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एसडीएम व सीएमओ से रिपोर्ट नहीं ले सकते तो डीसी को पद पर बने रहने का नहीं हक
Updated Sat, 22 Sep 2018 12:55 AM IST
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एसडीएम और सीएमओ से रिपोर्ट नहीं ले सकते तो डीसी को पद पर बने रहने का नहीं हक : एसके मित्तल
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन जस्टिस एसके मित्तल ने कैंसर पीड़ित को आर्थिक मदद मिलने में हो रही देरी को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। मामले में उन्होंने कहा कि पानीपत डीसी जब एसडीएम व सीएमओ से रिपोर्ट नहीं ले सकते तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई हक नहीं। उन्होंने हैरानी जताई कि आखिर संवेदनशील मामलों में अधिकारी इस तरह टालमटोल का रवैया कैसे अपना सकते हैं। यही नहीं, उन्होंने डीसी को आदेश जारी किए कैंसर पीड़ित को शीघ्र आर्थिक मदद दी जाए।
वह शुक्रवार को सोनीपत के एडीआर सेंटर में लोक अदालत लगाकर प्रदेशभर से आए लोगों की शिकायत सुन रहे थे। उनके साथ आयोग के सदस्य जस्टिस केसी पुरी व दीप भाटिया भी थे। आयोग की बेंच ने प्रदेशभर से आई 24 शिकायतें सुनी। ज्यादातर शिकायतें ऐसी आई जिनमें अधिकारियों की लापरवाही सामने आई। जस्टिस एसके मित्तल ने कई मामलों पर न केवल फटकार लगाई बल्कि अधिकारियों को तलब भी किया। पानीपत के शिकायतकर्ता जयनारायण ने शिकायत दी थी कि वह कई माह से ब्लड कैंसर से पीड़ित है। आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण वह इलाज करवाने में असमर्थ है। ऐसे में उसने प्रशासन से गुहार लगाई थी कि उसकी आर्थिक मदद की जाए, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी उसे आर्थिक मदद जारी नहीं की गई। यह मामला मानवाधिकार आयोग के सामने आया था। जिस पर पानीपत डीसी से रिपोर्ट मांगी गई तो डीसी की रिपोर्ट हैरान करने वाली रही। डीसी ने रिपोर्ट में हवाला दिया कि एसडीएम व सीएमओ को जयनारायण की मेडिकल रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया था, लेकिन इन अधिकारियों ने रिपोर्ट पेश नहीं की। जिसके कारण पीड़ित को मदद नहीं दी जा सकी। जस्टिस एसके मित्तल ने मामले की सुनवाई करते हुए हैरानी जताई कि कोई आईएएस अधिकारी अपने अधीनस्थ अधिकारियों से रिपोर्ट नहीं ले सकता तो उसे अपने पद पर बने रहने का हक नहीं। उन्होंने लोक अदालत में पहुंचे डीसी के प्रतिनिधि को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए गए कि इस मामले में शीघ्रता से मेडिकल रिपोर्ट मंगवाकर पीड़ित की मदद की जाए।
सोनीपत और करनाल में स्कूल बस हादसों में मासूमों की मौत पर मौलिक शिक्षा निदेशक तलब
आयोग के चेयरमैन जस्टिस एसके मित्तल ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि कुछ दिनों में स्कूल बसों से हादसे के करीब सात मामले समाचार पत्रों के माध्यम से उनके सामने आए और सभी पर स्वत: संज्ञान लिया गया। जस्टिस मित्तल ने करनाल व सोनीपत के निजी स्कूलों की बस से बच्चों की मौत के मामले में कहा कि मासूमों की मौत में भी आखिर अधिकारी लापरवाही क्यों करते हैं। उन्होंने समझौता करने वाले मासूमों के अभिभावकों पर भी हैरानी जताते हुए कहा कि सब मिल गए हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि शक है कि समझौता करने वाला मासूम का पिता है भी या नहीं। मुरथल थाना क्षेत्र में 6 वर्षीय बच्चे की मौत पर पिता कैसे समझौता कर सकता है। उन्होंने इस मामले में मौलिक शिक्षा निदेशालय के निदेशक को रिपोर्ट के साथ तलब किया व सोनीपत व करनाल के एसपी को मामले में दोबारा जांच करने के निर्देश दिए। साथ ही शिक्षा विभाग से इस संबंध में गाइडलाइन जारी करने के निर्देश भी दिए।
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पुलिस के खिलाफ आती हैं सबसे ज्यादा शिकायत
जस्टिस एसके मित्तल ने बताया कि हरियाणा में सबसे ज्यादा मामलों में पुलिस के खिलाफ शिकायतें आ रही हैं। एक मामले को सुनवाई करते हुए उन्होंने हैरानी जताई कि भीड़ से बचाने के लिए पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में बंद कर दिया। इस मामले में पुलिस की शिकायत मानवाधिकार में की गई थी। जस्टिस मित्तल ने इस मामले में डीएसपी वीरेंद्र को फटकार लगाई और शीघ्र रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस के अलावा पारिवारिक विवादों के मामले ज्यादा आ रहे हैं। इनमें से शादी के बाद झगड़ों के मामलों की संख्या ज्यादा है। जस्टिस मित्तल ने बताया कि 23 अप्रैल से अब तक आयोग में 2400 से ज्यादा शिकायतें आई हैं और अब तक एक हजार से ज्यादा शिकायतें का निपटान किया जा चुका है।
नहर में डूबे युवक के परिजनों को तीन लाख मुआवजा
पानीपत के मॉडल टाउन थाना क्षेत्र के मामले की सुनवाई करते हुए उन्होंने नहर के पास से लापता युवक के परिजनों को तीन लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला दिया। पानीपत निवासी पुष्पा ने उसके बेटे चंदन को नहर में कुछ युवकों पर उसे डूबाने का आरोप लगाया था। मामले में लोक अदालत में पेश हुए इंस्पेक्टर अमित कौशिक ने बताया कि मामले की कई बार जांच की जा चुकी है। यहां तक की जिस युवक पर आरोप था उसे पांच बाद हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, लेकिन जांच में आया कि चंदन की डूबने से मौत हुई है। जिस पर अदालत ने भी इसे मानते हुए सरकार को तीन लाख आर्थिक मदद देने का निर्देश दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन जस्टिस एसके मित्तल ने कैंसर पीड़ित को आर्थिक मदद मिलने में हो रही देरी को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। मामले में उन्होंने कहा कि पानीपत डीसी जब एसडीएम व सीएमओ से रिपोर्ट नहीं ले सकते तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई हक नहीं। उन्होंने हैरानी जताई कि आखिर संवेदनशील मामलों में अधिकारी इस तरह टालमटोल का रवैया कैसे अपना सकते हैं। यही नहीं, उन्होंने डीसी को आदेश जारी किए कैंसर पीड़ित को शीघ्र आर्थिक मदद दी जाए।
वह शुक्रवार को सोनीपत के एडीआर सेंटर में लोक अदालत लगाकर प्रदेशभर से आए लोगों की शिकायत सुन रहे थे। उनके साथ आयोग के सदस्य जस्टिस केसी पुरी व दीप भाटिया भी थे। आयोग की बेंच ने प्रदेशभर से आई 24 शिकायतें सुनी। ज्यादातर शिकायतें ऐसी आई जिनमें अधिकारियों की लापरवाही सामने आई। जस्टिस एसके मित्तल ने कई मामलों पर न केवल फटकार लगाई बल्कि अधिकारियों को तलब भी किया। पानीपत के शिकायतकर्ता जयनारायण ने शिकायत दी थी कि वह कई माह से ब्लड कैंसर से पीड़ित है। आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण वह इलाज करवाने में असमर्थ है। ऐसे में उसने प्रशासन से गुहार लगाई थी कि उसकी आर्थिक मदद की जाए, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी उसे आर्थिक मदद जारी नहीं की गई। यह मामला मानवाधिकार आयोग के सामने आया था। जिस पर पानीपत डीसी से रिपोर्ट मांगी गई तो डीसी की रिपोर्ट हैरान करने वाली रही। डीसी ने रिपोर्ट में हवाला दिया कि एसडीएम व सीएमओ को जयनारायण की मेडिकल रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया था, लेकिन इन अधिकारियों ने रिपोर्ट पेश नहीं की। जिसके कारण पीड़ित को मदद नहीं दी जा सकी। जस्टिस एसके मित्तल ने मामले की सुनवाई करते हुए हैरानी जताई कि कोई आईएएस अधिकारी अपने अधीनस्थ अधिकारियों से रिपोर्ट नहीं ले सकता तो उसे अपने पद पर बने रहने का हक नहीं। उन्होंने लोक अदालत में पहुंचे डीसी के प्रतिनिधि को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए गए कि इस मामले में शीघ्रता से मेडिकल रिपोर्ट मंगवाकर पीड़ित की मदद की जाए।
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सोनीपत और करनाल में स्कूल बस हादसों में मासूमों की मौत पर मौलिक शिक्षा निदेशक तलब
आयोग के चेयरमैन जस्टिस एसके मित्तल ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि कुछ दिनों में स्कूल बसों से हादसे के करीब सात मामले समाचार पत्रों के माध्यम से उनके सामने आए और सभी पर स्वत: संज्ञान लिया गया। जस्टिस मित्तल ने करनाल व सोनीपत के निजी स्कूलों की बस से बच्चों की मौत के मामले में कहा कि मासूमों की मौत में भी आखिर अधिकारी लापरवाही क्यों करते हैं। उन्होंने समझौता करने वाले मासूमों के अभिभावकों पर भी हैरानी जताते हुए कहा कि सब मिल गए हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि शक है कि समझौता करने वाला मासूम का पिता है भी या नहीं। मुरथल थाना क्षेत्र में 6 वर्षीय बच्चे की मौत पर पिता कैसे समझौता कर सकता है। उन्होंने इस मामले में मौलिक शिक्षा निदेशालय के निदेशक को रिपोर्ट के साथ तलब किया व सोनीपत व करनाल के एसपी को मामले में दोबारा जांच करने के निर्देश दिए। साथ ही शिक्षा विभाग से इस संबंध में गाइडलाइन जारी करने के निर्देश भी दिए।
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पुलिस के खिलाफ आती हैं सबसे ज्यादा शिकायत
जस्टिस एसके मित्तल ने बताया कि हरियाणा में सबसे ज्यादा मामलों में पुलिस के खिलाफ शिकायतें आ रही हैं। एक मामले को सुनवाई करते हुए उन्होंने हैरानी जताई कि भीड़ से बचाने के लिए पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में बंद कर दिया। इस मामले में पुलिस की शिकायत मानवाधिकार में की गई थी। जस्टिस मित्तल ने इस मामले में डीएसपी वीरेंद्र को फटकार लगाई और शीघ्र रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस के अलावा पारिवारिक विवादों के मामले ज्यादा आ रहे हैं। इनमें से शादी के बाद झगड़ों के मामलों की संख्या ज्यादा है। जस्टिस मित्तल ने बताया कि 23 अप्रैल से अब तक आयोग में 2400 से ज्यादा शिकायतें आई हैं और अब तक एक हजार से ज्यादा शिकायतें का निपटान किया जा चुका है।
नहर में डूबे युवक के परिजनों को तीन लाख मुआवजा
पानीपत के मॉडल टाउन थाना क्षेत्र के मामले की सुनवाई करते हुए उन्होंने नहर के पास से लापता युवक के परिजनों को तीन लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला दिया। पानीपत निवासी पुष्पा ने उसके बेटे चंदन को नहर में कुछ युवकों पर उसे डूबाने का आरोप लगाया था। मामले में लोक अदालत में पेश हुए इंस्पेक्टर अमित कौशिक ने बताया कि मामले की कई बार जांच की जा चुकी है। यहां तक की जिस युवक पर आरोप था उसे पांच बाद हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, लेकिन जांच में आया कि चंदन की डूबने से मौत हुई है। जिस पर अदालत ने भी इसे मानते हुए सरकार को तीन लाख आर्थिक मदद देने का निर्देश दिया।