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कंक्रीट के जंगल में हरियाली का संदेश : पूनम की छत पर खिलती है औषधीय बगिया

Sun, 19 Jul 2026 08:08 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sun, 19 Jul 2026 08:08 PM IST
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A message of greenery in the concrete jungle: A medicinal garden blooms on Poonam's terrace.
गोहाना में अपनी बगिया के बीच पूनम। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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गोहाना। कंक्रीट के जंगलों और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच यदि कोई अपनी छत को हरियाली, स्वास्थ्य और प्राकृतिक खुशबू से महका दे तो वह न केवल अपने परिवार बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बन जाता है। हुकम चंद मंडी निवासी पूनम ने घर की छत को ऐसी ही खूबसूरत औषधीय बगिया में बदल दिया है, जहां हर पौधा स्वास्थ्य, सुकून और प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देता है।
उनकी छत पर उगी यह हरियाली केवल आंखों को सुकून नहीं देती, बल्कि परिवार के दैनिक जीवन में प्राकृतिक औषधियों का महत्वपूर्ण स्रोत भी बनी हुई है। पूनम ने बगिया में अजवायन, ग्वारपाठा (ऐलोवेरा), करीपत्ता, स्टीविया और सौंफ सहित कई उपयोगी औषधीय पौधे लगाए हैं। इन पौधों का इस्तेमाल घर की रसोई के साथ-साथ छोटे-मोटे घरेलू उपचारों में भी किया जाता है। उनका मानना है कि प्रकृति ने हमें ऐसी अनमोल जड़ी-बूटियां दी हैं, जिनका नियमित उपयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में सहायक हो सकता है।
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वह बताती हैं कि ग्वारपाठा त्वचा और बालों की देखभाल के लिए बेहद लाभकारी है, जबकि करीपत्ता भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है। वहीं स्टीविया प्राकृतिक मिठास का अच्छा विकल्प है, जबकि अजवायन और सौंफ पाचन संबंधी समस्याओं में राहत देने के लिए घरेलू उपचार के रूप में वर्षों से उपयोग की जाती रही हैं।
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पूनम के पति निखिल भी बागवानी के शौकीन हैं। दोनों मिलकर अपनी छत की बगिया की देखभाल करते हैं। औषधीय पौधों के साथ उन्होंने विभिन्न मौसमों के रंग-बिरंगे फूल भी लगाए हैं, जो पूरे वातावरण को आकर्षक बना देते हैं। उनके अनुसार फूल मौसम बदलने के साथ बदल जाते हैं, लेकिन औषधीय पौधे पूरे वर्ष परिवार की सेवा करते रहते हैं। यही कारण है कि उनकी बगिया सुंदरता और उपयोगिता का अनूठा संगम बन गई है।

पूनम का कहना है कि पौधों की देखभाल केवल शौक नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी भी है। जितना स्नेह और समय पौधों को दिया जाता है, वह उससे कहीं अधिक शुद्ध हवा, ताजगी और स्वास्थ्य के रूप में लौटाते हैं। प्रत्येक परिवार अपनी छत, बालकनी या आंगन में कुछ औषधीय पौधे अवश्य लगाए तो लोगों को शुद्ध, ताजी और प्राकृतिक जड़ी-बूटियां आसानी से उपलब्ध हो सकती हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
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गोहाना में अपनी बगिया के बीच पूनम। संवाद

गोहाना में अपनी बगिया के बीच पूनम। संवाद

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