें इसकी जानकारी भी दिलाई गई है। प्राकृतिक खेती के लिए शुरुआत में 500 किसानों की सूची तैयार की गई है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से अलग विंग भी तैयार किया जाएगा। किसानों को कम खर्च पर अधिक उत्पादन दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
- डॉ. अनिल सहरावत, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत
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