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शहीद की पत्नी ने दो घंटे मौत से लड़ी जंग, अस्पताल की मरी मानवता से हारी
Updated Sat, 30 Dec 2017 01:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। कारगिल शहीद की विधवा दो घंटे मौत से लड़ती रही, लेकिन वह अस्पताल प्रबंधन की मरी मानवता के सामने हार गई। प्रबंधन की जिद्द के चलते मां-बेटे को डिस्पेंसरी से घर के चक्कर लगाने पड़े। इस बीच शहीद की विधवा ने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रबंधन आधार कार्ड जमा करवाने पर ही अड़ा रहा। मां की मौत के बाद बेटे ने निजी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ इंसाफ की लड़ाई लड़ने का फैसला लिया है। बेटे पवन ने बताया कि रविवार को मां की तेरहवीं की रस्म पूरी करूंगा। इसके बाद पुलिस को शिकायत देकर केस दर्ज करवाने की मांग करेंगे। वहीं सरकार और विभाग ने शहीद की विधवा की मौत के 36 घंटे बाद भी मामला संज्ञान में नहीं लिया। जबकि निजी प्रबंधन के इस रवैये का वीडियो वायरल हो चुका है और पुलिस को शिकायत का इंतजार है।
गांव महलाना निवासी कारगिल शहीद लक्ष्मण दास की वीरांगना शकुंतला को हार्ट की बीमारी थी। साथ ही शरीर में सूजन भी थी। उनका बेटा पवन बाल्याण अपनी पत्नी के भाई के साथ मां को लेकर आर्मी कार्यालय पहुंचा। यहां से आर्मी की डिस्पेंसरी से रेफरल लेकर निजी अस्पताल में पहुंचे। शकुंतला को दिल्ली रोड स्थित निजी अस्पताल में ले जाया गया था। जहां अस्पताल प्रबंधन ने उनसे आधार कार्ड की मांग की थी। आधार कार्ड की कॉपी मोबाइल में होने और जल्द मुहैया कराने के आश्वासन के बावजूद अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। शहीद का बेटा मां के इलाज के लिए गिड़गिड़ाता रहा, उसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन अपनी बात पर अड़ा रहा। पवन ने आरोप लगाया था कि उसके पास आधार कार्ड को छोड़कर सभी कागजात थे फिर भी उसकी सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान अस्पताल में ऊंची आवाज में बोलने पर पुलिस को बुलवा लिया गया था। पुलिस ने भी उसे ही चुप रहने को कहा था, जिसके चलते उसे अपनी मां को वापस लेकर जाना पड़ा था।
दो घंटे तक मां को लेकर घूमता रहा पवन
पवन ने बताया कि वह अपनी मां को अस्पताल से लेकर वापस डिस्पेंसरी में पहुंचा था। वहां से दिल्ली के लिए रेफरल कागजात तैयार कराए थे। वहां से आधार कार्ड की कॉपी लेने के लिए वह अपने घर पहुंचा। जहां पर उसकी मां की हालत अधिक बिगड़ चुकी थी। उसके बाद वह उसे लेकर सोनीपत के हांडा अस्पताल में पहुंचे थे। हालांकि तब तक उनकी मां मौत हो चुकी थी।
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किसी ओरमां के साथ ऐसा ना हो इसलिए कार्रवाई जरूरी
पवन बाल्याण ने बताया उसकी अस्पताल से कोई जाति दुश्मनी नहीं है। उन्होंने गलत किया है, जिसे लेकर वह उनके खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। वह चाहते हैं कि उनकी मां की तरफ किसी अन्य की मां के साथ ऐसा न हो सके, इसलिए उन्होंने लड़ाई लडने का निर्णय लिया है।
वर्जन
अभी तक किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत लेकर आएगा तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
कृष्ण कुमार, प्रभारी, सिक्का कॉलोनी चौकी।
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सोनीपत। कारगिल शहीद की विधवा दो घंटे मौत से लड़ती रही, लेकिन वह अस्पताल प्रबंधन की मरी मानवता के सामने हार गई। प्रबंधन की जिद्द के चलते मां-बेटे को डिस्पेंसरी से घर के चक्कर लगाने पड़े। इस बीच शहीद की विधवा ने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रबंधन आधार कार्ड जमा करवाने पर ही अड़ा रहा। मां की मौत के बाद बेटे ने निजी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ इंसाफ की लड़ाई लड़ने का फैसला लिया है। बेटे पवन ने बताया कि रविवार को मां की तेरहवीं की रस्म पूरी करूंगा। इसके बाद पुलिस को शिकायत देकर केस दर्ज करवाने की मांग करेंगे। वहीं सरकार और विभाग ने शहीद की विधवा की मौत के 36 घंटे बाद भी मामला संज्ञान में नहीं लिया। जबकि निजी प्रबंधन के इस रवैये का वीडियो वायरल हो चुका है और पुलिस को शिकायत का इंतजार है।
गांव महलाना निवासी कारगिल शहीद लक्ष्मण दास की वीरांगना शकुंतला को हार्ट की बीमारी थी। साथ ही शरीर में सूजन भी थी। उनका बेटा पवन बाल्याण अपनी पत्नी के भाई के साथ मां को लेकर आर्मी कार्यालय पहुंचा। यहां से आर्मी की डिस्पेंसरी से रेफरल लेकर निजी अस्पताल में पहुंचे। शकुंतला को दिल्ली रोड स्थित निजी अस्पताल में ले जाया गया था। जहां अस्पताल प्रबंधन ने उनसे आधार कार्ड की मांग की थी। आधार कार्ड की कॉपी मोबाइल में होने और जल्द मुहैया कराने के आश्वासन के बावजूद अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। शहीद का बेटा मां के इलाज के लिए गिड़गिड़ाता रहा, उसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन अपनी बात पर अड़ा रहा। पवन ने आरोप लगाया था कि उसके पास आधार कार्ड को छोड़कर सभी कागजात थे फिर भी उसकी सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान अस्पताल में ऊंची आवाज में बोलने पर पुलिस को बुलवा लिया गया था। पुलिस ने भी उसे ही चुप रहने को कहा था, जिसके चलते उसे अपनी मां को वापस लेकर जाना पड़ा था।
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दो घंटे तक मां को लेकर घूमता रहा पवन
पवन ने बताया कि वह अपनी मां को अस्पताल से लेकर वापस डिस्पेंसरी में पहुंचा था। वहां से दिल्ली के लिए रेफरल कागजात तैयार कराए थे। वहां से आधार कार्ड की कॉपी लेने के लिए वह अपने घर पहुंचा। जहां पर उसकी मां की हालत अधिक बिगड़ चुकी थी। उसके बाद वह उसे लेकर सोनीपत के हांडा अस्पताल में पहुंचे थे। हालांकि तब तक उनकी मां मौत हो चुकी थी।
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किसी ओरमां के साथ ऐसा ना हो इसलिए कार्रवाई जरूरी
पवन बाल्याण ने बताया उसकी अस्पताल से कोई जाति दुश्मनी नहीं है। उन्होंने गलत किया है, जिसे लेकर वह उनके खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। वह चाहते हैं कि उनकी मां की तरफ किसी अन्य की मां के साथ ऐसा न हो सके, इसलिए उन्होंने लड़ाई लडने का निर्णय लिया है।
वर्जन
अभी तक किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत लेकर आएगा तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
कृष्ण कुमार, प्रभारी, सिक्का कॉलोनी चौकी।