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कुमासपुर गोशाला में गोवंश की बेकद्री, रोजाना कई की मौत हो रही, टैग से जख्म बनकर कान टूटकर गिरे
Updated Sun, 19 Nov 2017 11:42 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
सरकार भले ही गोवंश बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन सरकारी गोशालाओं में गोवंश की बेकद्री हो रही है। सरकारी गोशालाओं में गोवंश जख्मी होकर तड़प-तड़पकर मर रहे हैं। यहां कुमासपुर में बनी नगर निगम की नंदीशाला में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां नगर निगम व पशुपालन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से गोवंश रोजाना तड़पकर दम तोड़ देते हैं। इसके बावजूद अधिकारी नहीं जाग रहे हैं और उनको देखने तक जाने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। गोवंश की पहचान के लिए पशुपालन विभाग ने जिन टैग को लगाया है, वह टैग भी उनके लिए जानलेवा बन रहे हैं। टैग के कारण गोवंश के कान में जख्म बन रहा है और उसके बाद इंफेक्शन फैलने पर उनकी मौत हो जाती है। अब शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन ने मामला संज्ञान में आने पर कार्रवाई की बात कही है।
कुमासपुर में डेढ़ महीने पहले ही करोड़ों रुपये की लागत से नगर निगम की ओर से गोशाला बनाई गई थी। यह गोशाला 2 हजार गोवंशों के लिए बनाई जानी है, लेकिन शहर को स्ट्रे कैटल फ्री करने के लिए उसे जल्द शुरू कर दिया गया। वहां 6 शेड बनाए जाने थे, लेकिन दो शेड बनाकर ही गोशाला में शहर से पकड़कर बड़े व छोटे गोवंश छोड़े जाने लगे। नगर निगम के अधिकारियों ने गोशाला में गोवंश छुड़वा जरूर दिए, लेकिन उसके बाद उनकी सुध ही नहीं ली जाती है।
वहां दो शेड में केवल 400 गोवंश रह सकते हैं, लेकिन वहां एक हजार से ज्यादा गोवंश छोड़े गए हैं। जिससे वह गोवंश टिन शेड की जगह खुले में बने बाड़े में घूमते रहते हैं। उनमें भी गाय, नंदी, बछड़े सभी एक साथ छोड़ दिए गए हैं, जिससे वहां रोजाना कई बछड़ों की मौत हो जाती हैं। वहां गोवंश कई दिन बीमार होकर तड़प-तड़पकर दम तोड़ देते है। उसके बाद भी मरे हुए गोवंश वहां जिंदा गोवंश के बीच में पड़े रहते हैं, जिससे बीमारियां फैलनी शुरू हो जाती है। इस तरह से नगर निगम की गोशाला में हालात चल रहे हैं।
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वाहन से फेंक दिए जाते है गोवंश
नगर निगम ने जिस ठेकेदार को शहर से गोवंश पकड़कर गोशाला में छोड़ने का ठेका दिया हुआ है। वह अपनी गाड़ी में कई-कई गोवंश को भरकर लाते हैं और गोशाला में बेकद्री दिखाते हुए गोवंश को ऐसे ही धकेल देते हैं। जिससे कई छोटे गोवंश की पैर की हड्डी टूट गई है और वह जख्मी होकर एक ही जगह पड़े रहते हैं। वह न चारा खा पाते हैं और न पानी पी पाते हैं। इससे उनकी कुछ दिन बाद मौत हो जाती है। इस तरह ही बड़े गोवंश भी कई बार गाड़ी से नीचे धकेलने पर जख्मी हो गए हैं और यह सबकुछ ठेकेदार के कारिंदों के कारण हो रहा है।
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टैग से कान पर जख्म बना, इंफेक्शन फैलने से मरे बछड़े
पशुपालन विभाग की ओर से सभी गोशालाओं में मौजूद गोवंश के कान पर टैग लगाया जा रहा है। इस तरह ही कुमासपुर गोशाला में मौजूद गोवंश के कान पर भी टैग लगाया गया। लेकिन वह टैग ही गोवंश के लिए जानलेवा बन गया है। उस टैग के लगाने के बाद कई बछड़ों के कान पर जख्म बन गया, क्योंकि पशुपालन विभाग की टीम ने दोबारा वहां जाकर देखने की जहमत नहीं उठाई। उस टैग में जख्म बनने के कारण किसी बछड़े का कान टूटकर गिर जाता है तो किसी के इंफेक्शन फैलने से बछड़े की तड़प-तड़पकर मौत हो जाती है।
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गोशाला में एक हजार से ज्यादा गोवंश, चारा बहुत कम पहुंच रहा
नगर निगम ने गोशाला जरूर शुरू करा दी, लेकिन उसमें गोवंश को मरने के लिए छोड़ दिया गया है। कुमासपुर गोशाला में गोवंश के चारे के लिए ठेका दिया हुआ है, जिससे किसी भी गोवंश की बिना चारे के मौत नहीं हो सके। लेकिन वहां हालात कुछ बदले हुए हैं और वहां जितना चारा पहुंचता है, उससे दोगुने गोवंश मौजूद हैं। वहां सूखा चारा उस बाड़े में डाल दिया जाता है, जिसमें गाय, नंदी, बछड़े सभी एक जगह घूमते रहते हैं। वहां भूख के कारण गोवंश मिट्टी तक खाने को मजबूर रहते है, क्योंकि उनको भरपेट चारा ही नहीं मिलता है। इस तरह के हालात गोशाला में चल रहे हैं और नगर निगम से लेकर पशुपालन विभाग तक के अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं।
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सर्दी के कारण भी हो रही मौत
गोशाला में रोजाना गोवंश की मौत होने का कारण सर्दी भी बताई जा रही है। क्योंकि वहां केवल दो टिन शेड बनी हैं और उस टिन शेड में ज्यादा से ज्यादा 400 गोवंश आ सकते हैं। इस तरह लगभग 700 गोवंश को ऐसे ही खुले में बाड़े में रहना पड़ता है और इस समय सर्दी का मौसम होने के कारण गोवंश की हालत खराब हो जाती है। वह दो-तीन दिन जरूर किसी तरह से सर्दी को झेलते हैं, लेकिन उसके बाद उनकी मौत हो जाती है। उनकी मौत होने के बाद भी बाड़े से उठाया नहीं जाता और उनका शव वहीं पड़ा रहता है। इस तरह बड़ी लापरवाही बरती जा रही है।
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सामाजिक संस्था ने बढ़ाया कदम, शिकायत तक कराई
भारतीय नव निर्माण सेना के पदाधिकारियों ने जरूर गोशाला में रोजाना जाकर गोवंश के चारे का इंतजाम करने के साथ ही उनका उपचार करने का बीड़ा उठाया है। इस सामाजिक संस्था के पदाधिकारी राम ने बताया कि उनको जब गोशाला की स्थिति के बारे में पता चला तो उन्होंने डीसी के अलावा सीएम विंडो तक उसकी शिकायत की, लेकिन उसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। नगर निगम या पशुपालन विभाग का कोई अधिकारी गोशाला तक नहीं पहुंचा। उसके बाद उनकी संस्था के लोग खुद ही चारा लेकर गोशाला जाते हैं तो वहां गोवंश का उपचार भी कर रहे हैं। वहां कई गोवंश की आंखों में जख्म के कारण कीड़े पड़ गए हैं तो उनका भी उपचार किया जा रहा है।
गोशाला में गोवंश की मौत होने का मामला अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं था। यह मामला संज्ञान में अब आया है और अधिकारियों को वहां भेजकर निरीक्षण कराने के साथ ही गोवंश का उपचार कराया जाएगा। वहीं गोशाला को सही तरीके से संचालित करने के लिए सामाजिक संस्थाओं से बात भी चल रही है, जिससे उनको गोशाला सौंप दी जाए और गोवंश को किसी तरह की परेशानी न होे। -कविता जैन, मंत्री शहरी स्थानीय निकाय
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सोनीपत।
सरकार भले ही गोवंश बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन सरकारी गोशालाओं में गोवंश की बेकद्री हो रही है। सरकारी गोशालाओं में गोवंश जख्मी होकर तड़प-तड़पकर मर रहे हैं। यहां कुमासपुर में बनी नगर निगम की नंदीशाला में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां नगर निगम व पशुपालन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से गोवंश रोजाना तड़पकर दम तोड़ देते हैं। इसके बावजूद अधिकारी नहीं जाग रहे हैं और उनको देखने तक जाने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। गोवंश की पहचान के लिए पशुपालन विभाग ने जिन टैग को लगाया है, वह टैग भी उनके लिए जानलेवा बन रहे हैं। टैग के कारण गोवंश के कान में जख्म बन रहा है और उसके बाद इंफेक्शन फैलने पर उनकी मौत हो जाती है। अब शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन ने मामला संज्ञान में आने पर कार्रवाई की बात कही है।
कुमासपुर में डेढ़ महीने पहले ही करोड़ों रुपये की लागत से नगर निगम की ओर से गोशाला बनाई गई थी। यह गोशाला 2 हजार गोवंशों के लिए बनाई जानी है, लेकिन शहर को स्ट्रे कैटल फ्री करने के लिए उसे जल्द शुरू कर दिया गया। वहां 6 शेड बनाए जाने थे, लेकिन दो शेड बनाकर ही गोशाला में शहर से पकड़कर बड़े व छोटे गोवंश छोड़े जाने लगे। नगर निगम के अधिकारियों ने गोशाला में गोवंश छुड़वा जरूर दिए, लेकिन उसके बाद उनकी सुध ही नहीं ली जाती है।
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वहां दो शेड में केवल 400 गोवंश रह सकते हैं, लेकिन वहां एक हजार से ज्यादा गोवंश छोड़े गए हैं। जिससे वह गोवंश टिन शेड की जगह खुले में बने बाड़े में घूमते रहते हैं। उनमें भी गाय, नंदी, बछड़े सभी एक साथ छोड़ दिए गए हैं, जिससे वहां रोजाना कई बछड़ों की मौत हो जाती हैं। वहां गोवंश कई दिन बीमार होकर तड़प-तड़पकर दम तोड़ देते है। उसके बाद भी मरे हुए गोवंश वहां जिंदा गोवंश के बीच में पड़े रहते हैं, जिससे बीमारियां फैलनी शुरू हो जाती है। इस तरह से नगर निगम की गोशाला में हालात चल रहे हैं।
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वाहन से फेंक दिए जाते है गोवंश
नगर निगम ने जिस ठेकेदार को शहर से गोवंश पकड़कर गोशाला में छोड़ने का ठेका दिया हुआ है। वह अपनी गाड़ी में कई-कई गोवंश को भरकर लाते हैं और गोशाला में बेकद्री दिखाते हुए गोवंश को ऐसे ही धकेल देते हैं। जिससे कई छोटे गोवंश की पैर की हड्डी टूट गई है और वह जख्मी होकर एक ही जगह पड़े रहते हैं। वह न चारा खा पाते हैं और न पानी पी पाते हैं। इससे उनकी कुछ दिन बाद मौत हो जाती है। इस तरह ही बड़े गोवंश भी कई बार गाड़ी से नीचे धकेलने पर जख्मी हो गए हैं और यह सबकुछ ठेकेदार के कारिंदों के कारण हो रहा है।
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टैग से कान पर जख्म बना, इंफेक्शन फैलने से मरे बछड़े
पशुपालन विभाग की ओर से सभी गोशालाओं में मौजूद गोवंश के कान पर टैग लगाया जा रहा है। इस तरह ही कुमासपुर गोशाला में मौजूद गोवंश के कान पर भी टैग लगाया गया। लेकिन वह टैग ही गोवंश के लिए जानलेवा बन गया है। उस टैग के लगाने के बाद कई बछड़ों के कान पर जख्म बन गया, क्योंकि पशुपालन विभाग की टीम ने दोबारा वहां जाकर देखने की जहमत नहीं उठाई। उस टैग में जख्म बनने के कारण किसी बछड़े का कान टूटकर गिर जाता है तो किसी के इंफेक्शन फैलने से बछड़े की तड़प-तड़पकर मौत हो जाती है।
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गोशाला में एक हजार से ज्यादा गोवंश, चारा बहुत कम पहुंच रहा
नगर निगम ने गोशाला जरूर शुरू करा दी, लेकिन उसमें गोवंश को मरने के लिए छोड़ दिया गया है। कुमासपुर गोशाला में गोवंश के चारे के लिए ठेका दिया हुआ है, जिससे किसी भी गोवंश की बिना चारे के मौत नहीं हो सके। लेकिन वहां हालात कुछ बदले हुए हैं और वहां जितना चारा पहुंचता है, उससे दोगुने गोवंश मौजूद हैं। वहां सूखा चारा उस बाड़े में डाल दिया जाता है, जिसमें गाय, नंदी, बछड़े सभी एक जगह घूमते रहते हैं। वहां भूख के कारण गोवंश मिट्टी तक खाने को मजबूर रहते है, क्योंकि उनको भरपेट चारा ही नहीं मिलता है। इस तरह के हालात गोशाला में चल रहे हैं और नगर निगम से लेकर पशुपालन विभाग तक के अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं।
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सर्दी के कारण भी हो रही मौत
गोशाला में रोजाना गोवंश की मौत होने का कारण सर्दी भी बताई जा रही है। क्योंकि वहां केवल दो टिन शेड बनी हैं और उस टिन शेड में ज्यादा से ज्यादा 400 गोवंश आ सकते हैं। इस तरह लगभग 700 गोवंश को ऐसे ही खुले में बाड़े में रहना पड़ता है और इस समय सर्दी का मौसम होने के कारण गोवंश की हालत खराब हो जाती है। वह दो-तीन दिन जरूर किसी तरह से सर्दी को झेलते हैं, लेकिन उसके बाद उनकी मौत हो जाती है। उनकी मौत होने के बाद भी बाड़े से उठाया नहीं जाता और उनका शव वहीं पड़ा रहता है। इस तरह बड़ी लापरवाही बरती जा रही है।
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सामाजिक संस्था ने बढ़ाया कदम, शिकायत तक कराई
भारतीय नव निर्माण सेना के पदाधिकारियों ने जरूर गोशाला में रोजाना जाकर गोवंश के चारे का इंतजाम करने के साथ ही उनका उपचार करने का बीड़ा उठाया है। इस सामाजिक संस्था के पदाधिकारी राम ने बताया कि उनको जब गोशाला की स्थिति के बारे में पता चला तो उन्होंने डीसी के अलावा सीएम विंडो तक उसकी शिकायत की, लेकिन उसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। नगर निगम या पशुपालन विभाग का कोई अधिकारी गोशाला तक नहीं पहुंचा। उसके बाद उनकी संस्था के लोग खुद ही चारा लेकर गोशाला जाते हैं तो वहां गोवंश का उपचार भी कर रहे हैं। वहां कई गोवंश की आंखों में जख्म के कारण कीड़े पड़ गए हैं तो उनका भी उपचार किया जा रहा है।
गोशाला में गोवंश की मौत होने का मामला अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं था। यह मामला संज्ञान में अब आया है और अधिकारियों को वहां भेजकर निरीक्षण कराने के साथ ही गोवंश का उपचार कराया जाएगा। वहीं गोशाला को सही तरीके से संचालित करने के लिए सामाजिक संस्थाओं से बात भी चल रही है, जिससे उनको गोशाला सौंप दी जाए और गोवंश को किसी तरह की परेशानी न होे। -कविता जैन, मंत्री शहरी स्थानीय निकाय