{"_id":"6acd54cddfe18c5a8a08d864","slug":"34-farmers-from-six-villages-detained-sonipat-news-c-197-1-snp1001-162279-2026-10-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: पावरग्रिड की मुआवजा नीति के विरोध में धरने पर बैठे छह गांवों के 34 किसान हिरासत में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: पावरग्रिड की मुआवजा नीति के विरोध में धरने पर बैठे छह गांवों के 34 किसान हिरासत में
विज्ञापन
सोनीपत। पावरग्रिड की भूमि के मूल्यांकन और मुआवजा नीति में बदलाव की मांग के लिए गुहणा धरना स्थल पर बैठे छह गांवों के 34 किसानों को पुलिस ने हिरासत में लेकर मोहाना थाने पहुंचा दिया। किसानों को शाम सात बजे छोड़ा गया।
किसानों का आरोप था कि वह 7 जून से शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे और अपनी मांगों को लेकर विभिन्न स्तरों पर लिखित शिकायतें भी दे चुके थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ बैठक में तीन-चार दिन के भीतर समाधान का आश्वासन मिलने के बावजूद प्रशासन ने किसानों को हिरासत में लेकर मौके पर काम शुरू कराने का प्रयास किया। इससे किसानों में रोष है।
किसान युद्धविंद्र और संदीप के अनुसार अभिमन्यु कोहाड़ ने मांगों को लेकर पांच दिन तक अनशन किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ अभिमन्यु कोहाड़ और प्रभावित किसानों की बैठक हुई थी। किसानों का दावा था कि बैठक में उनकी समस्या का तीन-चार दिन में समाधान का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद मांगों पर अंतिम निर्णय न होने से धरना जारी रहा।
विज्ञापन
कैबिनेट मंत्री ने भी मांगों का किया था समर्थन :
किसानों का कहना था कि कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने उनकी मांगों को जायज मानते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समर्थन दिया था। वहीं, किसानों ने दावा किया कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल की ओर से भी भूमि के मूल्यांकन में उचित मुआवजे पर सहमति दी गई थी और इस दिशा में बदलाव भी हुआ था।
सहमति बैठक के बजाय कार्रवाई पर उठाए सवाल :
किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन को उपायुक्त के माध्यम से वार्ता कर सहमति बनाने की पहल करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा करने के बजाय मौका ड्यूटी मजिस्ट्रेट डीडीपीओ मनीष मलिक को भेजकर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। इसे अनुचित बताते हुए किसानों ने कहा कि लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे किसानों को हिरासत में लेने के बजाय बातचीत से समस्या का समाधान किया जाना चाहिए था। किसानों ने कहा कि पावरग्रिड की भूमि के मूल्यांकन और मुआवजे से संबंधित विवाद का जल्द समाधान किया जाए ताकि प्रभावित परिवारों को उचित मूल्य मिल सके।
विज्ञापन
किसानों का आरोप था कि वह 7 जून से शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे और अपनी मांगों को लेकर विभिन्न स्तरों पर लिखित शिकायतें भी दे चुके थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ बैठक में तीन-चार दिन के भीतर समाधान का आश्वासन मिलने के बावजूद प्रशासन ने किसानों को हिरासत में लेकर मौके पर काम शुरू कराने का प्रयास किया। इससे किसानों में रोष है।
विज्ञापन
किसान युद्धविंद्र और संदीप के अनुसार अभिमन्यु कोहाड़ ने मांगों को लेकर पांच दिन तक अनशन किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ अभिमन्यु कोहाड़ और प्रभावित किसानों की बैठक हुई थी। किसानों का दावा था कि बैठक में उनकी समस्या का तीन-चार दिन में समाधान का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद मांगों पर अंतिम निर्णय न होने से धरना जारी रहा।
विज्ञापन
कैबिनेट मंत्री ने भी मांगों का किया था समर्थन :
किसानों का कहना था कि कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने उनकी मांगों को जायज मानते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समर्थन दिया था। वहीं, किसानों ने दावा किया कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल की ओर से भी भूमि के मूल्यांकन में उचित मुआवजे पर सहमति दी गई थी और इस दिशा में बदलाव भी हुआ था।
सहमति बैठक के बजाय कार्रवाई पर उठाए सवाल :
किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन को उपायुक्त के माध्यम से वार्ता कर सहमति बनाने की पहल करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा करने के बजाय मौका ड्यूटी मजिस्ट्रेट डीडीपीओ मनीष मलिक को भेजकर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। इसे अनुचित बताते हुए किसानों ने कहा कि लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे किसानों को हिरासत में लेने के बजाय बातचीत से समस्या का समाधान किया जाना चाहिए था। किसानों ने कहा कि पावरग्रिड की भूमि के मूल्यांकन और मुआवजे से संबंधित विवाद का जल्द समाधान किया जाए ताकि प्रभावित परिवारों को उचित मूल्य मिल सके।