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सि गोशाला पर लाखों रुपये खर्च कर रहा निगम, उसे फ्री में चलाने को तैयार संस्था
Updated Fri, 01 Dec 2017 01:54 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
जिस गोशाला पर नगर निगम के अधिकारी हर महीने लाखों रुपये खर्च कर रहे है और उसके बावजूद भी गोवंश तड़प-तड़प कर मर रहे है। उस गोशाला को सामाजिक संस्था ने अपने खर्च पर चलाकर गोवंश को बचाने का आग्रह किया है। उसके लिए प्रशासन से कोई रुपया नहीं लिया जाएगा और गोशाला पर खर्च होने पर रुपये को अन्य विकास कार्य में खर्च करने की बात कही गई है। इसके लिए शहर से गोवंश पकड़वाने के लिए भी नगर निगम की ओर से ठेकेदार को रुपये दिए जाते है, लेकिन शहर से गोवंश भी फ्री में पकडने की बात सामाजिक संस्था के सदस्यों ने कही है। इसके लिए डीसी को पत्र भेजा गया है, लेकिन अब देखना है कि प्रशासन की ओर से उसपर क्या निर्णय लिया जाता है।
नगर निगम ने कुमासपुर में लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से गोशाला बनाई है, जिसमें शहर के लगभग एक हजार पशुओं को छोड़ दिया गया। निगम ने गोशाला बनाकर पशुओं को जरूर उसमें छोड़ दिया, लेकिन उनकी वहां बेकद्री हो रही है। पशुओं को पूरा चारा भी नहीं मिल रहा है तो बीमार होने पर उपचार तक नहीं किया जा रहा है। इस कारण ही पशु वहां तड़प-तड़प कर मर रहे है। इस स्थिति को देखते हुए पीपल फॉर एनीमल संस्था के सदस्य राम पाहुजा ने अपनी संस्था की ओर से पहल की है। राम पाहुजा की ओर से डीसी के नाम पत्र भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि नगर निगम को कुमासपुर गोशाला चलाने के लिए एक सामाजिक संस्था की जरूरत है। उनकी संस्था गोशाला को चलाने के लिए तैयार है और वह निस्वार्थ वहां गोवंश की देखभाल करेंगे। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि नगर निगम ने शहर से गोवंश पकडने का ठेका दिया हुआ है और इसपर काफी रुपया खर्च किया जा रहा है। लेकिन शहर से गोवंश पकडने का काम भी वह फ्री में खुद करेंगे, जिससे सड़क पर लावारिस गोवंश नहीं घूम सके। अब यह देखना है कि प्रशासन की ओर से इस पत्र पर क्या फैसला लिया जाता है।
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सोनीपत।
जिस गोशाला पर नगर निगम के अधिकारी हर महीने लाखों रुपये खर्च कर रहे है और उसके बावजूद भी गोवंश तड़प-तड़प कर मर रहे है। उस गोशाला को सामाजिक संस्था ने अपने खर्च पर चलाकर गोवंश को बचाने का आग्रह किया है। उसके लिए प्रशासन से कोई रुपया नहीं लिया जाएगा और गोशाला पर खर्च होने पर रुपये को अन्य विकास कार्य में खर्च करने की बात कही गई है। इसके लिए शहर से गोवंश पकड़वाने के लिए भी नगर निगम की ओर से ठेकेदार को रुपये दिए जाते है, लेकिन शहर से गोवंश भी फ्री में पकडने की बात सामाजिक संस्था के सदस्यों ने कही है। इसके लिए डीसी को पत्र भेजा गया है, लेकिन अब देखना है कि प्रशासन की ओर से उसपर क्या निर्णय लिया जाता है।
नगर निगम ने कुमासपुर में लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से गोशाला बनाई है, जिसमें शहर के लगभग एक हजार पशुओं को छोड़ दिया गया। निगम ने गोशाला बनाकर पशुओं को जरूर उसमें छोड़ दिया, लेकिन उनकी वहां बेकद्री हो रही है। पशुओं को पूरा चारा भी नहीं मिल रहा है तो बीमार होने पर उपचार तक नहीं किया जा रहा है। इस कारण ही पशु वहां तड़प-तड़प कर मर रहे है। इस स्थिति को देखते हुए पीपल फॉर एनीमल संस्था के सदस्य राम पाहुजा ने अपनी संस्था की ओर से पहल की है। राम पाहुजा की ओर से डीसी के नाम पत्र भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि नगर निगम को कुमासपुर गोशाला चलाने के लिए एक सामाजिक संस्था की जरूरत है। उनकी संस्था गोशाला को चलाने के लिए तैयार है और वह निस्वार्थ वहां गोवंश की देखभाल करेंगे। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि नगर निगम ने शहर से गोवंश पकडने का ठेका दिया हुआ है और इसपर काफी रुपया खर्च किया जा रहा है। लेकिन शहर से गोवंश पकडने का काम भी वह फ्री में खुद करेंगे, जिससे सड़क पर लावारिस गोवंश नहीं घूम सके। अब यह देखना है कि प्रशासन की ओर से इस पत्र पर क्या फैसला लिया जाता है।
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