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इंजीनियरों ने बनाए वायरलैस सिस्टम वाले जैकेट व कार्ड, उनके सहारे नकल करते हुए पकड़े गए
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इंजीनियरिंग छात्रों ने वायरलेस सिस्टम वाले जैकेट और कार्ड तैयार कर की नकल
अंकित चौहान
सोनीपत। इंजीनियरिंग के छात्र नए-नए उपकरण तैयार कर रहे हैं, लेकिन उन उपकरणों का इस्तेमाल गलत कार्यों में भी करके खुद फंस रहे हैं। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल के इंजीनियरिंग के छात्रों ने ऐसा ही कुछ किया है। जहां नकल करने के लिए वायरलेस सिस्टम वाले जैकेट व कार्ड बना डाले और उनके सहारे नकल भी करनी शुरू कर दी। वह ज्यादा बोलने के कारण फंस गए और उनके साथी छात्र ने उनको पकड़वा दिया। जिनकी यूएमसी बनाकर जैकेट व अन्य उपकरण सील कर दिए गए और अब लिफाफे की सील खोलकर जांच करने के बाद पूरा खुलासा हुआ है। ऐसे छात्रों पर शिकंजा कसते हुए पेपर निरस्त कर दिए गए हैं।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल की दिसंबर 18 में परीक्षा हुई थी। जिसमें बीटेक के दो छात्रों के पास इलेक्ट्रानिक उपकरण मिलने पर यूएमसी बनाकर उत्तर पुस्तिका व उपकरणों को लिफाफे में सील कर दिया गया था। उस समय इलेक्ट्रानिक उपकरण रखने के कारण ही यूएमसी बनाई गई थी और उनकी जांच नहीं की गई थी। अब उन छात्रों की यूएमसी बनाने पर कमेटी के सामने सुनवाई की गई, जहां लिफाफों को खोला गया और इलेक्ट्रानिक उपकरणों की जांच की गई। जिसके बाद कमेटी के सदस्य भी चौंक गए कि इंजीनियरिंग के छात्र नकल करने के लिए किस-किस तरह के उपकरण खुद ही तैयार कर रहे हैं। एक छात्र ने जैकेट की सिलाई को खोलकर अंदर वायरिंग की हुई थी और उस वायरिंग को एक छोटे सिस्टम से जोड़ा गया था, जिसमें मोबाइल सर्किट बनाया गया था। उसमें सिम डाला गया था और उसपर फोन मिलाने पर घंटी नहीं आती थी, बल्कि सीधे फोन कनेक्ट होकर बात होना शुरू हो जाती थी। छात्र ने बात करने के लिए एक छोटा वायरलेस स्पीकर कान में लगाया हुआ था जो जैकेट की वायरिंग से सिगनल पकड़ता था। इस तरह ही एक अन्य छात्र ने एटीएम कार्ड की तरह मोबाइल का सर्किट तैयार कर लिया था, जिसमें सिम कार्ड लगाया हुआ था और कान में वायरलेस स्पीकर के सहारे बात करता था। ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि मोबाइल रखने पर सीधे तौर पर पकड़ा जा सकता है। लेकिन इस तरह केवल सर्किट जेब में होने पर किसी को शक नहीं हो सकता था। लेकिन जब लगातार बातचीत करने पर पास में बैठे छात्र ने परेशान होने की शिकायत की तो उसके बाद ही यह छात्र पकड़ में आए। उससे पहले परीक्षा के समय ड्यूटी देने वाले शिक्षक भी उनको नहीं पकड़ सके। अब कमेटी ने इस तरह नकल करने वालों के पेपर निरस्त कर दिए हैं।
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परीक्षा के दौरान पर्ची या इलेक्ट्रानिक उपकरण इस्तेमाल करते हुए कोई पकड़ा जाता है तो उसकी यूएमसी बनाई जाती है। जिनमें कालेज के छात्र भी शामिल रहते हैं। उनकी यूएमसी पर सुनवाई कमेटी करती है और कमेटी ने अभी सुनवाई की है। उसकी रिपोर्ट मेरे पास नहीं आई है, उस रिपोर्ट के आधार पर ज्यादा कुछ बता सकता हूं।
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-प्रो. राजेंद्र अनायत, वीसी मुरथल यूनिवर्सिटी
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अंकित चौहान
सोनीपत। इंजीनियरिंग के छात्र नए-नए उपकरण तैयार कर रहे हैं, लेकिन उन उपकरणों का इस्तेमाल गलत कार्यों में भी करके खुद फंस रहे हैं। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल के इंजीनियरिंग के छात्रों ने ऐसा ही कुछ किया है। जहां नकल करने के लिए वायरलेस सिस्टम वाले जैकेट व कार्ड बना डाले और उनके सहारे नकल भी करनी शुरू कर दी। वह ज्यादा बोलने के कारण फंस गए और उनके साथी छात्र ने उनको पकड़वा दिया। जिनकी यूएमसी बनाकर जैकेट व अन्य उपकरण सील कर दिए गए और अब लिफाफे की सील खोलकर जांच करने के बाद पूरा खुलासा हुआ है। ऐसे छात्रों पर शिकंजा कसते हुए पेपर निरस्त कर दिए गए हैं।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल की दिसंबर 18 में परीक्षा हुई थी। जिसमें बीटेक के दो छात्रों के पास इलेक्ट्रानिक उपकरण मिलने पर यूएमसी बनाकर उत्तर पुस्तिका व उपकरणों को लिफाफे में सील कर दिया गया था। उस समय इलेक्ट्रानिक उपकरण रखने के कारण ही यूएमसी बनाई गई थी और उनकी जांच नहीं की गई थी। अब उन छात्रों की यूएमसी बनाने पर कमेटी के सामने सुनवाई की गई, जहां लिफाफों को खोला गया और इलेक्ट्रानिक उपकरणों की जांच की गई। जिसके बाद कमेटी के सदस्य भी चौंक गए कि इंजीनियरिंग के छात्र नकल करने के लिए किस-किस तरह के उपकरण खुद ही तैयार कर रहे हैं। एक छात्र ने जैकेट की सिलाई को खोलकर अंदर वायरिंग की हुई थी और उस वायरिंग को एक छोटे सिस्टम से जोड़ा गया था, जिसमें मोबाइल सर्किट बनाया गया था। उसमें सिम डाला गया था और उसपर फोन मिलाने पर घंटी नहीं आती थी, बल्कि सीधे फोन कनेक्ट होकर बात होना शुरू हो जाती थी। छात्र ने बात करने के लिए एक छोटा वायरलेस स्पीकर कान में लगाया हुआ था जो जैकेट की वायरिंग से सिगनल पकड़ता था। इस तरह ही एक अन्य छात्र ने एटीएम कार्ड की तरह मोबाइल का सर्किट तैयार कर लिया था, जिसमें सिम कार्ड लगाया हुआ था और कान में वायरलेस स्पीकर के सहारे बात करता था। ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि मोबाइल रखने पर सीधे तौर पर पकड़ा जा सकता है। लेकिन इस तरह केवल सर्किट जेब में होने पर किसी को शक नहीं हो सकता था। लेकिन जब लगातार बातचीत करने पर पास में बैठे छात्र ने परेशान होने की शिकायत की तो उसके बाद ही यह छात्र पकड़ में आए। उससे पहले परीक्षा के समय ड्यूटी देने वाले शिक्षक भी उनको नहीं पकड़ सके। अब कमेटी ने इस तरह नकल करने वालों के पेपर निरस्त कर दिए हैं।
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परीक्षा के दौरान पर्ची या इलेक्ट्रानिक उपकरण इस्तेमाल करते हुए कोई पकड़ा जाता है तो उसकी यूएमसी बनाई जाती है। जिनमें कालेज के छात्र भी शामिल रहते हैं। उनकी यूएमसी पर सुनवाई कमेटी करती है और कमेटी ने अभी सुनवाई की है। उसकी रिपोर्ट मेरे पास नहीं आई है, उस रिपोर्ट के आधार पर ज्यादा कुछ बता सकता हूं।
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-प्रो. राजेंद्र अनायत, वीसी मुरथल यूनिवर्सिटी