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जिला परिषद के पार्षदों व सरपंचों में खींचतान, गांवों में एक करोड़ रुपये के काम ठप पड़े, अब 4.5 करोड़ से होगा विकास
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जिला परिषद बोर्ड की बैठक में नहीं आए 23 अफसर, पार्षदों ने किया हंगामा, शो-कॉज नोटिस जारी
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। जिला परिषद बोर्ड की दस महीने बाद हुई बैठक में केवल जिला परिषद व पंचायती राज विभाग के अधिकारी ही पहुंचे। कई विभागों के अधिकारियों के नहीं पहुंचने के कारण पार्षद अपनी समस्याएं नहीं रख सके। बैठक में जिला परिषद पार्षदों और सरपंचों के बीच चल रही खींचतान सामने आ गई। इस खींचतान के कारण ही गांवों में एक करोड़ रुपये के काम डेढ़ साल से ठप पड़े हुए हैं, एक करोड़ रुपया खातों में ब्लॉक हो चुका है। अधिकारियों ने पार्षदों से विकास कार्य कराने के लिए सूची देने को कहा, जिससे इस ब्लॉक हो चुके एक करोड़ रुपये से अन्य काम कराए जा सकें। वहीं जिला परिषद में आए 4.5 करोड़ रुपया से भी चेयरपर्सन द्वारा सभी पार्षदों को क्षेत्रवार बांटकर विकास कार्य कराए जाएंगे। बैठक से गायब रहे अफसरों को शो-कॉज नोटिस जारी करके जवाब मांगने का प्रस्ताव भी पास हुआ।
जिला परिषद बोर्ड की बैठक इस साल फरवरी माह में हुई थी और उसके बाद एक भी बैठक नहीं कराई गई। पहले चेयरपर्सन व वाइस चेयरमैन की खींचतान के कारण मीटिंग नहीं हो रही थी तो उसके बाद दो महीने से सीईओ के ट्रांसफर के कारण बैठक लटकी थी। जिला परिषद कार्यालय में मंगलवार को बोर्ड बैठक शुरू होते ही डिप्टी सीईओ देवराज दांगी ने हर दो महीने में मीटिंग कराने की बात कही। जिसमें डिप्टी सीईओ ने बताया कि पार्षदों ने गांवों में विकास कार्य कराने के लिए प्रस्ताव दिए थे, जिनपर काम शुरू हो चुका था। लेकिन पार्षदों व सरपंचों की खींचतान के कारण वह विकास कार्य शुरू होते ही बंद हो गए और इस कारण लगभग एक करोड़ रुपया खातों में ब्लॉक हो गया है। जिनमें तालाब की रिटर्निंग वॉल, कम्यूनिटी चौपाल, एससी चौपाल, पार्क का गेट आदि बनाना शामिल है। डिप्टी सीईओ ने पार्षदों से कहा कि अगर उनकी सरपंचों के साथ खींचतान खत्म नहीं होती है तो वह दूसरे काम कराने के लिए लिस्ट दे सकते हैं, जिससे उस एक करोड़ रुपये को उन कार्यों में लगाया जा सके। जिसपर पार्षदों ने सहमति जताते हुए कहा कि आगे से उनकी ग्रांट से कोई भी काम सरपंचों के माध्यम से नहीं कराए जाएं और उसे ब्लॉक समिति के माध्यम से कराया जा सकता है।
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गांवों में विकास पर खर्च होंगे 4.5 करोड़ रुपये
जिला परिषद में कई मदों में 4.5 करोड़ रुपये का बजट आया हुआ है। जिसे ग्रामीण क्षेत्र में विकास पर खर्च किया जाना है। उसपर भी बैठक में चर्चा की गई और यह तय किया गया कि यह 4.5 करोड़ रुपये सभी पार्षदों को अपने वार्ड में विकास कराने के लिए बराबर दिए जाएंगे। इसके लिए चेयरपर्सन मीना नरवाल को जिम्मेदारी सौंपी गई कि वह सभी पार्षदों को यह ग्रांट बराबर वितरित करें। इसके लिए सभी पार्षद अपने यहां के विकास कार्यों के प्रस्ताव चेयरपर्सन को देंगे और उसके आधार पर ग्रांट जारी कर दी जाएगी।
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29 अफसरों को भेजा गया बैठक का एजेंडा, केवल छह पहुंचे
जिला परिषद के वाइस चेयरमैन बिजेंद्र मलिक ने कहा कि बैठक का पत्र 29 अफसरों को भेजा गया था, जिससे वह बैठक में शामिल हो सकें। उनके बैठक में शामिल होने से सभी पार्षदों के क्षेत्र की समस्याओं का निस्तारण यहां हो जाता। लेकिन बैठक में केवल छह विभागों के अधिकारी ही पहुंचे, जिनमें पंचायती राज, खाद्य आपूर्ति आदि शामिल रहे। इस तरह लगभग 23 अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचे, जिसपर पार्षदों ने हंगामा कर दिया। वाइस चेयरमैन बिजेंद्र मलिक ने मांग उठाई कि इन सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जिसपर सीईओ मंदीप कौर ने कहा कि सभी को शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे जवाब तलब किया जाएगा।
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23 बस क्यू शेल्टर बनाए जाएंगे, दो दिन में मांगे जगह के नाम
प्रदेश के सभी जिलों में पार्षदों के वार्ड में एक-एक बस क्यू शेल्टर बनाया जाना है और उसका बजट भी पिछले एक साल से ज्यादा समय से आया हुआ है। प्रदेश के अन्य सभी जिलों में बस क्यू शेल्टर बन चुके हैं, लेकिन सोनीपत ही एक ऐसा जिला है जहां अभी तक बस क्यू शेल्टर नहीं बने हैं। इस कारण ही डिप्टी सीईओ देवराज दांगी ने पार्षदों से साफ कहा कि वह जिस जगह पर बस क्यू शेल्टर बनवाना चाहते हैं, उस जगह का नाम दो दिन के अंदर उपलब्ध कराए, जिससे वहां काम शुरू कराया जा सके।
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डी प्लान का रुपया मनमानी से बांटने का आरोप
जिला परिषद की बैठक में वाइस चेयरमैन बिजेंद्र मलिक, पार्षद जयदीप यादव, आरती बरौणा आदि ने आरोप लगाया कि जिले में डी प्लान का रुपया कुछ नेताओं के इशारे पर चुनिंदा जगहों पर बांट दिया गया है। जबकि जिला परिषद के पार्षदों से इस बारे में पूछा तक नहीं गया है। जिले के जन प्रतिनिधियों पर भी डी प्लान का 24 करोड़ 92 लाख रुपये मनमानी करके बांटने का आरोप लगाया गया। जिसपर सीईओ मंदीप कौर ने कहा कि इस तरह के आरोप गलत है और जहां जरूरत थी, उसके आधार पर रुपया बांटा गया है।
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अवैध खनन व भ्रष्टाचार के मामले भी उठे
खुर्मपुर के रहने वाले पार्षद नंदकिशोर चौहान ने आरोप लगाया कि उनके वार्ड में अवैध खनन करके मिट्टी व रेत उठाया गया है। उसके लिए कुछ लोगों ने झूठे शपथ पत्र भी दिए हैं और इस तरह सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है। जिसकी जांच पहले डीडीपीओ रहे देवराज दांगी कर चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सीईओ ने इस मामले में संज्ञान लेने की बात कही तो पेंशन के कागजात ठीक करने से लेकर राशन कार्ड से नाम काटने व चढ़ाने की एवज में ई दिशा केंद्रों पर रुपये मांगने का आरोप लगाया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। जिला परिषद बोर्ड की दस महीने बाद हुई बैठक में केवल जिला परिषद व पंचायती राज विभाग के अधिकारी ही पहुंचे। कई विभागों के अधिकारियों के नहीं पहुंचने के कारण पार्षद अपनी समस्याएं नहीं रख सके। बैठक में जिला परिषद पार्षदों और सरपंचों के बीच चल रही खींचतान सामने आ गई। इस खींचतान के कारण ही गांवों में एक करोड़ रुपये के काम डेढ़ साल से ठप पड़े हुए हैं, एक करोड़ रुपया खातों में ब्लॉक हो चुका है। अधिकारियों ने पार्षदों से विकास कार्य कराने के लिए सूची देने को कहा, जिससे इस ब्लॉक हो चुके एक करोड़ रुपये से अन्य काम कराए जा सकें। वहीं जिला परिषद में आए 4.5 करोड़ रुपया से भी चेयरपर्सन द्वारा सभी पार्षदों को क्षेत्रवार बांटकर विकास कार्य कराए जाएंगे। बैठक से गायब रहे अफसरों को शो-कॉज नोटिस जारी करके जवाब मांगने का प्रस्ताव भी पास हुआ।
जिला परिषद बोर्ड की बैठक इस साल फरवरी माह में हुई थी और उसके बाद एक भी बैठक नहीं कराई गई। पहले चेयरपर्सन व वाइस चेयरमैन की खींचतान के कारण मीटिंग नहीं हो रही थी तो उसके बाद दो महीने से सीईओ के ट्रांसफर के कारण बैठक लटकी थी। जिला परिषद कार्यालय में मंगलवार को बोर्ड बैठक शुरू होते ही डिप्टी सीईओ देवराज दांगी ने हर दो महीने में मीटिंग कराने की बात कही। जिसमें डिप्टी सीईओ ने बताया कि पार्षदों ने गांवों में विकास कार्य कराने के लिए प्रस्ताव दिए थे, जिनपर काम शुरू हो चुका था। लेकिन पार्षदों व सरपंचों की खींचतान के कारण वह विकास कार्य शुरू होते ही बंद हो गए और इस कारण लगभग एक करोड़ रुपया खातों में ब्लॉक हो गया है। जिनमें तालाब की रिटर्निंग वॉल, कम्यूनिटी चौपाल, एससी चौपाल, पार्क का गेट आदि बनाना शामिल है। डिप्टी सीईओ ने पार्षदों से कहा कि अगर उनकी सरपंचों के साथ खींचतान खत्म नहीं होती है तो वह दूसरे काम कराने के लिए लिस्ट दे सकते हैं, जिससे उस एक करोड़ रुपये को उन कार्यों में लगाया जा सके। जिसपर पार्षदों ने सहमति जताते हुए कहा कि आगे से उनकी ग्रांट से कोई भी काम सरपंचों के माध्यम से नहीं कराए जाएं और उसे ब्लॉक समिति के माध्यम से कराया जा सकता है।
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गांवों में विकास पर खर्च होंगे 4.5 करोड़ रुपये
जिला परिषद में कई मदों में 4.5 करोड़ रुपये का बजट आया हुआ है। जिसे ग्रामीण क्षेत्र में विकास पर खर्च किया जाना है। उसपर भी बैठक में चर्चा की गई और यह तय किया गया कि यह 4.5 करोड़ रुपये सभी पार्षदों को अपने वार्ड में विकास कराने के लिए बराबर दिए जाएंगे। इसके लिए चेयरपर्सन मीना नरवाल को जिम्मेदारी सौंपी गई कि वह सभी पार्षदों को यह ग्रांट बराबर वितरित करें। इसके लिए सभी पार्षद अपने यहां के विकास कार्यों के प्रस्ताव चेयरपर्सन को देंगे और उसके आधार पर ग्रांट जारी कर दी जाएगी।
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29 अफसरों को भेजा गया बैठक का एजेंडा, केवल छह पहुंचे
जिला परिषद के वाइस चेयरमैन बिजेंद्र मलिक ने कहा कि बैठक का पत्र 29 अफसरों को भेजा गया था, जिससे वह बैठक में शामिल हो सकें। उनके बैठक में शामिल होने से सभी पार्षदों के क्षेत्र की समस्याओं का निस्तारण यहां हो जाता। लेकिन बैठक में केवल छह विभागों के अधिकारी ही पहुंचे, जिनमें पंचायती राज, खाद्य आपूर्ति आदि शामिल रहे। इस तरह लगभग 23 अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचे, जिसपर पार्षदों ने हंगामा कर दिया। वाइस चेयरमैन बिजेंद्र मलिक ने मांग उठाई कि इन सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जिसपर सीईओ मंदीप कौर ने कहा कि सभी को शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे जवाब तलब किया जाएगा।
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23 बस क्यू शेल्टर बनाए जाएंगे, दो दिन में मांगे जगह के नाम
प्रदेश के सभी जिलों में पार्षदों के वार्ड में एक-एक बस क्यू शेल्टर बनाया जाना है और उसका बजट भी पिछले एक साल से ज्यादा समय से आया हुआ है। प्रदेश के अन्य सभी जिलों में बस क्यू शेल्टर बन चुके हैं, लेकिन सोनीपत ही एक ऐसा जिला है जहां अभी तक बस क्यू शेल्टर नहीं बने हैं। इस कारण ही डिप्टी सीईओ देवराज दांगी ने पार्षदों से साफ कहा कि वह जिस जगह पर बस क्यू शेल्टर बनवाना चाहते हैं, उस जगह का नाम दो दिन के अंदर उपलब्ध कराए, जिससे वहां काम शुरू कराया जा सके।
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डी प्लान का रुपया मनमानी से बांटने का आरोप
जिला परिषद की बैठक में वाइस चेयरमैन बिजेंद्र मलिक, पार्षद जयदीप यादव, आरती बरौणा आदि ने आरोप लगाया कि जिले में डी प्लान का रुपया कुछ नेताओं के इशारे पर चुनिंदा जगहों पर बांट दिया गया है। जबकि जिला परिषद के पार्षदों से इस बारे में पूछा तक नहीं गया है। जिले के जन प्रतिनिधियों पर भी डी प्लान का 24 करोड़ 92 लाख रुपये मनमानी करके बांटने का आरोप लगाया गया। जिसपर सीईओ मंदीप कौर ने कहा कि इस तरह के आरोप गलत है और जहां जरूरत थी, उसके आधार पर रुपया बांटा गया है।
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अवैध खनन व भ्रष्टाचार के मामले भी उठे
खुर्मपुर के रहने वाले पार्षद नंदकिशोर चौहान ने आरोप लगाया कि उनके वार्ड में अवैध खनन करके मिट्टी व रेत उठाया गया है। उसके लिए कुछ लोगों ने झूठे शपथ पत्र भी दिए हैं और इस तरह सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है। जिसकी जांच पहले डीडीपीओ रहे देवराज दांगी कर चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सीईओ ने इस मामले में संज्ञान लेने की बात कही तो पेंशन के कागजात ठीक करने से लेकर राशन कार्ड से नाम काटने व चढ़ाने की एवज में ई दिशा केंद्रों पर रुपये मांगने का आरोप लगाया गया।