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जिले के 8 खिलाड़ी भीम अवॉर्ड के लिए चयनित

Wed, 16 Feb 2022 01:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 16 Feb 2022 01:12 AM IST
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8 players of the district selected for Bhim Award
खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग ने मंगलवार को भीम अवॉर्ड के लिए चयनित खिलाड़ियों की घोषणा कर दी। इसमें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक जीत चुके जिले के 8 खिलाड़ियों को शामिल किया गया है।
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भीम अवॉर्ड के लिए सरकार की तरफ से वर्ष 2018 से 2021 तक के 41 खिलाड़ियों का चयन किया है। जिसमें सोनीपत के 8 खिलाड़ी शामिल हैं। विजेता खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से सम्मान के साथ पांच लाख रुपये नकद व प्रतिमाह पांच हजार रुपये मानदेय राशि मिलेगी। यही नहीं टोक्यो ओलंपिक व पैरालंपिक में पदक जीतने वाले प्रदेश के हर खिलाड़ी को भी भीम अवॉर्ड देने की सिफारिश की गई है। भीम अवॉर्ड के नामों की घोषणा के साथ ही खिलाड़ियों के परिजनों मेें खुशी की लहर है। परिजनों ने मिठाई बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया।
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भीम अवॉर्ड के लिए खिलाड़ियों के नामों की घोषणा के साथ ही विभाग ने आवेदनकर्ता खिलाड़ियों को 10 दिन का समय दिया है। जिन खिलाड़ियों को अवॉर्ड नहीं मिला है, वो 25 फरवरी तक अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। इसके बाद विभाग अवॉर्ड समारोह की तिथि निर्धारित कर विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित करेगा।
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भीम अवॉर्ड के लिए ये खिलाड़ी चयनित
खिलाड़ी खेल
साक्षी कुमारी कबड्डी
अमित पैरा एथलेटिक्स
प्रदीप कबड्डी
मोनिका हॉकी
धर्मबीर पैरा एथलेटिक्स
रवि दहिया कुश्ती
सुमित हॉकी
सुमित आंतिल पैरा एथलेटिक्स
साक्षी पूनिया, कबड्डी
गांव बिचपड़ी की साक्षी पूनिया का बचपन से ही सपना था कि वह खेलों में करिअर बनाएं। उन्होंने छठी कक्षा से कबड्डी खेलना शुरू किया। कोच नरेंद्र देशवाल ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया। पिता रमेश कुमार बीएसएफ से सेवानिवृत्त हैं। पिता व भाई सुरजीत भी अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। पांचवें और 13वें साउथ एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक और 18वें एशियन गेस्म में कबड्डी में रजत पदक जीते। सीनियर नेशनल कबड्डी में तीन बार पदक जीते। अब पानीपत के इसराना में कोच नरेंद्र देशवाल के पास अभ्यास कर रही हैं।
अमित कुमार, पैरा एथलेटिक्स
खरखौदा के गांव मटिंडू निवासी अमित कुमार को बचपन से ही खेलने का शौक था। समय के साथ-साथ यह शौक जुनून बन गया। अमित ने वर्ष 2014 में एशियन पैरा गेम में प्रतिभागिता की। वर्ष 2015 में दोहा में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स व 2017 में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में प्रतिभागिता की। इसके अलावा कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीते। भीम अवॉर्ड मिलने पर परिजनों ने मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया।
प्रदीप नरवाल, कबड्डी
प्रदीप नरवाल का जन्म गोहाना के गांव रीढाना में 16 फरवरी 1996 को हुआ था। प्रो कबड्डी लीग में एक अच्छे रेडर के रूप में उभरे हैं। इनका सबसे घातक हथियार डुबकी है। इसलिए इन्हें डुबकी किंग के नाम से जाना जाता है। भीम अवॉर्ड के लिए चयनित होने पर खुशी जाहिर करते हुए प्रदीप ने कहा मैंने हमेशा अपने खेल पर ध्यान दिया। भीम अवॉर्ड मिलना मेरे लिए बेहद खुशी का पल है।
मोनिका मलिक, हॉकी
गोहाना खंड के गांव गामड़ी की मूल निवासी मोनिका का जन्म 5 नवंबर, 1993 को हुआ। बचपन से ही पिता तकदीर सिंह से खेलों के लिए मिले प्रोत्साहन से मोनिका ने 8वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान ही हॉकी की ओर कदम बढ़ा दिए थे। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोनिका ने अपने खेल से सभी को प्रभावित किया। मोनिका टोक्यो ओलंपिक में खेलने गई भारतीय महिला हॉकी टीम का भी हिस्सा रही हैं। मोनिका के पिता तकदीर सिंह ने बेटी को भीम अवॉर्ड मिलने पर खुशी जताई और मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया।
धर्मबीर नैन, पैरा एथलेटिक्स
गांव भदाना निवासी धर्मबीर नैन को बचपन से ही खेलने का शौक रहा है। जून 2012 में नहर में नहाने के दौरान रीढ़ की हड्डी टूट गई और आधे से ज्यादा शरीर ने काम करना बंद कर दिया। धर्मबीर ने फिर भी हार नहीं मानी और खेल के अपने शौक को जारी रखा। वर्ष 2015 में धर्मबीर ने नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और कांस्य पदक अपने नाम किए। उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अमित के साथ धर्मबीर ने भी टोक्यो पैरालंपिक में भाग लिया। धर्मबीर 2016 के रियो पैरालंपिक, 2017 और 2019 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेने के साथ ही 2008 के एशियन गेम्स में रजत पदक जीत चुके हैं। भीम अवॉर्ड के लिए चयनित होने पर परिजनों में खुशी का माहौल है।
रवि दहिया, कुश्ती
सोनीपत के गांव नाहरी में 12 दिसंबर 1997 में जन्में रवि दहिया ने अपने खेल से न सिर्फ अपना बल्कि गांव का नाम भी विश्व पटल पर चमका दिया। रवि दहिया ने टोक्यो ओलंपिक में देश के लिए रजत पदक जीता। रवि दहिया की खेल उपलब्धियों के लिए भीम अवॉर्ड के लिए चयनित किया गया है। जिससे परिजनों में ही नहीं गांव में भी खुशी की लहर है।
सुमित, हॉकी
गांव कुराड़ निवासी सुमित को बचपन से ही हॉकी खेलने का शौक रहा है। विपरीत परिस्थितियों में भी सुमित ने कभी खेल को नहीं छोड़ा। अपनी कड़ी मेहनत से भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बने और टीम को नई बुलंदियों पर ले जाने में पूरा योगदान दिया। टोक्यो ओलंपिक में भी देश के लिए कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे हैं। सुमित को भीम अवॉर्ड के लिए चुने जाने पर परिजनों में खुशी की लहर है। सुमित के भाई ने बताया कि सुमित की उपलब्धि पर जो खुशी मिली है, उसको शब्दों में बयां नहीं कर सकते।

सुमित आंतिल, पैरा एथलेटिक्स
गांव खेवड़ा के रहने वाले रामकुमार के बेटे सुमित आंतिल को एक सड़क हादसे में पैर गंवाना पड़ा था। सुमित साई सोनीपत में कुश्ती का अभ्यास करने जाते थे। इसके बाद सुमित का पहलवान बनने का सपना टूट गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी और टोक्यो पैरालंपिक में भाला फेंक में विश्व रिकॉर्ड के साथ तिरंगा फहराकर देश का मान बढ़ाया। इससे पहले 2018 में एशियन पैरा गेम्स में प्रतिभाग, 2019 में इटली ग्रांड प्रिक्स में सिल्वर, 2019 में पेरिस ग्रांड प्रिक्स में सिल्वर, 2019 में इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड, 2019 में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर, 2021 में ट्यूनिशिया ग्रांड प्रिक्स में गोल्ड, 2021 में नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड और एफ- 64 श्रेणी में पांच बार विश्व रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं।

 मोनिका मलिक, हॉकी।

मोनिका मलिक, हॉकी।- फोटो : Sonipat

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