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Sonipat News: लंपी वायरस से बचाव के लिए 80 हजार गोवंशों का टीकाकरण, 90 सैंपल जांच को भेजे
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फोटो : सोनीपत की सिसाना गोशाला में गोवंश को टीकाकरण करते पशु चिकित्सक। स्रोत: पशुपालन विभाग
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सोनीपत। जिले में गोवंश को लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है। विभाग की ओर से अब तक करीब 80 हजार गोवंशों का टीकाकरण किया जा चुका है। वहीं बीमारी के संभावित लक्षण वाले पशुओं के करीब 90 सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। राहत की बात है कि जिले में अभी तक लंपी वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है।
पशुपालन विभाग की टीमें गांवों में पशुपालकों और गोशाला प्रबंधन समितियों से संपर्क कर गोवंशों का टीकाकरण कर रही हैं। साथ ही पशुओं के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जिन पशुओं में बीमारी के संभावित लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उनकी पहचान कर सैंपल लिए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, लंपी रोग में पशुओं की त्वचा के नीचे गांठें बनने के साथ बुखार समेत अन्य लक्षण दिखाई देते हैं।
संदिग्ध पशु को दूसरे पशुओं से रखें अलग
प्रदेश के कई जिलों में लंपी रोग के मामले सामने आने के बाद पशुपालकों में चिंता बढ़ी है। यह संक्रामक बीमारी है और एक पशु से दूसरे पशु में फैल सकती है। पशुओं के शरीर पर विशेष रूप से सिर, गर्दन, पैर, थन और जननांगों के आसपास दो से पांच सेंटीमीटर तक की गांठें बन सकती हैं, जो बाद में घाव का रूप ले सकती हैं। इसके अलावा बुखार, आंख और नाक से पानी आना, मुंह से लार निकलना, सामान्य अस्वस्थता और दूध उत्पादन में अचानक कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
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मच्छर-मक्खियों से भी फैलता है संक्रमण
लंपी स्किन डिजीज वायरस के संक्रमण से होने वाला रोग है। इसका प्रसार मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और जूं जैसे वाहकों के माध्यम से होता है। संक्रमित पशुओं की लार तथा दूषित पानी और चारे से भी संक्रमण फैलने की आशंका रहती है।
पशुओं की आवाजाही पर रखें नियंत्रण
उपमंडल पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव फोगाट और डॉ. जयदीप बेनीवाल ने पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि पशुओं की अनावश्यक आवाजाही पर नियंत्रण रखा जाए और संदिग्ध या संक्रमित पशु को अन्य पशुओं से अलग रखा जाए। गोशालाओं में मच्छर-मक्खियों और अन्य कीटों की संख्या नियंत्रित करने के उपाय किए जाएं। पशुओं को बहुत अधिक संख्या में एक साथ न बांधें और उनके चारे-पानी की व्यवस्था भी अलग रखें। संक्रमित पशु की मृत्यु होने पर उसके शव को खुले में न फेंकें, बल्कि निर्धारित तरीके से निस्तारण करें।
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विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक गोवंशों का टीकाकरण कर लंपी रोग के संभावित प्रसार को रोकना है। फिलहाल जिले में स्थिति नियंत्रण में है। भेजे गए 90 सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
डॉ. नरेंद्र दहिया, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग
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पशुपालन विभाग की टीमें गांवों में पशुपालकों और गोशाला प्रबंधन समितियों से संपर्क कर गोवंशों का टीकाकरण कर रही हैं। साथ ही पशुओं के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जिन पशुओं में बीमारी के संभावित लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उनकी पहचान कर सैंपल लिए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, लंपी रोग में पशुओं की त्वचा के नीचे गांठें बनने के साथ बुखार समेत अन्य लक्षण दिखाई देते हैं।
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संदिग्ध पशु को दूसरे पशुओं से रखें अलग
प्रदेश के कई जिलों में लंपी रोग के मामले सामने आने के बाद पशुपालकों में चिंता बढ़ी है। यह संक्रामक बीमारी है और एक पशु से दूसरे पशु में फैल सकती है। पशुओं के शरीर पर विशेष रूप से सिर, गर्दन, पैर, थन और जननांगों के आसपास दो से पांच सेंटीमीटर तक की गांठें बन सकती हैं, जो बाद में घाव का रूप ले सकती हैं। इसके अलावा बुखार, आंख और नाक से पानी आना, मुंह से लार निकलना, सामान्य अस्वस्थता और दूध उत्पादन में अचानक कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
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मच्छर-मक्खियों से भी फैलता है संक्रमण
लंपी स्किन डिजीज वायरस के संक्रमण से होने वाला रोग है। इसका प्रसार मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और जूं जैसे वाहकों के माध्यम से होता है। संक्रमित पशुओं की लार तथा दूषित पानी और चारे से भी संक्रमण फैलने की आशंका रहती है।
पशुओं की आवाजाही पर रखें नियंत्रण
उपमंडल पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव फोगाट और डॉ. जयदीप बेनीवाल ने पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि पशुओं की अनावश्यक आवाजाही पर नियंत्रण रखा जाए और संदिग्ध या संक्रमित पशु को अन्य पशुओं से अलग रखा जाए। गोशालाओं में मच्छर-मक्खियों और अन्य कीटों की संख्या नियंत्रित करने के उपाय किए जाएं। पशुओं को बहुत अधिक संख्या में एक साथ न बांधें और उनके चारे-पानी की व्यवस्था भी अलग रखें। संक्रमित पशु की मृत्यु होने पर उसके शव को खुले में न फेंकें, बल्कि निर्धारित तरीके से निस्तारण करें।
विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक गोवंशों का टीकाकरण कर लंपी रोग के संभावित प्रसार को रोकना है। फिलहाल जिले में स्थिति नियंत्रण में है। भेजे गए 90 सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
डॉ. नरेंद्र दहिया, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग

फोटो : सोनीपत की सिसाना गोशाला में गोवंश को टीकाकरण करते पशु चिकित्सक। स्रोत: पशुपालन विभाग